About Ajay Agyat

Engineer by profession... poet by heart. Residing at faridabad.

मेरी खातिर बंदगी है शायरी

मेरी खातिर बंदगी है शायरी रब से सीधा जोड़ती है शायरी रू ब रू सच से मुझे करवाती है मिथ पुराने तोड़ती है शायरी जोश भर देती है मेरे खून में रुख हवा का मोड़ती है शाइरी फ़र्ज़ से हो जाता हूँ जब भी विमुख आत्मा झिंझोड़ती है शाइरी ज्ञान की ज्योति जगाती है प्रखर रौशनी भी बांटती है शाइरी

हाथों में कुल्हाड़ी को देखा तो बहुत रोया

हाथों में कुल्हाड़ी को देखा तो बहुत रोया हाथों में कुल्हाड़ी को देखा तो बहुत रोया इक पेड़ जो घबरा कर रोया तो बहुत रोया जब पेड़ नहीं होंगे तो नीड कहाँ होंगे इक डाल के पंछी ने सोचा तो बहुत रोया दम घुट ता है सांसों का जीयें तो जियें कैसे इंसान ने सेहत को खोया तो बहुत रोया जाने क्या मिलाते हैं ये ज़हर सा मिट्टी में इक खिलता बगीचा जब उजड़ा तो बहुत रोया हँसता हुआ आया था जो दर्या पहाड़ों से अज्ञात वो नगरों से गुजरा तो बहुत रोया