उम्मीद की आभा लहराई…..

निशा उजाले में समाई भोर की पहली किरण आई किरण संग खुशहाली आई पंछियों ने अपने पर पसारे उम्मीद की आभा लहराई……… तूफाँ ने अपनी चादर समेटी समंदर में शांति पसराई नदियों ने अपनी शान पाई कोयल मधुर संगीत वो लाई उम्मीद की आभा लहराई…… तिनका-तिनका टोंट में लाई सुंदर नीड़ निर्माण कर पाई वीरान चमन को फिर बसाया पाखी में नई रवानी आई उम्मीद की आभा लहराई……..

मेरी प्यारी हिंदी

मेरी प्यारी हिंदी लिखने में हैं सबसे सरल दिखने में दुल्हन सी सुंदर माथे पर हैं प्यारी बिंदी सबकी सखी हैं मेरी हिंदी सबसे प्यारी मेरी हिंदी शब्दों में हैं मधु सी मिठास अलंकारों से रहती अलंकृत शृंगारों से रहती श्रृंगारित दुल्हन सी लगती मेरी हिंदी सबसे प्यारी मेरी हिंदी देवनागरी हैं इसकी लिपि संस्कृत हैं इसकी जननी साहित्य हैं इसका निराला कवियों की हैं जान हिंदी सबसे प्यारी मेरी हिंदी

ग़ज़ल- बयां करता हूँ

ग़ज़ल- बयां करता हूँ मैं मेरी ग़जल अपने सल्तनत के नाम बयां करता हूँ मैं इस चमन,देश से बेइंतिहा मोहब्बत करता हूँ मिला मुझको आंगन खुद को ख़ुशनसीब समझता हूं मेरा हर पल,हर कतरा इस देश के नाम बयां करता हूँ देखी नही मैने आजादी,खुदको मैने आजाद पाया गांधी,नेहरू,भगत,सुभाष, की भूमि को सलाम करता हूँ पूछते हैं मुझे मेरे यार कोनसा जहां है तेरे दिल में सीने को तान अपने नाम हिंदुस्तान बतलाता हूँ कभी न थामा इन हाथों ने कोई और पताका अरे हिंदुस्तान वासी हूं हर वक्त तिरंगा लहराता हूं टेके फिरंगियों ने घुटने इन पर्वत रूपी शीशो Continue reading ग़ज़ल- बयां करता हूँ

बूढ़ी माँ

बूढ़ी माँ वो आँखे किसी का दीदार करने के लिए तरस रही थी।उस बूढ़ी औरत के चेहरे पर बनी झुर्रियां इस बात का संकेत कर रही थी कि उस पर बुढ़ापा हावी होते जा रहा था।अचानक एक घंटी बजती हैं और वो इस बात का संकेत कर रही थी की किसीने दरवाजे पे बहुत दिनों बाद दस्तक दी थी ।वह बूढी औरत भगवान् का नाम स्मरण करते हुए’हाय राम’ कौन हैं?कहते हुए दरवाजे की तरफ अपने दबे पैरों से बढ़ती हैं और कोमल डाली जैसे हाथों से दरवाज़े की कुंठी खोलने का प्रयास करती हैं।जैसे ही वह दरवाजा खोलती हैं Continue reading बूढ़ी माँ

मेरा देश

मेरा देश लगता हैं मेरा देश अब शांत स्वर में बैठा हैं, कुछ न कर सकता मुहँ पर उंगली लगाये बैठा हैं, पिघल रहा हैं कश्मीर आज बारूदों के ताप से, फिर भी मेरा देश आज शीत माहौल चाहता हैं, जहाँ हर वक़्त रहती थी केशर की महक , वहाँ आज हर पल हैं बारूदों की महक, अब कश्मीर में जीना दुस्वार हो गया हैं, ये धड़कन हैं भारत की जिस पर दिल न्यौछावर हो गया हैं, जिनके ख़ातिर शहीद हुए इस देश के रक्षक, वे लोग ही बन बैठे हैं इस चमन के भक्षक, जिसका नहीं ये चमन वो Continue reading मेरा देश

अब तो तू आजा प्रिये

अब तो तू आजा प्रिये अब आया समझ में,मैं ना समझ नहीं प्यार हैं,चाहत हैं,उन्माद नहीं सूना-सूना सा जीवन है कुछ शोक नहीं,जीवन में तैर सिवा कोई और नहीं अब इस दिल को कोई स्वीकार नहीं दिल मेरा हर बार तड़पता, तुझे चाहता अब तो तू आजा प्रिये .. जिंदगी मुझसे रुठ चुकी तेरी चाहत बढ़ चुकी तेरे लिए भटका हर दर-दर मैं गलियां मेरे हाथों से टूट चुकी कोमल-कोमल कलियाँ खो बैठा अपनी नादानी से प्यार भरा अपार कोष प्रिये फिर कर लेने दो प्यार प्रिये .. तेरे बिन अब ये दिल ना जियें अब तो तू आजा प्रिये…

मैं अकेला

मैं अकेला आया हूँ मैंअकेला,रहना अकेला चाहता हूँ इस दुनियादारी के झमेले में नहीं उलझना चाहता हूँ अपने दिल का गुणगान औरों से नहीं चाहता हूँ इसलिए शायद खुदको मैं अकेला ही पाता हूँ चाहता हूँ अकेला रहकर कुछ लिखा करूँ अपने मन की व्यथा का मैं खुद ही गुणगान करूँ देख कर प्रकृति की सुंदरता मैं खामोश रहता हूँ इसका मधु अपार, शायद इसको ही पिया करूँ आते हैं जीवन में सुख और दुःख अपार मैं उस अड़िग, कठोर, पेड़ की तरह खड़ा रहूं ना सुख मुझे बहलाएगा,ना दुःख मुझे सतायेगा युवा हूँ,पलट कर वायु मैं बन जाऊँगा जानता Continue reading मैं अकेला

तेरी याद

तेरी याद जब याद आएगी तेरी शाम ढ़लते-ढ़लते, एक बार फिर शाम-ए-गज़ल बन जाएंगी, जब तेरे-मेरे मिलन की याद हमें आयेगी, छलक उठेगा हर एक जाम महखाने में, जब तेरी याद हमे ख़लिश सी सताएंगी, ना रुकेंगी कलम आज गज़ल लिखते-लिखते, जब तक दर्द बयां ना हो जाता कोरे कागजों पर, उभर कर आएंगे लफ़्ज इन बेगुनाह पन्नों पर, जब इन आँखों से नीर की धार बहेंगी, पलट जायेगा हवा का रुख़, थम जायेगी लहरें, जब दीदार होगा तेरा तो खिल जाएंगे दो चेहरे, जब आएगी याद तेरी शाम ढ़लते-ढ़लते।