!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: ऐ मौत  (Read 136 times)

Offline Sajan Murarka

  • Hero Member
  • *****
  • Topic Author
  • Posts: 1834
  • Karma: +1/-1
  • Gender: Male
    • my  blog
ऐ मौत
« on: April 05, 2015, 02:05:00 PM »
ऐ मौत,तुझ से कुछ समझना मेरा बाक़ी है
ममता का कर्ज़ अभी तो चुकाना बाक़ी है
जीवन के कुछ फ़र्ज़ अभी निभाना बाक़ी है
अपनों के दर्द पर मरहम लगाना बाक़ी है

रफ्तार में दौड़ती जिन्दगी में कुछ रूठ गये
कुछ जाने अनजाने मिलने से पीछे छूट गये
कुछ सपने शुरू होकर अधूरे बनकर रह गये
कुछ जरूरी काम भी पूरा करने से चूक गये

उन सभी रूठे लोगों को मनाना अभी बाक़ी है
जो मिले नहीं उन्हें अभी गले लगाना बाक़ी है
दिल की नाकाम ख्वाहिशों को दफनाना बाक़ी है
कुछ अधूरे काम को अंजाम तक पहुंचना बाक़ी है

इन सांसों पर जिनके भविष्य टिके रह गये
जो मासूम अपनी मुस्कान अधरों में छिपा गये
जिनका संसार अब बनने से पहले ही मिट गये
उन आंखों के सपने अनिश्चित होकर रह गये

आहिस्ता से बता ऐ मौत तेरा क्या क़हर बाक़ी है
पल पल चलने वाली जिन्दगी में रफ्तार बाक़ी है
झटके में सब खत्म करके क्या चाहत बाक़ी है
मौत, जिन्दगी से ऐसी क्या दुश्मनी तेरी बाक़ी है

(आधारित एवं संशोधित )

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .