!!

Welcome to Kavya Kosh

This is a retired Kavyakosh forum used as an archive. To access new Kavyakosh.Click here

Author Topic: सराब-ऐ-हयात  (Read 764 times)

Offline kazimjarwali

  • Newbie
  • *
  • Topic Author
  • Posts: 44
  • Karma: +0/-0
  • Gender: Male
    • Kazim Jarwali
सराब-ऐ-हयात
« on: November 09, 2011, 12:06:21 AM »

सराबो से नवाज़ा जा रहा हूँ,
आमीर-ए-दश्त बनता जा रहा हूँ ।

मैं खुशबु हु यह दुनिया जानती है,
मगर फिर भी छुपाया जा रहा हुं ।

ज़माना मुझ्को सम्झे या न सम्झे,
मै एक दिन हूँ, जो गुज़रा जा रहा हूँ ।

मेरे बाहर फ़सीले आहनी है,
मगर अन्दर से टुटा जा रहा हूँ ।

मेरे दरिया, हमेशा याद रखना,
तेरे साहिल से पियासा जा रहा हूँ ।

तुम अब थकती हुई नज़रे झुका लो,
बुलंदी से मै उतरा जा रहा हूँ ।।   --”काज़िम” जरवली
Kazim Jarwali Foundation

Offline Sajan Murarka

  • Hero Member
  • *****
  • Posts: 1834
  • Karma: +1/-1
  • Gender: Male
    • my  blog
Re: सराब-ऐ-हयात
« Reply #1 on: October 02, 2012, 04:48:18 PM »
आप खुशबु हैं यह दुनिया जानती है,
बुलंदी से फैलिये -”काज़िम”, आप का नजारा हैं।। 
में , मेरी तन्हाई, कुछ बीते लम्हे , कागज के कुछ टुकड़े को समेटे दो पंक्तिया . .