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Author Topic: मौत शाश्वत निश्चय  (Read 87 times)

Offline Sajan Murarka

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मौत शाश्वत निश्चय
« on: April 05, 2015, 02:10:06 PM »
मौत शाश्वत निश्चय
पर किसी समय
कई कई अवसर
हर पल मरकर
जीवित रहते
मृत्यु को भोगते
असत्य चारित्रिक लांछन
सामाजिक मर्यादा का हनन
आर्थिक असहाय अवस्था
दारिद्रता, मजबूरी, विवशता
घुटने भरे वह सारे क्षण
जिन्दा रहकर है मरन
कोई नहीं प्रतिकार
निर्बल पर होता अत्याचार
या प्रतिहिंसा का अंजाम
दमन मानसिकता का परिणाम
स्वार्थ जनित चिन्ता धारा
भिन्न भिन्न प्रकार दिखे यह सारा
एक छटपटाहट और बेचैनी
पीड़ित की घुटन रहे अनसुनी
जिसे बताये, उपदेश सुनाय
सहने या लड़ने के देता उपाय
सहभागी बन के नहीं सुलझाये
ग़र कोई मुद्दा ले भी उठाये
पीड़ित का दर्द आखिरकार
नंगा करता उसे भरे बाज़ार
अपमान या अवस्था गत
जीते जी मरता हर वक्त
उन्हें अफसोस या सहानुभूति
दर्द में घृताहूति सा अंजाम देती
यह यातना, और मनोव्यथा
आदमी हर दिन मर मरकर जीता

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .