पुस्तक समीक्षा

विषय:- पुस्तक समीक्षा कृति:- दीपक तले उजाला कवयित्री:- उर्मिला श्रीवास्तव पृष्ठ:-94 मूल्य:-100/- समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” लखनऊ की कवयित्री उर्मिला श्रीवास्तव की यह आंठवी कृति “दीपक तले उजाला” पढ़ी। इस कृति की सभी कविताएँ मानव को कुछ न कुछ सीख देती है। इस कृति की पहली काव्य रचना चार घड़ी है। यह जीवन क्षण भंगुर है। जीवन कब तक है किसी को पता नहीं। यह सच्चाई हमेशा याद रहे। ये मानव तन मिलना दुर्लभ है। यदि मिला है तो इसमें अच्छे कर्म करें। बदला,अनकही ,खुद सर,36 की गिनती जैसी रचनाओं से श्रीवास्तव ने जीवन की अच्छाइयों को बताने का प्रयास Continue reading पुस्तक समीक्षा

दोहे

राजस्थानी दोहे चौमासो बरसो घणो, साजण याद सताय। एक पल भी जुग लागे,बरसे रिमझिम हाय।। काळी काळी बादली,आसमान पर छाय। घर घर करती हे घटा, तू धरती पर आय।। होरी खेल रही सखी,रंग मलमल लगाय। फागण में भींगे घणी, मनड़ो भी हरसाय।। बिजुरी चमके बावरी, हिवड़ो भी शरमाय। बादल बरसे जोर सूं, पिया मिलन की आय।। टाबर सगळा देख के,जीव में जीव आय। खेलण में बिसरा न दे, हिवड़ा बैठे छाय।। महँगाई ने कर दी, देखो नींद खराब। सुरसा सी बढ़ती जाय, चले सियासी दाव।। करसान बैठ रो रिया, देख राजनीत को खेल। योजना कागज़ में छे,बढतो जावे मेल।। कवि Continue reading दोहे

रिश्ता कच्चे धागों का

रिश्ता कच्चे धागों का बाँध दिया रक्षा सूत्र भैया सुनी नहीं है कलाई आज बहना को जो दिया वचन भैया रखना उसकी लाज मेरे भैया पर मुझे है नाज़ दो ताली बजाओ साज झूमो, नाचो, गाओ आज फिर करेंगे मिलकर काज भैया करता रहे मेरा राज देती हूँ दुआ दिल से आज निर्भय हो करता रहे काज जय हो भैया कहे समाज कवि राजेश पुरोहित

चुनावी जंग

चुनावी जंग आ गया चुनाव ,शुरू हुई चुनावी जंग सियासत में दिखने लगे हज़ारों रंग दल बदलू भी आ गए देखो संग- संग इनको न लड़ना कोई,अब सियासी जंग बड़े दल देख कर , हुए सभी अब दंग इनके काम काज का , है अनोखा ढंग योजनाओं से जोड़, खूब बजाते चंग पुरोहित नहा लिए,बहती है नित गंग कवि राजेश पुरोहित

विषैली हवा

*विषैली हवा* हर कोई शहर में आकर बस रहा। नित नई समस्याओं से घिर रहा।। बीमार रहते है शहर वाले अक्सर। विषैली हवा का असर दिख रहा।। काट दिये शहरों में सब पेड़ो को। इमारतों में घुट घुट कर पिस रहा।। धूल , धुँआ इस कदर फैला देखो। जिंदगी के दिन आदमी गिन रहा।। गरीबी देखी नही जाती इंसान की। तन ढँकने को वह पैबन्द सिल रहा।। शूल सारे राह के अब कौन उठाता। पुरोहित सब मतलबपरस्त मिल रहा।। कवि राजेश पुरोहित 98,पुरोहित कुटी श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान पिन 326502

