रिश्तों के मायने

रिश्तों के मायने यही है आज के बदलते युग और स्मार्ट फ़ोन की सच्चाई जिंदगी बदल सी गयी है आज, रिश्तों के मायने भी बदल रहे हैं, उँगलियों पर रिश्ते यहाँ कुछ इस तरह से निभाए जा रहे हैं, अपनों से दूर परायों को अपना बनाते जा रहे हैं, कुछ छिपा कर तो कुछ रिश्ते खुले आम निभाए जा रहे हैं, कोई दगा अपनों को दे रहा परदे में रह कर, बेपर्दगी की इन्तहां कुछ इस कदर बढ़ रही है, छिपाना था जिससे उससे ही बेपर्दा हुए जा रहे हैं, संग दिल अज़ीज़ के बैठ परायों की बातों पे मुस्कुरा Continue reading रिश्तों के मायने

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साल नया

साल नया अतीत भया जो बीत गया, कल पुराना था साल, आज नया, किसी को दर्द बेपनाह, ख़ुशी को असीम दे गया, अपनों से जुदा कोई तो किसी को साथ मिला नया, खट्टी और मीठी यादों का फिर एक गुजर दूर गया, फिर सुबह सूरज एक किरण नयी संग, जग गया, भोर नयी थी रात ढले, फिर भी पुराना है सब यहाँ, एक दिन के अंतराल पर कहते हैं क्यों फिर, हो सबको मुबारक ये साल नया॥

दर्द

बात ऐसी कह गए सोचा भी न कि हम पर गुजरेगी क्या , दर्द दिल में हुआ बिना आवाज था उनको पता क्या , सहें भी कितना हम ये उनसे पूछना तो चाहते है भला, सुनने वाला न कोई यहाँ हाले दिल करें जो बयां ॥ उनकी बातों ने आज दिल के टुकड़े कर दिए  हैं हजार, ढूंढेंगे भी तो भी न मिलेगा एक यहाँ और एक वहाँ क्या , चुभन को महसूस कर लिया कह न सकेंगे किसीसे , ऐसा तनहा उनकी बातों ने आज  हमको कर दिया ॥ नासूर सा दर्द दिल को दे दिया सोच भी नहीं ,       Continue reading दर्द

शून्य सा अस्तित्व

शून्य सा अस्तित्व हाँ माना शून्य की खोज आर्यभट्ट ने की थी, पर शून्य के बिना धरा पर क्या किसी का है अस्तित्व यहाँ, धरती भी तो एक शून्य के आकार की तरह ही है गोल, ज़ीरो की कहानी कुछ इस तरह लिखती हूँ मैं अपनी जुबानी, नज़रों में था नगण्य (शून्य) सा अस्तित्व  मेरा, बस सबकी खातिर जिंदगी जिए जा रही थी एक शून्य  की तरह, सबकी नज़रों में थी खटकती सी मैं, फिर भी खुद की आँखों से न टपकने दिया एक मोती मैंने, मोती भी तो आकार में होता है एक शून्य की तरह, अचानक एक रोज़ एक हवा Continue reading शून्य सा अस्तित्व

दास्ताँ

दास्ताँ कुछ थे सहमे से, कुछ था सहमे से हमारे कदम, रखा था जिस रोज हमने आपके आँगन में अपने कदम । कांपता सा बदन, डरा हुआ सा था दिल हमारा , रखा था जिस रोज हमने आपके आँगन में अपने कदम । अनजान थे वो रास्ते,अनजान सभी थे रिश्ते, रखा था जिस रोज हमने आपके आँगन में अपने कदम । हाथ थाम आपका चल पड़े आपके साथ विश्वास दिल में था भरा, अर्पण किया जिन्हें सब वो सम्हालेंगे मेरे कदम मुश्किलों भरे इस सफर में,अनजान डर दिल में लिए पर विश्वास आप पर कर, रखा आपके आँगन में कदम Continue reading दास्ताँ

