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Author Topic: नज़रें टिकी हैं देश पर .....  (Read 4880 times)

Offline truthlights

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  • सत्य प्रकाश शर्मा ' सत्य '
नज़रें टिकी हैं देश पर , सारे जहान  की।
इज्ज़त लगी है दांव पर भारत महान की।

आओ चलो मिलकर बंटाए हाथ हम सभी,
सौगंध हमें बाइबल , गीता, कुरान की।

इन नफ़रतों की आग में अब ना जलेंगे हम,
तैयार की है भूमिका ऊंची उड़ान की।

जो सीख दे रहे हैं हमें जानते नहीं,
गोदी में खेलते हैं हम , वेदोपुरान  की।

स्वीकार चौधराहटों को किसलिए करे,
इतनी नहीं मजबूरीया हिंदोस्तान की।

हम शांतिदूत हैं मगर असमर्थ तो नहीं,
दिखला दिया आइ घड़ी जब इम्तिहान की।

दुश्मन नहीं टिक पाएगा इक पल भी सामने,
बोलेंगे मिलके 'जय जवान, जय किसान' की।

झुक जाये देश 'सत्य' का मुमकिन कभी नहीं,
हस्ती मिटेगी शत्रु के नामो - निशान की।

'सत्य' 
सत्य प्रकाश शर्मा ' सत्य '
163 एम आई जी
शहीद नगर
आगरा

Offline chandwani52

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Re: नज़रें टिकी हैं देश पर .....
« Reply #1 on: September 01, 2012, 10:31:54 AM »
सत्य जी,
रचना मन को भा गई--
जितनी प्रशंसा करे कम है,  भारत के इस गान की ,
देश के लिए मर मिटेंगे ,  परवाह नही है जान की। 

....गोपाल चंदवानी
« Last Edit: September 01, 2012, 10:48:57 AM by chandwani52 »

Offline Vishvnand

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Re: नज़रें टिकी हैं देश पर .....
« Reply #2 on: September 01, 2012, 02:36:41 PM »
बहुत सुन्दर रचना यह उभरी है देशभक्ति  प्रेम और उन्कृष्ट भावों की
मगर क्या हम अनदेखी करें जो सत्य स्तिथि है आज अपने देश की
भूल  गए सब नारा " जय जवान जय किसान " औ  भोग रहे हैं भूलें कांग्रेस  की
इक विदेशीजन्मे अयोग्य  व्यक्ति के हाथों सत्ता इस असीमित लज्जा की
और जो मिल  भ्रष्ट कारभार चलाते  हैं अवसरवादी लोभी चापलूसों की
जबकि भारत खुद इक खनि है अपनी उच्च संस्कृति के ज्ञानियों और विद्वानों की

Offline kedar.mehendale

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Re: नज़रें टिकी हैं देश पर .....
« Reply #3 on: September 03, 2012, 03:56:11 PM »
झुक जाए हम किसिके सामने
ये मुमकिन नहीं
काश्मीर किसका है ये बताने
अमरीका की जरूरत नहीं

हम पे  उंगली उठाने के पहले
झाकों आपने गिरेबान मे
आतंक वाद की जड़े दिखेंगी
अमरीका के ही जमीन मे।