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Author Topic: अकथ1  (Read 95 times)

Offline shreyas apoorv

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अकथ1
« on: April 05, 2015, 02:02:30 PM »
जब भी झाँका मैंने उनकी चंचल आँखों में,
लगा समन्दर रुका हो मुझपर बरसने को.
पूछा क्या ये सब मेरे लिए है, कहा उसने,
इज़ाज़त है तुम्हे डूब के मरने को.

श्रेयस अपूर्व
भोपाल