मुक्तक

मुक्तक अगर सीने मे ये कम्बख्त…….. दिल न होता, न रातों की नींद उडती, न दिन का चेन खोता। ये करिशमा है…………………..कुदरत का, ना तू मुझमें होता…………… ना मैं तुझमे होता॥ संजय नेगी ‘सजल’

मुक्तक

ये भूकंप नहीं, क्रोध है प्रकृति का प्रकृति से छेडछाड, दोष है मानव प्रवृति का प्रकृति करे पुकार…संभल जाओ सभी वरना मिट जायेगा मानव, वजूद तेरी आकृति का। संजय नेगी ‘सजल’

मेरी जान निकल जाती है

  नजर न फेर यूं मेरी जान निकल जाती है रूठकर न जा मुझसे आँख मेरी भर आती है।   जाने कहां चली बीच राह में छोडकर मुझे आ जाओ लौटकर तेरी याद सताती है।   बहुत दिन हुए तुम्हें देखे बगेर मेरी जान दिन में चेन नहीं, रातों की नींद उड जाती है।   कब तलक जुदा रहोगी मुझसे तुम ये दिल का दर्द, बहुत बेचेनी होती है।   साथ मेरे न होती जब तुम मगर किताब में रखी तस्वीर तेरी दिल बहलाती है।   संजय नेगी ‘सजल’

गजल

मैंने मनाना छोडा नहीं, तुमने रूठना छोडा नहीं।   हर- पल तुमको प्यार किया मगर, तुमने सताना छोडा नहीं।   हार गये प्यार में, इस कदर हम, तुमने हराना छोडा नहीं।   खुशी हमारी खो गयी, जाने कहां, तुमने मुस्कुराना छोडा नहीं।   तुमने लाख बदल दिये, ठिकाने मगर, हमने तेरी गली में जाना छोडा नहीं।   तुम खुदगर्ज हुए इतने मगर, हमने दुनियां को हंसाना छोडा नहीं।   हमे अपने दिल से निकाला, यूं तुमने, हमने दिल लगाना छोडा नहीं।   कसमे- वादे निभाते रहे सदा हम, प्यार में तुमने झूठी कसमे खाना छोडा नहीं।   क्या? उम्मीद करे Continue reading गजल

मुक्तक

1- बेवक्त मेघ बरस गये असहाय किसान तरस गये कैसे? भरे पेट अपना, हमारा किसान ये कर्ज मे डूब गये। 2- किसान तब कितना रोया होगा लहलाती फसल को पल मे खोया होगा कर्ज के बोझ तले जाने… कितनो ने मौत को गले लगाया होगा।   संजय नेगी ‘सजल’

मेरी गुडिया सो रही…

मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। अभी- अभी आँख लगी है, उसे रुलाना मत।। मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। आँगन की चिडिया तुम, पंख मत फडफडाना। आकर दाना चुगना तुम, फिर धीरे से उड जाना।। मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। भोर की पहली किरण तुम, चुपके- चुपके से आना। अपने तेज प्रकाश में, शीतलता तुम लाना।। मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। मलय- पवन के झोंके तुम, धीरे- धीरे से बहना। बहकर मेरे आँगन को, अपनी सुगन्ध से महकाना।। मेरी गुडिया सो रही, उसे जगाना मत। आसमान के बादल तुम, अभि मत गरजना। अभी- Continue reading मेरी गुडिया सो रही…