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Author Topic: कमियों को छिपाते  (Read 335 times)

Offline Sajan Murarka

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कमियों को छिपाते
« on: April 05, 2015, 02:54:30 PM »
कुछ को देखा
अपनी कमियों को छिपाते
बेतुके सवालों से
अपना अहम जताते
बेवजह उलझ
कटु शब्द अपनाते
गलती पर
सीनाजोरी आजमाते
उन्हें क्या कहें
जो समझ नासमझ बन जाते
हर एक बात पर
मरने मारने पे आते
वहम उन में
लोग उनसे ख़ौफ़ खाते
पर मानते नहीं
आवारा को मुंह नहीं लगाते
भोंकने वाले
विशेष जानवर ही कहलाते
अगर उपर से
काट खाने वाले होते
दूर से ही
लोग अपना रास्ता बनाते
जिनके लिए लिखा
वह अगर समझ पाते
चलो अच्छा होता
कम से कम कुछ बच जाते
पर फितरत उनकी
जरूर इस पर भोंकेगें, जानते

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .