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Author Topic: परिबर्तन का फॉर्मूला  (Read 118 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
परिबर्तन का फॉर्मूला
« on: March 06, 2015, 10:12:25 PM »
तुम लड़ रहे हो
किससे
अपनी चाहत से
क्या तुम जानते नहीं
चाहत का कोई
अंत नहीं
एक पूरी होगी
दूसरी तैयार होगी
वह पूरी होते ही
तीसरी तैयार होगी
लड़ते लड़ते
थक जाओगे
उम्र बढ़ती जायेगी
जिसके लिए
तुम्हारी चाहत थी
वह आज
पराये हो गए
अब तो तुम
तन से तो
थक गए हो ही
मन से भी
टूट गए हो
न कंही जाना
न किसीका आना
सिर्फ सोचते रहना
पुरानी यादोको
रोमन्थन करते
रहना
अपने अहं से
लड़ते रहना
जिसका परिणाम
तुम्हे मालुम है
हार निश्चित है
अब तुम निरस्त्र हो
न तुम्हारे साथ
कोई है
फिर क्यों सोच
रहे हो
मैंने यह किया था
तुम तो निमित्त
मात्र थे
जो कुछ मैंने
तुमसे कराया
तुम करते रहे
अब भी समय है
मेरे शरण में
आ जाओ
आगे अपनोको
अपने बनाओ
फिर परायो को
अपना बनाओ
देखो कितनी
शान्ति मिलेगी
यह महाभारत
का काल नहीं है
यह कलयुग है
तुमको खुदको
बदलना होगा
तुम्हारा आज
और कल भी
बदल जाएगा ।
-प्रेमचंद
 मुरारका