!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: मिलन  (Read 235 times)

Offline Sajan Murarka

  • Hero Member
  • *****
  • Topic Author
  • Posts: 1834
  • Karma: +1/-1
  • Gender: Male
    • my  blog
मिलन
« on: April 05, 2015, 05:15:40 PM »
खोज रहा मिलन यह देह गंध
जैसे महक रहा चंदन
या फूलों का उपवन
या शृंगार में कस्तूरी मन
फूलों से सजकर आई
जैसे की चमेली की डालियाँ
या उड़ती बलखाती तितलियाँ
या नभ में चमकती बिजलियाँ
मेरे आंगन चांदनी छाई
जैसे आलोकित हो रही निशा
या बिन पीये छाया कोई नशा
या रंग बिरंगे फूलों का गुलदस्ता
है मिलन की आतुराई
जैसे आकाश में लहराती पतंग
या तट तोड़ती जलधारा की उमंग
या उफनती लहरों की तरंग
शीतल चांदनी मन्द मन्द मुस्कुराई
जैसे घर के आगे तुलसी हर्षाई
या भीगे आंचल में लज्जा छिपाई
ओठ में गुलाबी लाली लज्जाई
और आँखें पलाशी हो आई
जैसे काजल की कोठरी में नयन
या कोयल कंठ में हल्की सी गुंजन
या छेड़ कर रागिनी सी बजे कंगन
लौटा बसंत लेकर पुरवाई
जैसे छंद लिखे सुन्दर गीतों में
या उड़ रही है गंध पवन में
या किया सिंगार आज फूलों में
पैजनिया गुनगुनाते तुम आई
जैसे अभी भोर की लाली छाई
या चम्पा-चमेली की खुशबू आई
या सांसों की धड़कन में शहनाई
अंग अंग में बेचैन आतुराई
जैसे पुष्पित पंखुरियां ओस धुली
या चाँद-चांदनी की आंख मिचौली
या चौकड़ियाँ भरे हिरनी मतवाली
खोज रहा मिलन यह देह गंध

सजन
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .