बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ l बेटी हमारा अभिमान है l जीने का हक़ इनको भी है l इनमे भी तो, जान है ll दो सामान अधिकार बेटी को l ना कोई भेदभाव करो l अच्छी शिक्षा देकर इनको l इनके पैरो पर खड़ा करो ll बेटियाँ है हर क्षेत्र में आगे l आज नहीं बेटो से कम l न हो कन्या भ्रूण हत्या l आओ प्रण ले, आज हम ll बेटा-बेटी एक समान है l दोनों को दे प्यार हम l माँ ,बहन का रूप है बेटी l इनको दे सम्मान हम ll माँ ,बहन का रूप है बेटी l Continue reading बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

मजाक एक हद तक

हम दूजे का मजाक तो पलभर में बना देते है l किंतु स्वयं वो मजाक सहन नहीं कर पाते है ll मजाक करने से पहले सहने की आदत डाले l मजाक ऐसा हो जो दिल में ना चुभोये भाले ll बाणो से लगे घाव तो कुछ दिन में भर जाते है l किंतु कहे कड़वे शब्द दिल को छलनी कर जाते है ll खुश रहने के लिए थोड़ा बहुत मजाक अच्छा है l किंतु मजाक, मजाक ही रहे बस यही अच्छा है ll मजाक करते समय अपनी जुबान पर लगाम रखे l मजाक में हमेशा दूजे की भावना का ध्यान Continue reading मजाक एक हद तक

नववर्ष 2018 की शुभकामनाये

गया दिसंबर आई जनवरी l लेकर फिर एक नया साल ll खुशियों से भर जाये झोली l ना रहे कोई भी फटे-हाल ll ना सोये कभी कोई भूखा l ना किसी को दुःख सताये ll आने वाला ये नया साल l चेहरों पर मुस्कान लाये ll सपने हो जाये सभी के पूरे l मंजिल सभी को मिल जाये ll भूल जाये सब नफ़रत करना l चहुँ और प्यार ही प्यार छायेll ईश्वर करे जीवन में तुम्हारे l आशा की किरण जगमगाये ll आपको व आपके परिवार को l नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये ll —————-

सत्य का ज्ञान

सत्य का ज्ञान सिर्फ दो ही जग़ह हो पाता है l जब इंसान अस्पताल या श्मशान जाता है ll किसी इंसान का दर्द वो तभी समझ पाता है l जब उसे या उसके अपने को दर्द सताता है ll अपनी बीमारी देख, हम परेशान से हो जाते है l अपने आगे दूजे का दुःख, समझ नहीं पाते है ll किन्तु एक बार जब हम अस्पताल पहुंच जाते है l सभी को दुखी देख, अपना दुःख ही भूल जाते है ll श्मशान घाट जाते ही हमारी सोच बदल जाती है l सुलगती हुए चिता के आगे सच्चाई नज़र आती हैll सोचते Continue reading सत्य का ज्ञान

मौत एक सच्चाई

बेशक विज्ञानं ने हर जगह सफलता हासिल की है l मौत और जिंदगी तो ऊपर वाले ने ही लिखी है ll वही होता है और होगा जो ऊपर वाला चाहता हैl बिना उसकी मर्ज़ी के पत्ता भी नहीं हिल पाता है ll किन्तु किस्मत के भरोसे कभी नहीं बैठना चाहिएl हमें जीतने के लिए कोशिशे करते रहना चाहिए ll इंसान अपने कर्मो से ही अपनी किस्मत बनाता हैl मेहनत से तो किस्मत का लिखा भी बदल जाता हैll जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले की ही गुलाम है l फिर हम अपने पर क्यों करते इतना गुमान है ll गुमान Continue reading मौत एक सच्चाई

बिन पटाखे दिवाली सून

प्रदूषण की आड़ में बंद कर दी आतिशबाज़ी l बोले ना होगा धुआँ ना होती पैसो की बर्बादी ll समझ नहीं आता क्या प्रदूषण यही फैलता है l सिगरेट का धुआँ, पर्यावरण स्वच्छ बनता है ? एक तरफ आतिशबाज़ी का निर्माण करवाते हो l उससे टेक्स वसूल कर अपना राजस्व बढ़ाते हो ll फिर कहते है इसकी कोई भी बिक्री नहीं करेगा l जो खरीद चुका है ,उनकी भरपाई कौन करेगा ll करना है तो आतिशबाज़ी का निर्माण बंद करो l करना है तो बीड़ी,सिगरेट का बनाना बंद करो ll करना है तो ईद पर, कोई बकरे न काटे जाये l करना है Continue reading बिन पटाखे दिवाली सून

बजरंगबली

बजरंगबली ये एक सच्चाई है जिसे मैंने कविता का रूप दिया है : आज भी बजरंगबली ,चहुँ ओर विधमान है l श्री राम के दूत है,हम कहते इन्हे हनुमान हैll रूप विशाल है ,सिर पर मुकुट विराजमान है l हाथ में गदा लिए, चमक लाली सामान है ll देते है दर्शन उन्हें, जिनका मन पवित्र है l करते जो निऱ्स्वार्थ सेवा उनके वो मित्र हैll स्वयं को नहीं मानते, ईश्वर का वो रूप l कहते है दूत हूँ उनका नहीं हूँ उनका रूपll मै अपने भक्तों को हर संकट से बचाता हूँ l करता हूँ उनकी रक्षा,रक्षक बन जाता हूँ Continue reading बजरंगबली

प्रद्युम्न-श्रद्धांजलि

प्रद्युम्न-श्रद्धांजलि बड़े प्यार से स्कूल भेजा, माँ ने अपना दुलारा l नहीं जानती थी, नहीं अब वो आएगा दुबारा ll बेफिक्र थी ये सोचकर वो स्कूल पहुंच चुका है l नहीं पता था स्कूल में ही साँसे छोड़ चुका है ll सुनकर खबर बच्चे की माँ का कलेजा थरथराया l क्या हुआ जो दरिंदे ने उसे मौत की नींद सुलाया ll मेरे लाल की आँखे न होती,ये देख तो ना पाताl मेरा लाल मुझे छोड़कर मुझसे दूर तो ना जाता ll मासूम चेहरे को देखकर भी दरिंदे को दया न आई l बड़ी बेहरमी से उसकी गर्दन पर उसने छुरी Continue reading प्रद्युम्न-श्रद्धांजलि

चिंता और चिंतन

चिंता और चिंतन ना दिल को सुकून है,ना दिमाग को आराम है l हर कोई चिंतित है, हर कोई यहाँ परेशान है ll चिंता इंसान के दिलो दिमाग पर छा रही है l चिंता की ये लकीरे, साफ नज़र आ रही है ll चिंता स्वयं नहीं आती,  हम ही उसे बुलाते है l जब जरूरत से ज्यादा अपनी इच्छा जताते है ll बुरा नहीं अपनी इन इच्छाओ को पंख लगाना l बुरा है इसे पूरा करने में दूजे को हानि पहुंचना ll करना  है तो चिंता नहीं,  चिंतन  करो मेरे  भाई l चिंता से अशांति जन्मे,चिंतन से आत्मबुद्धि आई ll Continue reading चिंता और चिंतन

कठपुतली

कठपुतली जिंदगी में अनेको उतार-चढ़ाव आते है l जीतता है वही जो ये सब सह जाते है ll हर किसी का अच्छा समय आता है l धैर्य रखो बुरा समय भी काट जाता हैll मत करो घमंड, कभी अपने पैसो का l ये पैसा तो चलती फिरती धूप-छाँव है l आज अगर किसी ओर के पास है ये l तो कल ये किसी ओर का गुलाम है ll अहम् की आग में, ना जला करो l ना जाने कब ये, तुम्हे ही जला देगी l जिंदगी छोटी है,प्रेम प्यार से रहा करो l ना जाने कब मौत , गोद में Continue reading कठपुतली

