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Author Topic: बुढ़ापे में माँ-बाप सिर का दर्द भाग-1  (Read 232 times)

Offline somsharma

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माँ-बाप पे जब आयो बुढ़ापा !
दिया सब लोंडे-लोंड़ियन भुलाए !!
मात-पिता मिले छ: जन पाले !
पर छ: पुत्रन से दो ना पाले जायें !!1!!

चार लोंडे और दोऊ लोंड़ियन को !
मिल मात-पिता दिए मानुष बनाए !!
पढ़ लिखकर जब लगे कमावन !
दिए मात-पिता झट ठुकराए !!2!!

बूढ़ा बूढ़ी रोवे निस दिन !
कर याद कपुतो की सच्चाई !!
क्या कमी रह गई लालन पालन !
जो ऐसी कृतघन औलाद है पाई !!3!!

बैठे बैठे बापू बोला सुन भागवान !
याद आगई कुछ बीते जीवन की बातें !!
तड़प उठते थे बच्चों की पुकार पर !
ना जाने काटी जागते कितनी रातें !!4!!

रोते रोते अम्मा यूँ बोली !
क्यों जख्म पुराने  खोलो !!
हमरे लिए तो सबही मर गये !
क्या शुभ-अशुभ तुम बोलो !!5!1

पोंछ के आँसू बहते आँख से !
बूढ़ी यूँ कुछ बतियाई !!
याद कर बलिदान जीवन !
बस यूँही आँखें भर आई !!6!!

बापू बोले ज्यूँ ज्यूँ लोंडे घर में जन्मे
सब घरवाले दिए बहुत हर्शाये !!
रात दिवस बलिहारी जावें !
ले ले लोंडो की रोज बलाये !!7!!

भाग-2 अगले अंक में