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Author Topic: ग़र्दिश-ए-दुनिया  (Read 847 times)

Offline kazimjarwali

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ग़र्दिश-ए-दुनिया
« on: November 03, 2011, 07:00:39 PM »
मुफलिसी मे भी यहाँ खुद को संभाले रखना,
जेब खाली हो मगर हाथो को डाले रखना  ।

रोज़ ये खाल हथेली से उतर जाती है,
इतना आसान नहीं मुह मे निवाले रखना ।

गाँव पूछेगा के तुम शहर से किया लाये हो,
मेरे माबूद सलामत मेरे छाले रखना ।

ज़िन्दगी तूने अजब काम लिया है मुझ्से,
ज़र्द पत्तो को हवाओ मे संभाले रखना ।

जब भी सच बात ज़बां पर कभी लाना ”काज़िम”
ज़ेहन मे अपने किताबो के हवाले रखना ।।    --”काज़िम” जरवली

« Last Edit: November 03, 2011, 07:04:19 PM by kazimjarwali »
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Offline Sajan Murarka

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Re: ग़र्दिश-ए-दुनिया
« Reply #1 on: October 02, 2012, 01:40:49 AM »
जब भी सच बात ज़बां पर  ”काज़िम”कभी लाना
ज़ेहन मे अपने किताबो के माबूद सलामत रखना ।।   
ग़र्दिश-ए-दुनिया मे आसान नहीं ज़िन्दगी को बयां करना
तूने अजब काम किया, मेरा सलाम काबुल करना ||
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .