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Author Topic: शृंगार के कथित चरण  (Read 96 times)

Offline Sajan Murarka

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शृंगार के कथित चरण
« on: April 05, 2015, 02:40:52 PM »
लाज के तोड़ अवगुंठन
मिलन के एकांत क्षण
हर स्पर्श पर सिहरन
हिल्लोरित करती छुअन
आतुर हृदय की धड़कन
थिरके सांसों में समर्पण
शर्माकर झुकते नयन
अंगार सा दहके तन
सुखद सा अधीरपन
मर्यादा तोड़ता मिलन
अपरिमित जब समर्पण
अपार सुख पाये तन मन
एकाकार होते वह क्षण
शृंगार के कथित है चरण

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .