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Author Topic: क्या करू, क्या जबाब दू ???????  (Read 184 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
में रो रहा था
लोग देख रहे थे
पूछने लगे क्यों भाई क्या हुआ 
मैंने कहा कुछ नही
लोग बोलने लगे पागल है शायद

में हंस रहा था
लोगोने पूछा क्या बात है भाई
हंस क्यों रहे हो
मैंने कहा कोई बात नहीं
लोगोने सोचा पागल है शायद

में चुपचाप बैठा था, गमगीन होकर
लोगोने पूछा क्या हुआ भाई
लोगोके दिमाग में आया
कोई सदमा लगा होगा
इसलिए पागल हो गया शायद

में पार्क में बैठा बड़बड़ा रहा था
लोगोने मुझे घेर लिया
क्या बड़बड़ा रहे हो
मैंने कहा कुछ तो नहीं
लोगोने मुझे पागल करार कर दिया

किसी का कोई नुक्सान किये बगैर
कोई भी कुछ कर सकता है
यह बहुत साधारण सी बात है
फिर क्यों मुझे पागलखाने
भेज दिया गया

आप कहेंगे
यह कोई साधारण बात नही है
समाज की दृष्टिकोण से यह अस्वाभिक है
बेमतलब रोना, बेमतलब हंसना
बेमतलब चुप हो जाना

में अगर जबाब दे भी देता तो
क्या वह लोग कुछ कर पाते
धीरे धीरे अपने रास्ते चले जाते
किसको फुर्सत है ब्यबस्था करने की
यह तो महज़ एक उत्सुकता है

लोग मेरी बाते सुन लेते
और ज्यादा से ज्यादा पागलखाना में
फ़ोन कर देते
फिर यह भी खबर नहीं लेते
क्या हुआ मेरा ह्स्र

आपको बता रहा हु
आज के दिन मेरी माँ का देहांत हो गया था
और आज की तारीख में मेरी शादी हुई थी
में गमगीन इसलिए था मेंरा कर्ज़ा कैसे चुकेगा
में बड़बड़ा रहा था घर जाकर क्या कहूँगा

में सोच रहा था क्या अजीब दुनिया है
अपनी मर्ज़ी की कोई कुछ नहीं कर सकता
बर्शते संबिधान के बिरुद्ध ना हो
आज हमारा गणतंत्र दिवस है
क्या में भारत का नागरिक नही हु ?
--------प्रेमचंद मुरारका