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Author Topic: वास्तविकता  (Read 94 times)

Offline Sajan Murarka

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वास्तविकता
« on: April 05, 2015, 03:01:07 PM »
मेरे छोटे भाई की पत्नी के अकाल मृत्यु के पश्चात् एक ऐसी वास्तविकता जिस का नहीं कोई उत्तर :------

किसी के चले जाने पर
जिन्दगी रूकती नहीं मगर
पकड़ लेती अपनी रफ्तार
सिर्फ कुछ विशेष लम्हों पर
याद आते वह बिखर बिखर
बहुत परेशान हूं चेहरा देखकर
उन दो छोटे बच्चों की नज़र
खोज रही आस्था का मंज़र
अपना हक जमाने का अधिकार
बिन कारण रूठना और तकरार
कोई नहीं मनाने आये इस बार
गुमसुम,एकाएक हो गये होशियार
पिता को समझा रहे नादान अश्रुधार
खुद रो रो कर चुप हो रहा यह संसार
छोटी बड़ी बातों पर मां को रहे पुकार
फिर सचाई को मानकर निश्चुपता धार
ताक रहे मां की तस्वीर अन्दर हाहाकार
विक्षिप्त सी स्थिति, मां छोड़ गई मझधार
आगे की राह अति कठिन और क्षुरधार
मां तेरे बिन इन का कोन करेगा बेड़ापार
शायद यह भी जी लेगें जैसे जीते लाचार
इन की मासूमियत पर ग्रहण लगा लगातार
बहुत है अभिमान ओर क्रोध दयालु प्रभु पर
यह कैसा कठोर निर्णय दिया अन्याय कर
जाने वाले की मजबूरी थी तेरा आदेश मानकर
बच्चों का बचपन साथ मरा अकारण, है ईश्वर
अब अपने जख्म से अन्दर तड़पेगें जीवन भर
जब कभी कोई आघात,जरूरत या स्नेह की दरकार
निश्छल,अकपट,सरल,सहज, ममता और प्यार
मां तेरे बिना कोन संवारेगा इन मासूमों का परिवार

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .