ओ मेरे पुज्य पिताजी

ओ मेरे पुज्य पिताजी [दिनांक 30 अप्रैल 2017 को मेरे पूजनीय पिता जी श्री ठाकुर ईश्वर सिंह इस भू लोक को त्याग कर चले गये… जीवन में उनकी कठिन तपस्या से ही आज हम सुखद जीवन जी पा रहे हैं….] “हे ईश्वर मेरे पूजनीय पिता जी को….अपने पावन चरणों में स्थान देना….” ओ मेरे पूज्य पिता जी, कल तक मैं खुद को दुनिया का सब से बड़ा आदमी समझता था क्यों कि मेरे सिर पर तुम्हारा हाथ था…. हम नहीं जानते हम कौन हैं, पर तुम भिष्म थे, जिन्होंने हमारे घर रूपी हस्तिनापुर को चारों ओर से सुर्क्षित कर के Continue reading ओ मेरे पुज्य पिताजी

चेतावनी

चेतावनी अमन चहाता  है भारत, नहीं चहाता  है  लड़ाई, प्रगति करो, जंग नहीं, जंग से होती है तबाही, देख लिया  कयी बार लड़कर, क्या मिला हार कर, देख ली होगी भारत की शक्ति, मंथन और विचार कर। संबल जा अभी भी पाकिस्तान वरना फिर पछतायेगा, शंकर खोलेगा तीसरा नेत्र, फिर प्रलय मचायेगा। भाड़े के सैनिक लेकर, युद्ध नहीं किये जाते, शस्त्रों की फीख माँगकर, रण नहीं है जीते जाते। क्या सोजते हो हम डर जाएंगे, तुम्हारे परमाणु हथियारों से, काशमीर नहीं मिलेगा तुम्हे, धर्म जेहाद के नारों से। देखा अगर तिरंगे की ओर, नाम तक मिट जायेगा, शंकर खोलेगा तीसरा Continue reading चेतावनी

अब क्या करें….

क्या करें शौक आदत बन गयी अब क्या करें? नशा है जहर अब क्या करें? आशाएं मां-बाप की दर दर भटक रही, उनके बिखरे  अर्मानों का, अब क्या करें? समझाया था बहुत न सुनी तब  किसी की, ओ समझाने वालों बताओ, अब क्या करें? न होष है खुद की न पास है कोई हितेशी, जीवन है अनुमोल, अब क्या करें? वो दोस्त  भी तबाह है जिसके साथ धुआं उड़ाया, जेब भी है  खाली, अब क्या करें? ऐ दोस्त तुने मुझे, नशे की जगह जहर दिया  होता, न जीना पड़ता इस हाल में, अब क्या करें?

हम बंद कमरों में बैठे हैं

हम बंद कमरों में बैठे हैं… हम बंद कमरों में बैठे हैं, पंछी तो गीत गाते हैं, मां के पास वक्त नहीं है, बच्चे लोरी सुनना चाहते हैं। न कल कल झरनों नदियों की, न किलकारियां मासूम बच्चों की, संगीत नहीं है जीवन में, निरसता में पल बिताते हैं। वर्षों बाद गया चमन में, लगा जैसे स्वर्ग यहीं है, क्रितरिम हवा पानी से, हम अपनी उमर घटाते हैं। होता है जब घरों में बंटवारा, सूई तक भी बांटी जाती है, मां-बाप नहीं बंटते, न कोई उनको पाना चाहते हैं। पैसा है उपयोग के लिये, हम उपयोग मानव का करते हैं, Continue reading हम बंद कमरों में बैठे हैं