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Author Topic: "खूब" भी खूब है  (Read 142 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
"खूब" भी खूब है
« on: January 09, 2015, 03:49:19 PM »
राहुलजी
आप भी खूब है
" खूब " अकेला क्या कर सकता है
वैसे तो बहुत खूब कर सकता है
भगवानजी खूब रचना रची है
इतनी खूबसूरत दुनिआ ही बना दी
इंसान भी खूब है
नए नए ईजाद कर डाले
औरत भी खूब है
दर्द सहते हुए भी एक नए "खूब" को जन्म देती है
बहन भी खूब है
भाई के हाथ में राखी बांधकर रक्षा का वचन ले लेती है
पत्नी भी खूब है
पति को पाने के लिए अपने बाबुल का घर छोड़ देती है
पति भी खूब है
पत्नी की ख़ुशी के चाँद सितारे तोड़ लाता है
बच्चे भी खूब है
जिंदगी में बहार ला देते है
हमारे शहीद भी खूब थे
स्वाधीनता के लिए शहीद हो गए
हमारे तीनो सेना के जवान भी खूब है
वह भारतमाता के लिए सारे रिश्ते को भूल जाते है
हमारे किसान भाई भी खूब है
हमारा पेट भरने के लिए दिन रात मेहनत करते है
हमारे मज़दूर भाई भी खूब है
अपना पसीना बहाकर देश की प्रगति करते रहते है
हमारा जातीय संगीत भी खूब है
हमारे रगो में देश प्रेम की भावना को उज्जिबित कर देता है
हमारा भारत भी खूब है
अनगिनत भाषा सम्प्रदाय को एक धागे से बाँध रखा है
हम भी खूब है
जो हम इस महान देश के नागरिक है ।
------प्रेमचंद मुरारका