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Author Topic: वास्तबिक प्रेम  (Read 138 times)

Offline pcmurarka

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  • प्रेमचंद मुरारका
वास्तबिक प्रेम
« on: March 25, 2015, 03:53:45 PM »
शांत वातावरण
अशांत जोड़े
चुपचाप बैठे नहीं थे
बाते कर रहे थे
लड़का दलित था
लड़की खानदानी थी
शादी शायद एक सपना था
प्रेम करना गुनाह नही था
प्रेम दोनोमे हो गया था
दोनों परिस्थिति से वाकिफ थे
फिर भी प्रेम के हाथो मज़बूर थे
क्योकी प्रेम तो अंधा होता है
लड़की ने कहा
चलो भाग चलते है
लड़का कहने लगा
तुम्हारा तो कुछ नहीं होगा
मेरे नाम पर वारंट निकल जाएगा
मेरे परिवार पर निर्यातंन होगा
उनका सामाजिक वहिष्कार होगा
लड़के ने कहा
ऐसा सपनेमे भी मत सोचना
इतिहास गवाह है
ऐसा होने का रहा
प्रेम तो कोई वासना नही है
वह तो निर्मल है
आज से मुझे दोस्त समझो
तुम खुश रहो
यह ही मेरे लिए बहुत है
हमलोग दोस्ती को
इतिहास बनायेगे ।
-प्रेमचंद मुरारका