दीप जलाऊँ तेरे संग

दीप जलाऊँ तेरे संग खुशियों और उमंग से भरा दीप लड़ियों का दीपावली है त्यौहार , मन हो रहा है उदास उन मासूमों की खतिर , नहीं है पास जिनके कोई साधन जो मनाएं वो भी एक बार ख़ुशी से त्यौहार , क्या लाऊँ ,क्या बनाऊँ सूची बनाने  को मन फिर भी है बेक़रार , मिटटी के दिए अपने द्वार जलाने को लायी हूँ मैं इस बार , मन में थे यह विचार हो जायेंगे रोशन शायद उनके भी  आँगन और द्वार , जिनके मिटटी से सने हाथों ने दिया इन दीयों को रूप और आकार , चमकती ,सजी दुकानों Continue reading दीप जलाऊँ तेरे संग

वक़्त हुआ है अब कुछ कर गुजरने को

वक़्त हुआ है अब कुछ कर गुजरने को बंद दरवाजों से आज फिर सिसकियाँ सुनाई पड़ रही  हैं, फिर एक बार आतंक के शोर में चूड़ियों की खनक खो गयी है, किसी के सर से फिर एक बार पिता का साया उठ गया है, किसी पिता के काँधे पर फिर एक बेटे का शव जा रहा है, आज फिर कुछ दरवाजों पर सन्नाटा बिखर गया है, कब तक यूँ सड़कों पर शोर- शराबा मचता रहेगा, क्या किसी को उनका दर्द भी नज़र आएगा, जिसने न केवल खोया है लाल अपना, पेट भरने का सहारा भी जिसका अब चला गया है, अब Continue reading वक़्त हुआ है अब कुछ कर गुजरने को

सबसे जुदा मैं हूँ

सबसे जुदा मैं हूँ जैसी भी हूँ, सबसे जुदा मैं हूँ, अलग दुनिया में लिखती अपनी दास्तान हूँ, खुद के बनाये पन्नों में बिखराती अपनी दुनिया में मशगूल मैं हूँ, न कोई मुझसे ऊपर, न कोई मुझसे अच्छा, करती हूँ नाज़ खुद पर हूँ, अपने मन में,  अपनी ख़ुशी में झूमती नाचती मैं हूँ, शिकवा करने वालों से दूर रह कर खुशबू खुद की फैलाती मैं हूँ, बंद दरवाजों से छनती धूप सी मैं हूँ, ऊषा की किरणों से रक्तिमा फैलाती ख़ुशी की किरण हूँ, जो दिल कहे मानती मैं हूँ, जो दिमाग कहे करती मैं हूँ,  न डरना चाहती Continue reading सबसे जुदा मैं हूँ

अहसास

अहसास सुना  हर किसी से था माँ का प्यार अनमोल है होता , सुना हर किसी से था माँ का अहसास बड़ा कोमल है होता, सुना हर किसी से था उसका दामन बड़ा खुशनुमा है होता, सुना हर किसी से था माँ के प्यार में बड़ा ही बल है होता , सुना हर किसी से था माँ का आँचल बड़ा सुरक्षित होता, काश एक पल के वास्ते ही मुझे वो प्यार मिला होता , काश एक घडी के वास्ते ही मुझे वो अहसास हुआ होता , काश एक रोज के वास्ते ही मैंने वो दामन भिगोया होता, काश कभी मुझे Continue reading अहसास

आजादी के मायने

आजादी के मायने हर शख्स कहता है इस जहाँ से जाने वाले चमकते हैं, उस जहाँ में सितारे बनकर , जो शहीद हुए हैं हिन्दोस्तान के वास्ते ,   क्या वो भी चमकते होंगे  तारे बनकर , गर ऐसा है तो उनकी आँखों से बरसते होंगे , आसूं इस धरा पर शबनम की बूँद बनकर , देख कर दुर्दसा इस आजाद देश की मुश्किलों का सामना कर के दिलवा गए जो आज़ादी , गुमनामियों में खो कर नाम हमको दिखा गए हसीं सपने , है कोई आज ऐसा जो बन सके सुभाष चन्द्र , है किसी में दम इतना जो बन Continue reading आजादी के मायने

