About Basudeo Agarwal

परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

वर्ण पिरामिड

वर्ण पिरामिड रे चन्दा निर्मोही, करता क्यों आंख मिचौली। छिप जा अब तो, किन्ही खूब ठिठौली।।1।। जो बात कह न सकते हैं, हम तुमसे। सोच उसे फिर ये नैना क्यों बरसे।।2।। गा मन मल्हार, मिलन की रुत है आई। मोहे ऋतुराज, मन्द है पुरवाई।।3।। रो मत नादान, छोड़ दे तू सारा अज्ञान। जगत का रहे, धरा यहीं सामान।।4।। तू कर स्वीकार, उसे जो है जग-आधार। व्यर्थ और सारे, तत्व एक वो सार।।5।।

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर, सजा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर। वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना, वफ़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर। नशा ये देश-भक्ति का, रखे चौड़ी सदा छाती, अना मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर। रहे चोटी खुली मेरी, वतन में भूख है जब तक, शिखा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर। गरीबों के सदा हक़ में, उठा आवाज़ जीता हूँ, सदा मेरी अगर जो हो, तो Continue reading लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल

कृष्णावतार

कृष्णावतार (रास छंद। 8,8,6 मात्रा पर यति। अंत 112 से आवश्यक और 2-2 पंक्ति तुकांत आवश्यक।) हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ। घोर घटा में, कड़क रही थी, बीजलियाँ हाथ हाथ को, भी ना सूझे, तम गहरा। दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।। यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी। विपदाओं की, एक साथ में, घोर घड़ी। मास भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की, तिथि अठिया। कारा-गृह में, जन्म लिया था, मझ रतिया।। घोर परीक्षा, पहले लेते, साँवरिया। जग को करते, एक बार तो, बावरिया। सन्देश छिपा, हर विपदा में, धीर रहो। दर्शन चाहो, प्रभु के तो हँस, कष्ट सहो।। अर्जुन Continue reading कृष्णावतार

26 जनवरी

ग़ज़ल (जनवरी के मास की) 2122 2122 2122 212 जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है, आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है। ईशवीं उन्नीस सौ पंचास की थी शुभ घड़ी, तब से गूँजी देश में गणतन्त्र की आवाज़ है। आज के दिन देश का लागू हुआ था संविधान, है टिका जनतन्त्र इस पे ये हमारी लाज है। हक़ सभी को प्राप्त हैं संपत्ति रखने के यहाँ, सब रहें आज़ाद हो ये एकता का राज़ है। राजपथ पर आज के दिन फ़ौज़ की छोटी झलक, दुश्मनों की छातियाँ दहलाए ऐसी गाज़ है। संविधान_इस देश की अस्मत, सुरक्षा का Continue reading 26 जनवरी

भारत यश गाथा

“भारत यश गाथा” ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार । रूप रहा इसका अति सुंदर, है वैभव इसका जैसा पुरंदर, स्थिति भी ना कम विस्मयकर, है विधि का ये पावन पुरस्कार ।।1।। प्रकाशमान किया विश्वाम्बर, अनेकाब्दियों तक आकर, इसका सभ्य रूप दिवाकर, छाई इसकी पूरे भूमण्डल में छवि । इसका इतिहास अमर है, इसका अति तेज प्रखर है, इसकी प्रगति एक लहर है, ज्ञान काव्य का है प्रकांड कवि ।।2।। रहस्यों से है ना वंचित, कथाओं से भी ना वंचित, अद्भुत है न अति किंचित्, Continue reading भारत यश गाथा

वंदना

“वन्दना” इतनी ईश दया दिखला, जीवन का कर दो सुप्रभात। दूर गगन में भटका दो, अंधकारमय जीवन रात।।1।। मेरे कष्टों के पथ अनेक, भटका रहता जिनमें यह मन। ज्ञान ज्योति दर्शाओ प्रभो, सफल बने मेरा यह जीवन।।2।। मेरी बुद्धि की राहों में, ये दुर्बुद्धि रूप पाषाण पड़े। विकशित ज्ञान की सरिता में, ये अचल खड़े भूधर अड़े।।3।। मेरे जीवन की सुख निंद्रा, मोह निंद्रा में बदल गई। जीवन की वे सुखकर रातें, है घन अंधकार से सन गई।।4।। मेरी वाणी वीणा का, है बिखर गया हर तार तार। वीणा रहित गुंजित मन का, कैसे प्रगटे वह भाव सार।।5।। स्वच्छ हृदय Continue reading वंदना