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Author Topic: दीदार की चाहत ।  (Read 120 times)

Offline pankaj509

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दीदार की चाहत ।
« on: February 19, 2015, 09:26:24 AM »
हर तरफ तेरा ही चेहरा नज़र आता रहा ।
दिल की बचैनी घड़ी की तरह बढ़ता रहा ।।
सोचा , और उठा मै , पहुँच गया उस जगह ।
जहाँ मैंने तेरा दीदार किया था कल सुबह ।।

मौसम बड़ी सुहावन थी ।
चहल -पहल बढ़ती रही ।।
आश लिए नज़रे तुम्हे ढूढ़ती रही ।
मिली ना तू , ये सिलसिला कई दिनों तक चलती रही ।।

अपने आप को अकेला महसूस करता रहा ।
तेरे प्यार के सागर में अपने आप को डूबता रहा ।।
सोचा , डूब कर ही मेरी कश्ती किनरे लगे ।
डर था , कोई तेरे प्यार को अपने बस में ना करे ।।

सुबह देखा , मैने ओस की बूँदे पड़ी थी हर जगह ।
शायद आसमा का आँसु था , धरती के ना मिलने पर ।।
मेरा प्यार भी कुछ इसी तरह का था , रोता था ।
पर आज तक तू मिली ना मुझे किसी जगह ।


पंकज कुमार
अर्वा कोठी ( नगरा ) बिहार
9504482723