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Author Topic: “ इंद्रधनुषी सपनों की होली “  (Read 462 times)

Offline rochika.sharma.3

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   “   इंद्रधनुषी सपनों की होली   “
ओढ़ चुनरिया सतरंगी ,  सजी पूर्णिमा फाल्गुन की,
करके विदा शीत ऋतु को,   वसंत संदेशा लाई प्रकृति  ।
   
लदे बगीचे फूलों से,   गेहूँ की बलियाँ इठलाई,
लगे किसान नाचने झूमने ,   लो आई होली आई  ।   
 
पलाश, जासौंन्, चंदन,  गुलाब,   रंग , अबीर , गुलाल उड़ें,
फाग,  धमार,  गाएँ हुरियारे,   ढोलक,   झांझ,   मंज़ीर बजे  ।
   
ब्रिज में रास रचाए कान्हा ,    हर्षित,    पुलकित हर ब्रिज बाला,
अपने रंग में रंग लो श्याम ,   फीका ना हो कभी रंग निराला ।

दूर खड़ी इक नवयौवना ,    मेहन्दी का रंग ना जिसका छूटा,
सुहाग जो उजड़ा, दुनिया उजड़ी ,   श्वेत वरण ने हर रंग लूटा ।
   
उसको भी ले लें हम संग में ,    रंग जाए वो सब के रंग में,
जीवन इंद्रधनुषी कर दें  ,   सपनों में रंग उसके भर दें   ।   
 
रूढ़िवाद को दूर भगाएँ  ,    उत्पीड़न , बैर की होलिका जलाएँ ,
कटुता भूल पुरानी मन की ,  आओ हम होली मनाएँ     ।     
                                   
                                  रोचिका शर्मा (इंजिनियर)
                                                  चेन्नई
दोस्तों यदि आपको मेरी कविता पसंद आए तो आप से अनुरोध है की रिप्लाइ ज़रूर करें    ।
                         धन्यवाद

« Last Edit: March 05, 2015, 03:38:12 PM by rochika.sharma.3 »

akash maurya

  • Guest
ji is kavita sath sath apke vyavar ka b pata chalta h. ye kavita bahut hi achha aur thoda kalpana par bhi adharit h. mujhe kalpanao se bharpur poem achha lagta h. jayram ji ki

Offline rochika.sharma.3

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THANK U AKASH
happy hOLI TO U AND YOUR FAMILY.