About Nitin Kalal

From Dungarpur (raj.) Work at Kherwada... i like to express my fillings by poems... I'm not so good like other writers but always try to learn and trying to being perfectionist. gmail- ni3kalal@gmail.com contact no.-8107440773

किन्नर

किन्नर वहीं चेहरा वहीं चाल-ढाल, वहीं रंग-रूप वहीं वाणी में राग। इंसान ही है हम दिखते भी इंसान, फिर क्यों हमारे संग ये परायेपन का स्वांग? ना समाज बेटी मानता हमे, ना ईश्वर ने माँ बनने का हक़ दिया। नर-नारी की इस दुनिया ने, हमेशा इस किन्नर का तिरस्कार किया।। दुआओं से मेरी उनके घर सजते है, उन घरो में खुशियो के रंग भरते है। बस उन घरो से थोडा अपनापन ही तो माँगा है हमने, क्यों हम अपनी ही पहचान को तरसते है? ना पत्नी होने का अधिकार मिला, ना किसी से सास-ससुर का प्यार मिला। नर-नारी की इस Continue reading किन्नर

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घर की याद आती है

घर की याद आती है परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है, तीज त्योहारों पर जब काम से थका हारा आता हूँ, होली के रंगो और दीवाली के दीपों की याद सताती है। परदेश में ऐ मेरे वतन मुझे घर की याद आती है।। गलतियां जब भी होती है, डांट सुनकर खामोश रह जाता हूँ, ना भी हो गलती फिर भी जाने कितना सह जाता हूँ। सोचता हूँ मेरा मुल्क होता तो सबक सिखाता, और कुछ नही तो सलिखे से मैं भी दो बातें सुनाता।। परायेपन के एहसास में आँख भर आती है, परदेश में ऐ Continue reading घर की याद आती है

ये दिल्ली है मेरे देश की राजधानी

ये दिल्ली है मेरे देश की राजधानी, जहाँ माँ बेटो को जन्म देकर पछताती है। लड़की रात को घर से बाहर निकलने से घबराती है, और निर्भया की आत्मा आज तक लज्जाति है।। ये दिल्ली है मेरे देश की राजधानी, जहाँ राजपद की आस रोज कोई दंगा करवाती है। भारत माँ जहाँ रोज आसूं बहाती है, शहीद स्मारक की आग जहां शर्मिंदगी से बुझ जाती है। ये दिल्ली है मेरे देश की राजधानी।। ***नि-3***

लाख मशक्कत के बाद

लाख मशक्कत के बाद वो रूप रंग उसका, वो हँसना मुस्कुराना उसका, वो चेहरे की रंगत, वो आँखों को मिचकाना उसका। गजलों में कैसे ये सब लिख पाता मैं, लाख मशक्कत के बाद तो अकेले पारो से मिल पाता मैं।। वो वक़्त बेवक्त साथ उसके सहेलियों का जमावड़ा रहता था, मैं कहना बहुत कुछ चाहता, लेकिन बस मुस्कुराकर रह जाता था। महोब्बत की बातें कैसे उससे बयाँ कर पाता मैं, लाख मशक्कत के बाद तो अकेले पारो से मिल पाता मैं।। वो आती थी जब भी मिलने बस उसे देखता रहता था, लबों तक आयी हुई बात भी बोल नही Continue reading लाख मशक्कत के बाद

कयामत के रंग भर देता है

कयामत के रंग भर देता है खुदा खुबसूरती में कयामत के रंग भर देता है, रुखसार पर एक काला तिल रख देता है। आँखे वेसे ही उसकी कातिलाना है, वो सुरमे से सजाकर उन्हें कतार कर देता है।।1।। कौन कम्बखत कहता है कि कुदरत में फेरबदल नही होते, वो झरोखे में आए तो खुद खुदा ईद की तारीखों में बदलाव कर देता है। खूबसूरती पर उसकी हर एक फ़िदा है, आसमां भी उनके सजदे में अमावस को पूनम की रात कर देता है।।2।। ये तो मुकद्दर है हमारा की वो हमारे हिस्से आयी है, वरना पूरा शहर उन्हें पाने को Continue reading कयामत के रंग भर देता है

गांधी तेरे देश को

गांधी तेरे देश को ग़ांधी तेरे देश को कोडियो के मोल बिकते देखा है, सत्यपथ का सबब भुलाकर झूठ के लिये सत्याग्रह करते देखा है। भुला ये भगतसिंह और आजाद की कुर्बानी, आज एक-एक को मैंने गुलामी की नींव रखते देखा है।।1।। ठिठुरती औलाद को जो अपनी कम्बल ओढती है, बाजार में उसी माँ को नंगा करते देखा है। खून के रिश्तों की रासलीला भी खूब देखी मैंने, भाई को भाई के खून का प्यासा देखा है।।2।। समाज की सतायी औरत को तिल-तिल कर मरना पड़ता है, बलात्कारियो को इज़्ज़त की जिंदगी जीते देखा है।। खूबसूरती पर ग़ज़ल पढ़ते शायरों Continue reading गांधी तेरे देश को

तेरा बदन

तेरा बदन तेरा बदन मुझ में समा जाता है। यु रात के दुझे पहर तक जब नींद नही आती है, करवट बदल-बदल कर जब थकावट सी छा जाती है। जब घडी की टिक-टिक से भी आवाज छन-छन की आती है, जब रोजाना के उसी बासी कम्बल से खुशबु इत्र की आती है।। जब पलकें भारी होने लगती है, और नींद आँखों में बसने लगती है। ऐसे में प्रियतमा तेरा ख्याल मुझे आता है, और कोई ख्वाब तुझे मेरे करीब ले आता है।। तेरा फितूर फिर मुझ पर हावी हो जाता है, और निःस्वार्थ प्रेम का पूरा ज्ञान धरा रह जाता Continue reading तेरा बदन

भक्ति का तमाशा

भक्ति का तमाशा दाम लगाकर इंसान को ईमान खरीदते देखा है, जगराते में अक्सर मैंने खुदा को भी बिकते देखा है।। रंजिशों में इंसान इंसानियत भूल जाते है, बेबात-बेवजह अपने अपनों को मार देते है। तुमसे ज्यादा सगा तो वो जल्लाद निकला, मारने से पहले उसे मैंने आखरी ख्वाइश पूछते देखा है।।1।। वो सुनहरा बचपन अब केवल सपना बन कर रह गया, बचपन से ही मैं हुकूमत की लालच में मर गया। सिर्फ शरारते फितरत में होती तो आज जिंदगी कुछ और होती, मैंने बच्चो को भी अब साजिशें करते देखा है।।2।। चंद ग़ज़लें लिख दी हमने तो हम शायर Continue reading भक्ति का तमाशा

बस इतनी सी कहानी है मेरी

बस इतनी सी कहानी है मेरी सम्मान की जिंदगी को तरसता मैं, समाज में अनाथ कहलाता हूँ। बस इतनी सी कहानी है मेरी, मैं कूड़े से उठा था आज कूड़ा उठाता हूँ।।1।। मुझे पिता का प्यार नही मिला, ना मैं माँ की ममता को जानता हूँ। समाज की नफरत मैं पला हूँ मैं, रिश्ता नफरत का जानता हूँ।।2।। भूख और लाचारी मजबूर कर देती है मुझे, मैं रास्ता चोरी और बेईमानी का अपना लेता हूँ। कब तक बेवजह मार सहता रहूँ मैं, एक रोज किसी को मार देता हूं।।3।। ज़िन्दगी यहीं आकार बदल जाती है मेरी, न्याय की अदालत में Continue reading बस इतनी सी कहानी है मेरी

पहली नज़र

मैं बहक़ रहा हु संभालो जरा, मुझ पर ये कैसा असर हो रहा है। तुझे एक नज़र देखा भर है अभी तो, अभी से किसी पुरानी शराब सा नशा हो रहा है।।1।। आईने में देखा मैंने सूरत मेरी जाने कहाँ घूम है? चेहरा जो नज़र आया सामने उसमे तेरा ही नूर है। अभी खुमार मैं हु तुम्हे ऐतबार न होगा मेरी बातों पर, लेकिन सच कहता हूं मुझ पर तेरा ही सुरूर है।।2।। ***नि-3कलाल***

वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी

वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी जालिम ज़माने के डर से खामोश रहा करती थी, नैनों में मगर अपने अश्क़ छुपाए रखती थी। खोल कर किसी ने उसके सीने से लगी किताब को नही देखा, सुना है उस किताब में वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी।।1।। हम गुजरते थे जब उसके महोल्ले से, मेरे नाम के खूब किस्से सुनाई पड़ते थे। हम जब नजर उठाकर देखते उसके झरोखे में, वो परदे की आड़ से हमे देखा करती थी।।2।। इत्र गुलाब का छिड़क कर जब वो कॉलेज पहली बारी आई थी, आज भी वो खुशबू पुरे क्लासरूम में महकती है। मुस्कुराकर Continue reading वो मेरी तस्वीर छुपाए रखती थी

मिलो दूर जाना है।

मिलो दूर जाना है। निराशा भरी काली रातों को, उम्मीद की रौशनी से रोशन करते जाना है। ये तो शुरुवात भर है मेरे सफर की, मुझे तो मीलो दूर जाना है।।1।। मैं दिया हूँ रोशन ही सही, मेरे हर तरफ उजियाला ही सही। मुझे अपने तल का अँधियारा मिटाना है, आखरी बून्द जब तक बची है जलते जाना है।। ये तो शुरुवात भर है मेरे सफर की, मुझे तो मीलो दूर जाना है।।2।। सादगी मेरे अंदर साँसों सी बसी है, आखरी सांस तक दुश्मन के भी गले मिलते जाना है। याद करे कोई मुझे बाद मेरे, मैं इतना भी महान Continue reading मिलो दूर जाना है।

खूब लड़ी मर्दानी

खूब लड़ी मर्दानी देख झांकी झांसी की आँखे मेरी रोयीं थी, लहूलुहान हाथो में आजादी की तलवार कैसे खनकी थी। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झाँसी वाली रानी थी।।1।। सन् सत्तावन का दौर याद आता है, अंग्रेजी हुकूमत का वो ख़ौफ़ याद आता है। कैसे दुराचार का नाश करने, फिर एक नारी दुर्गा बन कर आयी थी।। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झांसी वाली रानी थी।।2।। कतरा कतरा बहा जिसका और मातृभूमि का अभिषेक हुआ, यूँ ही नही इतिहास में उस वीरांगना का गुणगान हुआ। आजादी की अलख जगाने, फिर Continue reading खूब लड़ी मर्दानी

तेरी याद

तेरी याद कहि किताबो में छुपे गुलाब, तो ग़ज़लो में तेरा नाम, मैंने शिद्दत से संभाली हुई है तेरी हर याद।।1।। तुम्हे याद तो होगा वो बाग़ जहां हम साथ वक़्त गुजारते थे। घंटो बैठ कर पास हम भविष्य के सपने बुना करते थे। मैंने उस बाग़ की कुछ मिट्टी अपने आँगन में सजाए रखी है, जिसके निचे दफ़न है मेरे सारे जज़्बात। मैंने शिद्दत से संभाली हुई है तेरी हर याद।।2।। तुम्हे तो याद ही होंगे जब लोगो में चर्चे तेरी खूबसूरती के होते थे, हम वहां से चिढ़ कर निकल जाते थे।। ऐसा भी नही था की हम Continue reading तेरी याद

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का हार गया जो चन्द्रगुप्त मौर्य से, उसे ना जाने क्यों विश्वविजेता का ख़िताब देते है। अरे जीत तो चन्द्रगुप्त की हुई थी, फिर क्यों जो जीता उसे सिकंदर का नाम देते है।। अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का, यहाँ अकबर को महान्, और भगत सिंह को गद्दार कहते है।।1।। अस्सी घाव सह कर भी जो मैदान में डटा रहा उस सांगा को कौन जानता है? पर बाबर को इतिहास ने पूरा सम्मान दिया। मदिरा पान कर रखेलो को नाचना शौक होता था राजा का, कृष्ण भक्ति में मीरा क्या नाची अपनों ने ही Continue reading ये दुर्भाग्य है मेरे देश का