सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना माँ वीणा पुस्तक धारिणी नमन करो स्वीकार । आए माँ तेरी शरण दो विद्या का उपहार। ऋणी रहे हम सदा तुम्हारे तेरी स्तुति गाये । ऋषि मुनि करे वंदना तेरी देव भी शीश नवाये।। मिटा दो माँ इस जीवन से अज्ञानता का अंधकार । आए माँ तेरी शरण दो विद्या का उपहार।।। दया करो इस दास पर माँ दर्शन दो एक बार । तेरे बच्चे तुझे बुलाये आओ माँ करके हंस सवार ।। मांगे माँ बस ज्ञान तुझसे ना मांगे संसार । आए माँ तेरी शरण दो विद्या का उपहार ।। जय माँ शारदे।

व्यथा वृक्ष की।

क्यो काटते हो मुझे मैं तो जीवन देता हूं स्वयं ना लेकर अपना कुछ भी फल तुमको दे देता हूं।। चोट तुम्हारी कुल्हाड़ी का हर पल सहता रहता हूँ जब तक अंतिम स्वास चलती है मेरी प्राणवायु ही देता रहता हूँ।। फिर क्यों काटते हो मुझे मैं तो हर सुख दुख में काम आता हूं कभी द्वार बन कभी बन खिड़की घर की लाज बचाता हूँ।। पल पल ऐ मनुष्य तू हमको कितने घाव देता है गर्मी के मौसम में शीतल छाँव हम्हीं से लेता है।। फिर क्यों काटते हो मुझे मैं भी तो तुम्हारी तरह इसी धरती माँ की Continue reading व्यथा वृक्ष की।