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Author Topic: हर कोई है चिंता में ग्रस्त !  (Read 219 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
चिंता हरेक क्यों है ?
प्रश्न बड़ा अजीब सा है
पर प्रश्न बिलकुल सही है
किसीको भूख क्यों नहीं लगती उसकी चिंता
किसीको भूख है पर खाना नहीं है उसकी चिंता
किसीके पास धन नही है उसकी चिंता
किसीके धन बहुत ज्यादा है उसका क्या करे उसकी चिंता
किसीके पास काम करने लायक लड़के है पर काम नही है उसकी चिंता
किसीके पास काम तो बहुत है पर संभालने वाले कोई नहीं है उसकी चिंता
कोई दुबला है उसे उसकी चिंता
कोई मोटा बहुत है उसकी चिंता
कोई का लड़का किसीकी सुनता नहीं है उसकी चिंता
कोई का लड़का माँ बाप का आज्ञाकारी है तो गाँव को चिंता
किसीकी लड़की माँ बाप के पसंद के लड़के को पसंद नहीं करती उसकी चिंता
किसीकी लड़की और दूसरे लड़के से प्रेम करती है माँ बाप को उसकी चिंता
किसीके माँ बाप बेटे को कम उम्र में छोड़कर चले गए उसकी चिंता
किसीके माँ बाप अभी तह ज़िंदा है बेटे को उन लोगो की चिंता
किसीके यहाँ इनकम टैक्स की रेड पड़ गई तो, हो गई सबको चिंता
किसको रात में नींद नहीं आती उसकी चिंता
किसीकी नींद ज्यादा आती है देर से उठता है उसकी चिंता
सरकारी डॉक्टर को अपने चैम्बर की चिंता
मरीजों बैठे बैठे परेशान डॉक्टर अभी तक क्यों नहीं आये उसकी चिंता
आज सुबह से कोई ऑपरेशन का मरीज नहीं आया सर्जन को उसकी चिंता
मरीज ऑपरेशन थियटर में जाने के समय सोचता है क्या होगा उसकी चिंता
और तो और कलयुग भगवान सोचते है क्या कोई सच्चा भक्त नहीं होगा उनको उसकी चिंता
शेष में झक मार  कलयुग में अवतार लेना ही पडेगा भगवान को उसकी चिंता
चिंता से हर कोई चिंतित है पर चिंता को चिंता नहीं ।
पाठक को यह कबिता पसंद आएगी या नहीं मुझको हो रही है उसकी चिंता
------------प्रेमचंद मुरारका