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Author Topic: Shero-Shayari-217  (Read 114 times)

Offline Sajan Murarka

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Shero-Shayari-217
« on: April 05, 2015, 05:09:52 PM »
झूठा भ्रम है कि प्रभु को पाने के लिये सत्संग जरूरी है
जो सर्वव्यापी हैं उन्हें पाने के लिये किसी क्या जरूरत है

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .