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Author Topic: होली स्पेशल:-बै जा नी ह पी ना ला सात रंगों पर आधारित कविता "माशूका के नाम होली"  (Read 166 times)

Offline satyendragovind@gmail.com

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बैगनी रंग आज मेरे हाथ लगा है
समझ ले कि तेरे लहंगे का भाग जगा है

ले इसे पानी मे अभी घोल देता हूँ
अब रोकना मत टोकना मत बोल देता हूँ

होली मे चोली भी न रहेगा सूनी
इसमे तो मै पोत हीं दूँगा रंग जामुनी

हर अंग पे भी रंग आज डालूँगा मै
रंगों के त्योहार का मजा लूँगा मै

पल्लू हरा हरा करूँगा सूनी कलाई
तुझसे दूर करूँगा आज तेरी तन्हाई

थोड़ी देर तो और साथ रह जा तू मेरे
नारंगी कर दूँगा मै होठों को तेरे

अपनी हाथों से एक और कमाल करूँगा
तेरे गोरे गाल अभी मै लाल करूँगा

और आँखों के इर्दगिर्द रंग नीला होगा
हाथ तेरा बस मेरे साथ हीं पीला होगा

@सत्येन्द्र "गोविन्द" (नरकटियागंज, बिहार)
मो.नं. - 8051804177