एक बेनाम रिश्ता

एक बेनाम रिश्ता : हमारी लाइफ में कुछ ऐसी stories होती है, जिसे हम किसी से कह नहीं पाते, लेकिन उनका हमारी लाइफ में एक impact होता है.. कुछ ऐसे गुमनाम से रिश्ते जिसे हम छोड़ना नहीं चाहते और ना उनके साथ आगे बड़ सकते है, वही सब कुछ बयां करती कुछ पंक्तिया : ” एक बेनाम रिश्ता “ एक अजनबी अनजाना सा रिश्ता होता है, जिसे हम हर किसी को चंद शब्दों में बता नहीं सकते, हम तो समझते है पर किसी को समझा नहीं सकते, लगता है कौन समझेगा हमारी इन बातो को, रात के अँधेरे में सबसे Continue reading एक बेनाम रिश्ता

मेने वक़्त बदलते देखा है !!

मेने वक़्त बदलते देखा है ! मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है.. मेने दिन के उजालो को, रात के अँधेरे में बदलते देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है.. मेने हर दिल अजीज़ लोगो को भी, एक पलभर में बिछड़ते हुए देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है.. चंद रुपयों के लालच में, अपनों को अपनों से झगड़ते हुए देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखे है.. एक सत्ता की कुर्सी के आगे, अच्छे अच्छों का ईमान सड़क पर बिकते हुए देखा Continue reading मेने वक़्त बदलते देखा है !!

हम कहा जा रहे है

हम कहा जा रहे है 364 दिन महिलाओं पर ज़ुल्म करने वाले लोग आज 1 दिन फेसबुक व्हाट्सएप्प पर चिल्ला चिल्ला कर  महिला दिवस मना रहे है, ना जाने हम क़हा जा रहे है, बेटियो को मार रहे कोख में और बेटो के पैदा होने पर जश्न मना रहे है, ना जाने हम कहा जा रहे है, जहा एक तरफ साक्षी, सिंधु, साइना, सानिया की जीत का जश्न मना रहे है, पर अपनी बहू – बेटी के घर से बाहर निकलने में भी ऐतराज़ जता रहे है, ना जाने हम कहा जा रहे है, अपनी बहन को कोई आँख उठा Continue reading हम कहा जा रहे है

प्यार क्या है?

” प्यार क्या है..?  “ प्यार तपस्या और साधना की अनुभूति है, प्यार समंदर से मिलने वाला मोती है, प्यार राधा है, रुकमणी है, शेषनाग है, प्यार गोकुल की गलियों में कान्हा का रास है, प्यार शबरी के बैर और मीरा का विश्वास है, प्यार केकई के कह देने पर राम का वनवास है, प्यार  माँ का बेटे से दुलार है, प्यार पिता का दिया अतुलित संसार है, प्यार भाई की कलाई पर बहिन की राखी है, प्यार गलती न होने पर भी मांगी गई माफ़ी है, प्यार दादी का बनाया मक्के की रोटी, सरसों का साग है, प्यार बड़े Continue reading प्यार क्या है?

मेरा देश फिर भी चल रहा है

स्वतंत्रता दिवस  अपनी ही लगायी चिंगारियों में  यह जल रहा है, 1947 में आजाद हुआ यह देश 70 साल में ही फिर से गुलामी की ओर चल रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पब्लिसिटी  की आड़ में असहनशीलता का ढिंढोरा पिट रहा है, वीवीआईपी  सुरक्षा वाला आदमी इस देश में रहने से डर रहा है, फुटपाथ पर सोता हुआ इंसान भी बड़ी बड़ी गाडियो तले कुचल रहा है, तो कही गोमाँस खाना लोगो को लीगल  लग रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पैसों के लिए जहा देशप्रेम Continue reading मेरा देश फिर भी चल रहा है