समाचार

कवि सम्मेलन में “हिन्दवीर सम्मान” से समान्नित झालावाड़ जिले के कवि राजेश पुरोहित को साहित्य संगम संस्थान,दिल्ली द्वारा “हिन्दवीर सम्मान” से सम्मानित किया गया। भारतीय नववर्ष पर आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में पुरोहित को उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुति हेतु प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान संस्थान के अध्यक्ष राजवीर सिंह मंत्र,सचिव कविराज तरुण सक्षम, उपाध्यक्ष सौम्या मिश्रा अनु श्री, एवम संयोजक आशीष पांडे जिद्दी ने प्रदान किया। पुरोहित कवि, ग़ज़लकार, गीतकार एवम श्रेष्ठ मंच संचालक के रूप में जाने जाते हैं।

हकीकत

हकीकत अक्सर गरीबों को लड़ते झगड़ते देखा है। रोटी के लिए बच्चों को बिलखते देखा है।। नवयुवकों को बन ठन के संवरते देखा है। नशे में मदमस्त लोगों को बहकते देखा है।। अपने हुनर से लोगों के घर बनते देखा है। उनकी खूबसूरत बगिया को महकते देखा है।। आशिकी में युवाओं को मरते देखा है। माँ बाप को उनके हमने तड़फते देखा है।। फैशन में नई पीढ़ी को तन समेटते देखा है। राजेश हकीकत को ख्वाबों में लपेटते देखा है।। कवि राजेश पुरोहित भवानीमंडी

कविता

अग्नि परीक्षा कल्पना चावला सी बेटियाँ अंतरिक्ष मे सफर करती है इंदिरा सी होती है बेटियाँ राजनीति में नाम करती है पी टी उषा बन दौड़ लगाती देश का नाम रोशन करती है निवेदिता बन सेवा करती सबको शिक्षा से जोड़ती है मदर टेरेसा बन सेवा करती सबको निरोग बनाती है गार्गी जैसी विदुषी बनती शास्त्र ज्ञान में अव्वल आती सीता सी पतिव्रता बन ये पल पल अग्नि परीक्षा देती मीरां सी भक्ति में खो जाती कृष्ण नाम का सुमिरण करती वसुंधरा बन गौरव बढ़ाती प्रतिभा बन उच्च पद पाती मीरा कुमार,मायावती ममता जैसी राजनैतिक पद पाती फाइटर प्लेन उड़ाने Continue reading कविता

प्रेमरंग की होली

प्रेमरंग की होली शीत ऋतु की हुई विदाई। ग्रीष्म ऋतु में आई होली।। खिले टेसू के फूल प्यारे। केसरिया ये प्यारे -प्यारे।। परीक्षा भी नजदीक आई। करो जमकर तुम पढ़ाई।। दादा से पिचकारी मंगाई। दादी अबीर भर के लाई।। किशन ने डफली बजाई। फाग गीतों की बारी आई।। लाल हरा पीला नीला ये। रंग भर भर गुलाल उड़ाई।। जलेबी और नमकीन की। घर घर खुशबू आई भाई।। मंजीरे भी खूब बजाती। फ़ाग खेलने आई टोली।। हंसी खुशी और ठिठोली। लेकर भाईचारा आई होली।। पिचकारी और गुब्बारों में। भर भर रंग और खेले होली।। असत्य की होली जलाओ। फिर खेलो प्रेमरंग Continue reading प्रेमरंग की होली

ग़ज़ल

आंखों का काजल आंखों के काजल की महिमा बडी महान। लाखों घायल हुए और ले ली कितनी जान।। युवाओं में लगा दी जिस गाने ने आग। आंखों का वो काजल सबने रखा ध्यान।। इंटरनेट पर मग्न है भीड़ युवाओं की इस साल। काजल के पीछे पड़ा विद्वानों का सारा ज्ञान।। आंखों में बसाता कोई आंखों से बतियाता। आंखों के काजल में रहता न कोई भान।। आँखे पल पल देखती दुनियाँ की टेढ़ी चाल। काजल लगाकर बढ़ा रहे सारे अपनी शान।। कवि राजेश पुरोहित श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी पिन 326502 मोबाइल 7073318074

