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Author Topic: फागुन  (Read 86 times)

Offline Sajan Murarka

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फागुन
« on: April 05, 2015, 02:24:50 PM »
फागुन आगत द्वार पर, अधीर हुए सब अंग
उत्साह मन रूके नहीं, मिलन सुख की तरंग
नैन में भाषा अंकित, मुख से कही न जाय
रंग पिचकारी बरसे, अंदर अगन जगाय
मगन मन पुलकित है तन, बरसे लोचन नीर
मधुमास बीते विरही, कैसे मन हो धीर

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .