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Author Topic: तब...  (Read 265 times)

Offline gurupawanbharti

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तब...
« on: February 04, 2015, 10:50:55 AM »
नई कोपलें
तब निकली थी,
फूल नये तब खिलने लगे थे!
स्वच्छन्द विहग
तैर रहे थे नभ में,
अलि
कलियों पे मंडराने लगे थे!!
हवा सुगंधित
आई थी एक,
सागर भी लहराया था!
मन की लहरें
हिलोरें लेती,
समय मधुर तब आया था!!
राग द्वेष से
विचलित करके,
एक
सहज सवेरा लाए थे!
सहसा
फूटा था प्रेम का स्वर तब,
जब
मेरे जीवन मे तुम आए थे!!
Very simple but not Common.
(National Record Holder in book publishing)

Offline anilkumarsingh

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Re: तब...
« Reply #1 on: February 20, 2015, 11:38:49 AM »
नई कोपलें
तब निकली थी,
फूल नये तब खिलने लगे थे!
स्वच्छन्द विहग
तैर रहे थे नभ में,
अलि
कलियों पे मंडराने लगे थे!!
हवा सुगंधित
आई थी एक,
सागर भी लहराया था!
मन की लहरें
हिलोरें लेती,
समय मधुर तब आया था!!
राग द्वेष से
विचलित करके,
एक
सहज सवेरा लाए थे!
सहसा
फूटा था प्रेम का स्वर तब,
जब
मेरे जीवन मे तुम आए थे!!