About JYOTI KAMRA

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मै प्रकृति होना चाहती हु

मै प्रकृति होना चाहती हु नीले आसमान तले ढ़ेर सारी बदलियों के धुंधलके मे छिपी हुई पहाड़ियों को दूर तलक देखना चाह्ती हुं पर्वत की चोटी से घाटी की तली तक श्वेत भुरभुरी बर्फ को पिघलते बूंद-२ बहते देखना चाहती हुं पर्वत के शिखर पर गिरती सुनहली किरण को अपनी आंखो की चमक मे बदलते देखना चाहती हुं जहां तक नजर जाये उस हर एक ऊंचाई को अपने कदमो तले झुका कर फतेह पाना चाहती हुं पहाड़ के उदार सीने मे छिप कर, उसके आलिंगन मे उसकी विशालता को महसूस करना चाहती हु पवन की पुछल्ली बन ,दूर-2 तक अपने Continue reading मै प्रकृति होना चाहती हु