लिखता हूँ उसका होकर

दिल के टूटन की बात सुनो,वो खुश तो हैं तनहा होकर, मिलते हैं जो मुस्का कर वो,कुछ हँस कर कुछ रो कर। यहाँ नींद भी आती है तो,सपनो में आ जाते हैं वो, यही तो हमने पाया है अब,प्यार में उनके खुद खोकर। चन्द कमाई मेरे दिल की,जो अब शायद आज लुटाता हूँ, वाह कमाता हूँ हरदम,जब लिखता हूँ उसका होकर। बाजारों में मोल नहीं अब,कल महफ़िल में ये पाया हमने, खरीद हमें वो ले जाए और,मिट जाएँ हम खुद बिककर। एक यही आस है आज हमारी,वो सोया करेंगे चांदनी में, चाँद निहारेगा वहाँ दूर से,और देखेंगे हम पास में Continue reading लिखता हूँ उसका होकर

मैं बहकना सीख रहा हूँ

जितना भी टूट चुका हूँ,उतना ही जुड़ना सीख रहा हूँ। हां ये सच है जिंदगी मैं अब,सुधरना सीख रहा हूँ। तुझे बुलाकर पास यहाँ, खुद को वापस भेज दिया, अब तक सबको मंजूरी दी,अब मुकरना सीख रहा हूँ। जो तेरी शिकायत है ना मुझसे,मेरे दूर ही रहने की, देख हवा को बलखा कर तुझसे,अब गुजरना सीख रहा हूँ। जो वजह दी दलील में,की क्यों जुदा हुए थे तुम, सच बताता हूँ आज भी,मैं उबरना सीख रहा हूँ। नीरस मेरी ग़ज़ल को सुन,ये कहता चला चल साथ में, हां है ये सच मेरे मुन्तजिर,मैं लिखना सीख रहा हूँ। गर वक़्त का Continue reading मैं बहकना सीख रहा हूँ

मेरी बेगारी

मेरी बेगारी रहो दूर इस तजुर्बे से , टूट जाने के तुम, हमने तो इन्ही लम्हों में जिंदगी गुजारी है। जबसे देखा है तुमको, खुश होते हुए जीवन में, हमने ले ली तेरे गम की सारी अंधियारी है। सिसक के ना रोता देखा, जब भी देखा पनियल आँखे, अभी तो ये जीवन पथ की थोड़ी सी पुचकारी है। खुश रहना ही जीवन का , मंत्र यहाँ सूने जग में, फिर इस को खुद में लेने में ऐसी क्या दुश्वारी है। यहाँ वहां किसका और क्या, कब क्यों कैसे जान गए, पर खुद को ना जाना , यही तो एक महामारी Continue reading मेरी बेगारी