बहुत याद आते हो

कभी अकेली अँधेरी रातों में जब सिर्फ मैं और मेरी तन्हाई साथ होते हैं, तब तुम बहुत याद आते हो.. तुम , मेरे गाँव की सड़कें मेरे गाँव की धूप मेरे गाँव की अल्हड़ मस्ती मेरे गाँव का नुक्कड़  बहुत याद आते हो..   कुछ पल के लिए ही सही आज फिर लौट चलने का मन करता है फिर उन्हीं वादियों में घूमने का जी करता है जहाँ छोड़ आए हैं अपना सबकुछ सबकुछ,  सबकुछ,  सबकुछ मस्ती में,  हवाबाजी में बहुत कुछ बहुत कुछ    जहाँ कुछ ही दोस्त जीवन थे जहाँ कुछ ही सड़कें रोज़ की हमराह थी जहाँ एक ही खिड़की Continue reading बहुत याद आते हो

मेरा गाँव

कभी अकेली अँधेरी रातों में जब सिर्फ मैं और मेरी तन्हाई साथ होते हैं, तब तुम बहुत याद आते हो.. तुम , मेरे गाँव की सड़कें मेरे गाँव की धूप मेरे गाँव की अल्हड़ मस्ती मेरे गाँव का नुक्कड़  बहुत याद आते हो.. कुछ पल के लिए ही सही आज फिर लौट चलने का मन करता है फिर उन्हीं वादियों में घूमने का जी करता है जहाँ छोड़ आए हैं अपना सबकुछ सबकुछ,  सबकुछ,  सबकुछ मस्ती में,  हवाबाजी में बहुत कुछ बहुत कुछ  जहाँ कुछ ही दोस्त जीवन थे जहाँ कुछ ही सड़कें रोज़ की हमराह थी जहाँ एक ही खिड़की की तलाश Continue reading मेरा गाँव