नयी पहचान

नयी पहचान अवसाद से घिरी जिंदगी बेवजह जिए यूँ ही जा रही थी मै, बंद जुबान से हांथों को बस हिलाते हुए दिन बिताती जा रही थी मै, अपनों के बीच खड़े रहने की न थी ताकत हममें , हर रोज एक नयी उलझनों में उलझी थी जिंदगी , कोई अपनी नयी पहचान बनाने को बेताब थी मैं, एक रोज किसी अपने ही अज़ीज़ ने  रौशनी की किरण दिखा कर, जिंदगी रोशन इस तरह से कि बस क्या कहें , माना बहुत छोटा था वो अज़ीज़ मेरा पर जो, थमा  गया हांथो में में मेरे वो किसी कोहनूर से कम  न था। वक़्त Continue reading नयी पहचान

बेटी की विदा

बेटी की विदा आज विदा हो रही है फिर किसी माँ की प्यारी बेटी, आँचल में मुंह छिपा रो रही बेटी । आंसुओं संग थपथपा कर सीख दे रही माँ , ये घर बेगाना  हुआ तेरे लिए आज से मेरी बेटी । हुए हैं दो परिवार आज से एक मगर, नहीं हुए हैं दो घर अभी एक,ये जान लेना मेरी बेटी , दिलों के ग़मों को आंसूंओं में बहा देना , पर नहीं लाना दिल की उदासी चेहरे पर मेरी बेटी । बदल जायेगी  तेरे हर रिश्ते की तस्वीर , किसी की बहु  किसी की हुई आज से भाभी , हुए घर Continue reading बेटी की विदा

शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस जिन राहों पर भारी क़दमों से रखता है, हर बचपन अपने क़दमों को, एक हाथ जो सम्हाल कर, सही मार्ग दिखा कर चलाता है सबको , गलतियों पर डांट कर, अच्छाइयों पर ताली बजा प्रोत्साहित करता  है जो, माता – न पिता होता है, पर उनसे भी बढ़कर भलाई का मार्ग दिखाता है जो, ऊंचाइयों पर पंहुचा दें, एक ही मकसद होता करता है मार्ग दर्शन  जो , अध्यापक हर जीवन में हजरूरी, ये अब क्या समझना  हमको , एक ही  दिन उनके सम्मान का हो ऐसा तो जरूरी नहीं, हर बचपन को सीखना होगा सम्मान करना उनका, Continue reading शिक्षक दिवस

मेरा सच्चा प्यार

मेरा सच्चा प्यार हम तो बस हैं उस खुदा के मुरीद, जहाँ में जन्म लेने का मिला है जो अवसर हमको, उसकी बनायीं धरा खूबसूरत, घाटियां खूबसूरत, पहाड़ खूबसूरत, वादियां खूबसूरत, नदी की धारा मिले समंदर में वो नज़ारा खूबसूरत, न कोई बना सकता इससे खूबसूरत कोई मंज़र खूबसूरत, नज़र जाये जिस तरफ भी जिस शख्स पर वो हर शख्स खूबसूरत, उसकी पूजा से मिले जो शांति वो सुकून बहुत ही खूबसूरत, सोचते हैं सब मैं सबसे बड़ा, सबसे खूबसूरत मेरी नज़र में तो उसका नूर खूबसूरत, उसके नैनों में खुद को बसा लूँ, दिल में अपने उसकी तस्वीर बसा Continue reading मेरा सच्चा प्यार

वक्त

वक्त आसमान से उगलते सूरज की तपिश ने,                                             दरवाजों में बंद कर दिया है लोगों को । जाना  है जरूरी जिन्हें बाहर वो,                                             निकल जाते है दिन चढ़ने से पहले । गर्मियां तो तब भी आती थीं ,                                       Continue reading वक्त