🎭क्या चर्चा करूँ प्रेमी तुमसे🎭

क्या चर्चा करूँ प्रेमी तुमसे पता नहीं वाग्जाल आ-आकर रुक जाते क्यों लबों पर मेरे क्या चर्चा करूँ प्रेमी तुमसे तुम हो भरम के बाड़े। इस गुफ़्तगू की निशा में जाने क्यों गुमसुम रहा हूँ ? इस दरमियान में कितना क़हर भरा दरवेश रहा हूँ ऊँघते नैनों में कबतक विकल हुए कल्प धनेरे क्या चर्चा करूँ प्रेमी तुमसे तुम हो भरम के बाड़े। मिले तार ह्रदय- बीन के तो सुर संसार में द्यतिमय हो जाँय हर्ष- विषाद का मानस लिखकर उसमें हम लीन हो जाँय सुरभित हों जीवन तुम्हारे, पराये बनें संगी तेरे। क्या चर्चा करूँ प्रेमी तुमसे तुम हो Continue reading 🎭क्या चर्चा करूँ प्रेमी तुमसे🎭