आर्य संस्कृति

आर्य संस्कृति बन सन्यासी देश जगाया युवाओं को जिसने जगाया व्यर्थ सारे जग के आडम्बर सत्य राह पर जिसने चलाया भारत की आर्य संस्कृति को सारे जग को जिसने बताया वह युवा सन्यासी प्रखर वक्ता जिसने मानव धर्म सिखाया शिकांगों के धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म का परचम लहराया विश्व गुरु भारत केवल अपना जहाँ का पत्थर भी पूजवाया आस्था भाईचारे की मिसाल आर्यावर्त ने सारा जग महकाया वंदे मातरम नारे को अपनाया सच पूछो भारत वही कहाया कवि राजेश पुरोहित श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी पिन 326502 ************************ : अदम्य साहस प्रखर तेज दयानंद सा अब युवाओं में कहाँ है देश Continue reading आर्य संस्कृति

म्हारो प्यारो राजस्थान

म्हारो प्यारो राजस्थान ***************** लागे हिवड़ा सूं भी प्यारो ओ रेतां के धोरा वालो ओ उंटा के डेरा वालो रंग रंगीलो राजस्थान घणो रसिलो राजस्थान गोडावण का जोड़ा वालो चिंकारा का जोड़ा वालो जान सूं प्यारो राजस्थान लागे रूपालों राजस्थान ऊंचा ऊंचा परबत वालो डूंगर लागे प्यारो प्यारो यो रजपूता रो राजस्थान यो घूमर वालो राजस्थान खेजड़ली की छाया वालो चम्बल नद के बीहड़ वालो ओ म्हारो न्यारो राजस्थान ओ रंग रंगीलो राजस्थान राणा प्रताप की जय वालो चेतक की यो गाथा वालो चंदन के बलिदान वालो पन्ना की स्वामिभक्ति वालो म्हारो प्यारो राजस्थान ओ रंग रंगीलो राजस्थान तीज और Continue reading म्हारो प्यारो राजस्थान

विकसित हिंदुस्तान

विकसित हिंदुस्तान **************** आओ विकसित देश बनाएँ विज़न दो हज़ार बीस अपनाएं सुंदर प्रकृति को हम बचाएं गीत खुशी के मिलकर गाएँ मरुस्थल के हम शूल हटाएँ श्रम कर हम अन्न उपजाएँ हरियाली चहुँ ओर फैलाएं रंग बिरंगे सुमन खिलाएँ सागर को भी लांघ जाएं प्रगति पथ पर बढ़ते जाएं अपना हुनर भी दिखाएं विकसित हिंदुस्तान बनाएं देश में प्रोधोगिकी बढ़ाएं और प्रक्षेपण यान बनाएँ तकनीकी हम ज्ञान सिखाएं मन से अंधविश्वास मिटाएँ निष्काम कर्म नित करते जाएँ अर्जुन सा एक लक्ष्य बनाएँ अवसादों से कभीे न घबराएं आशाओं के फूल खिलाएं देश हित मिल कदम बढ़ाएं वन्दे मातरम गान Continue reading विकसित हिंदुस्तान

ग़ज़ल

वक्त करवट बदल रहा कद्र कर मुलाकात अब आंधियों से कर जिंदगी घुट घट के जी लिया तू कर बात खिड़कियां खोल कर अब नहीं आता कोई हरकारा अब न तू चिठियों की बात कर बाग बगीचे सुने सुने दिख रहे अब तितलियों की बात न कर तालाब की हालात देख ली वहाँ मछलियों की बात न कर सारे शजर कट रहे साथियों अब टहनियों की फिक्र न कर मुल्क में सुरक्षित नहीं कोई तू बेटियों की बात न कर कवि राजेश पुरोहित श्रीराम कॉलोनी भवानीमंडी पिन 326502 जिला झालावाड़ Mob.7073318074 Email 123rkpurohit@,gmail.com

चूल्हे चौके

चूल्हे चौके चूल्हे चौके संभालती है बेटियाँ परिवार की आन बान है बेटियाँ तगारी फावड़े चलती है बेटियाँ नरेगा में काम करती है बेटियाँ घर की देहरी छोड़ती है बेटियाँ देश की प्रहरी बनती है बेटियाँ सीमा की रक्षा करती है बेटियाँ वतन की शान ये प्यारी बेटियाँ ओलंपिक में जीतती है बेटियाँ स्वर्ण पदक लाती है बेटियाँ कवि राजेश पुरोहित भवानीमंडी जिला झालावाड़ राजस्थान पिन 326502