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Author Topic: अन्धेरा दुश्मन नहीं दोस्त है  (Read 203 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
अँधेरे से बचने के लिए इन्वर्टर लगाया
इन्वेर्टोर की बैटरी जब काम न करे
उसलिए मोमबती लाकर रखा
सोने के समय मोमबती सिरहाने रखता
साथ में माचिस भी रखता
क्योकि मुझे अंधेरी बहुत डर लगता है
पर होनी को कोन टाल सकता है
सुबहसे ही इलेक्ट्रिक लाइन नहीं थी
मरम्मत का काम चल रहा था
इन्वर्टर चल रहा था जब तक दम था
फिर बेचारा चुपचाप शांत हो गया
मजबूरन शाम होतेही मोमबती जलाई
और एक मोमबती सिरहाने रखकर सो गया
इतनेमें जोर से हवा का झोका आया
मोमबती बुझ गई अन्धेरा छा गया
मुझे डर लगने लगा
दूसरी मोमबती जलाने के लिए
माचिस खोजने लग गया
पर माचिस हाथ न आई
अन्धेरा कहने लगा में किसीका दुश्मन नहीं हु
सच मानो तो में सच्चा दोस्त हु
सुबह सूरज जरूर उगेगा फिर डर किस बात का
अन्धेरा जीवन को उजाले की तरफ ले जाता है
धीरज की परीक्षा लेता है
जबतक तुम मुझसे डरोगे
में डराता रहूंगा
मुझसे दोस्ती करलो, डरना छोड़ दो
आराम से सो जाओ
सुबह सूरज उग ही जाएगा
तब तक सुख की नींद लेते रहो
मुझसे दोस्ती करलो
में किसीको डराता नहीं हु
में तो दोस्ती का हाथ बढ़ना चाहता हु ।
--------प्रेमचंद मुरारका