रक्षा -बंधन

रक्षा -बंधन आया-आया, राखी त्यौहार आया l बहन ने भाई को, तिलक लगाया ll बांधी-बांधी फिर राखी कलाई पे l फिर बहन ने ,मुह मीठा करवाया l भाई ने बहन को, गले लगाया ll आया-आया ये, शुभ दिन आया l बहन ने भाई को ,तिलक लगाया ll दिया वचन भाई ने फिर बहना कोl हर सुख-दुख मे , साथ निभाऊंगाl तेरी आँखो मे ना ,आसू लाऊगा ll तुझे दिया अपना वचन निभाऊंगाl तेरी आवाज पे, दौडा मैं आऊगा ll आया-आया राखी त्यौहार आया l भाई ने बहन को , गले लगाया ll आया-आया राखी त्यौहार आया l भाई – बहन Continue reading रक्षा -बंधन

गिरगिट और इंसान

गिरगिट और इंसान पल में अक्सर बदल जाता है मौसम l पल में अक्सर बदल जाता है इंसान ll यू ही बदनाम है गिरगिट रंग बदलने मे l रंग तो अक्सर बदलता है , ये इंसान ll जो दिखता है,  वो वैसा होता नही l जो होता है ,  वो हमे दिखता नही ll मन में क्या छुपा हैं,ये हमे पता नही l जो सोचे वैसा हो,ये ज़रूरी तो नही ll पल में माशा और पल में तोला l पल में सब कुछ बदल जाता हैं ll मानते हो जिसको दिल से अपना l कभी-कभी वो भी बदल जाता हैं Continue reading गिरगिट और इंसान

सोचो, समझो और परखो

सोचो, समझो और परखो दिल में कुछ, जबान पर कुछ नज़र आता है l कौन अपना, कौन पराया समझ नहीं पाता हैl कब कौन पीठ में, छूरा घोप दे कुछ नहीं पता l कभी-कभी विश्वास-पात्र भी धोखा दे जाता है ll चंद पलो की मुलाकात से, पहचान नहीं सकते l किसी के दिल में क्या छिपा है जान नहीं सकते ll मन की भवरों को आसानी से यूँ अगर पढ़ पाते l शायद दोस्त कम यहाँ दुश्मन ज्यादा नज़र आते ll रूप -रंग से सुंदरता आक सकते हो  व्यक्तित्व नहीं l बंद जबान से चुप्पी आक सकते हो कडवडाहट नहीं Continue reading सोचो, समझो और परखो

सोचो ! अगर ये ना होता…

सोचो अगर ये रात ना होती, तो क्या होता l इंसा हर पल दो के चार, में ही लगा होता ll दिल को सुकून, ना दिमाग को आराम होता l इंसा परेशा है जितना और ज्यादा परेशा होताll सोचो अगर ये सूरज ना होता, तो क्या होता l बिन सूरज धरती पर जीवन संभव ना होता ll बिन सूरज पेड़-पौधे अपना भोजन न कर पातेl बिन पेड़-पौधों के फिर हम साँस भी न ले पाते ll सोचो अगर ये पेट ना होता, तो फिर क्या होता l ना कुछ खाना होता ना फिर कुछ कमाना होता ll ना इंसान दिन-रात Continue reading सोचो ! अगर ये ना होता…

दर्द

दर्द दूसरो का दर्द सिर्फ वो ही समझ पाता है l जो उस दर्द से कभी होकर गुजर जाता है ll जो उस दर्द को महसूस ना कर पाया हो l वो क्या खाक दूसरो का दर्द समझ पाता हैll दर्द यूँ हर किसी को बताया नहीं जाता है l बताया जाता है उसे जो दर्द समझ पाता हैll वर्ना आपका दर्द एक मज़ाक बन जायेगा l हल नहीं निकलेगा सिर्फ बवाल बन जायेगा ll अगर ना मिले दर्द सुनने वाला कोई अपना l ईश्वर से कहो मन हो जायेगा हल्का अपना l कम से कम ये बातें आगे नहीं Continue reading दर्द