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Author Topic: होली है भई होली  (Read 67 times)

Offline Sajan Murarka

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होली है भई होली
« on: April 05, 2015, 02:56:18 PM »
मस्ती की बांहों में
उमंग-तरंग की
अठखेली
रंगीले सपने की
होली आई रे होली
झलकें एकांत में
चुहलबाज़ी
पकड़ बांहें
जोराजोरी
करे हमजोली
भीतर-बाहर
इन्द्रधनुषी सा
रंगीन सपना
करे ठिठोली
होली आई रे होली
खिलते कमल सा
हर्षित मन
गुलाबी नयन
चन्दन सी सुगंध
महकाये यौवन
सहज समर्पण
लज्जाये, इठलाये
मोल बड़ाये
उड़ उड़ जैसे
जाये तितली
होली आई रे होली
काले बादल संग
लुका छिपी जैसे
चांदनी रात में
चाँद वैसे
दिखकर छिपे
सहज प्रतीत पाये
धरती नहाई
मस्ती छाई
रंगों की रोशनाई
कपोल पर अरुणाई
गुलाबी गालों पर
प्रीत मुस्कुराई
होली आई रे आई
गौरी बाहुबन्धो में
राधा कृष्ण की
मिलनाई
वृन्दावन
रस शृंगार में
डुब गया
टुट गई सब
मर्यादाओं की बोली
होली है भई होली

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .