About Manisha joban Desai

born -3-11-1961 female architect-interior designer surat -gujarat- india

कटते जंगल – उजडते वन

कटते वन ….उजड़ते जंगल हो रहा, कुदरत संग खिलवाड़ ! माँ धरती की छाती पर होते वार !….. देते छाया और श्र्वास सभी को ये वृक्ष तो फिर भी सहेते वार ……. मीट्टी बन जायेगी रण समान , होंगे वन प्राणी सब बेहाल …… सृष्टि पुकारे होकर त्राहिमाम, ये कोन्क्रिट के जंगलों से हो रहा.. मनुष्य जीवन बेजार ….. लायेंगे कहाँ से जडीबूटीयां जीने की, कुठाराघात है ये तो, मूल-जीवन पर ही अपार….. विशाल धरा ये नहीं सिफँ मनुष्यो की , पेड-पौधे- जीव -जंतु प्राणी का भी अधिकार….. समा रख्खा है वृक्षो ने दिल में ओकसीजन, प्यार से ये सींचते Continue reading कटते जंगल – उजडते वन

काफी नहीं ?

काफी नहीं ? बैठे रहते है जब हम खोये हूँए सपनो की खोज में , आसमान से टपकते पानी से संवेदना हथेली पर शायद फिर से संजोले ! पर .. ये जो समय है, वो दूर से चमककर टूटते हुए तारे की तरहा बिखर बिखर जाता है, और ..आंसुओ की सतह पर सदीओ तक चमकता रहता है, फिर भी ज़िंदा हूँ काफी नहीं ? –मनीषा ‘जोबन ‘

माँ

माँ माँ शब्द है जिन दिलो में यहाँ, पार हूॅआ है जग जूलो में यहाँ। दुःख की परछाईयों में जो घिरा , छलकते थे दर्द आंखो में वहाँ। माफ़ किया है उसी माँ ने सदा , हम सभी गुनाहगारो है यहाँ। बरसती उस ह्रदय से दुआ सभी , कामयाबी आज ढेरो है यहाँ। नींद लेते सुख सपने देखते, जागती वो रात हजारो है यहाँ। साथ में वो रोई थी हमारे कभी , राह में खाई ठोकरों में यहाँ। बात से उनकी कहानी निकले, फिरते थे फूल तारों में यहाँ। देखती थी मूरते मंदिर में , फिरभी माँ को हूँ प्यारो Continue reading माँ

जिंदगी तो है

जिंदगी तो है ज़िंदगी तो है पर यहाँ साथ में ही ये गम क्यो है , हरपल यहाँ खुश,तो आँख उसकी नम क्यों है। हार जाता है अक्सर यहाँ सच रहेके तन्हा यूँ, जूठ के ही पाँव में इस तरहा संग दम क्यों है। जिसने भी यूँ कभी जो है निभाई ता-उम्र वफ़ा, और उससे ही रहेता दूर उसका सनम क्यों है। भूल जाते है अगर वो ही हमसे दूर जा कर, तो, यहाँ गमे -इंतज़ार में ही खड़े हम क्यों है। सोच तो वो भी कुछ अलग रहा है हम से, दिल फिर उसी शख्स का हूँआ हमदम क्यों Continue reading जिंदगी तो है

है सफर में

है सफर में है सभी तो सफर में इस जिंदगी में जो यहाँ, फिरते है अक्सर उदास ज़िंदगी मे जो यहाँ। पलभर भी कभी ये लम्हें पाते खुशी के कहाँ? खुदको बस आ गए है रास ज़ीन्दगी मे जो यहाँ। जो कभी मिली इजात गमें -हयात से राह में, तो वहीँ जी ले कुछ यूँ ख़ास ज़िंदगी में जो यहाँ। ढूंढते क्यूँ फिरते रहते सब अपने आप को, कोइ प्यारा ओर भी है पास जिंदगी में जो यहाँ। राह खुदा की यहाँ सबको न अक्सर मिलती, सब यहाँ भूले उसे है आसपास जिंदगी में जो यहाँ। -मनीषा जोबन देसाई

याद है

याद है आपका वो मिलना तो याद है दिलका वो खिलना तो याद है। जिस तरहा बिछड़े थे मोड़ पर और तुम्हें ही गवाँना तो याद है। देखते है सब नज़ारे  राह  पर आपका ही गुज़रना तो याद है। हँसकर हम टाल देते है  सदा, दिलमें गम पालना तो याद है। आँख से बहती तन्हाई जो कभी बेवजह ही चाहना तो याद है। -मनीषा “जोबन “

दिल के दरिया में

दिल के दरिया में जब भी बरसता है आसमांसे पानी , साथ में बह जाता है आँखों का पानी… यादों के गुलिस्ता जब बिखर जाते है उन लम्हो से ही , दिलके दरिया में उमड़ती है यादों की मछलियां और …….. चूपचाप रोती है उन लम्हों की सिसकिया… उमड़ आते है  चहेरों के निशां…….. और…. रो देता है आँख पर तैरता पानी ……… -मनीषा ‘जोबन ‘

अस्तित्व

अस्तित्व मैंने जब भी सूना है की ईश्वर है, मन की आशाओ ने कुछ और जिया है, हर एक इंसान में महसूस किया है किसी अनजान अस्तित्वको, बातो में निकलती दुवाओ में ,कभी माँ की हथेलियों में, पापा के मश्वरो में, भाई के राखी बंधे हाथो मे, बहन की जप्पियो में, भाभी की बातो में दोस्तों की महफ़िलो में  ,प्यारभरे उन लम्हो में किसी की मुस्कानों में, किसी की आँखों के दर्द में… कुदरत की बनायी सभी रचनाये कर रही हे प्रेरित ,उस अस्तित्व की उष्मा को  अपने अंदर सहेजकर एक ओर.. नया जीवन जीने की तमन्ना को जीवित कर लेती हूंँ। Continue reading अस्तित्व