About Uttam Dinodia

दोस्तों, जिन्दगी की भागदौड़ ने बंजारा बना दिया है। वक्त किसी के साथ ज्यादा समय रूकने नहीं देता और दिल किसी को छोड़ना नहीं चाहता। बस इन्हीं उलझे हुए लम्हात को कुछ अनकहे शब्दों से सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं और मैं "उत्तम दिनोदिया" आपसे, मेरे इन अनकहे शब्द के सफर में साथ चाहता हूं....

श्रीनिवास रामानुजन् अयँगर (तमिल ஸ்ரீனிவாஸ ராமானுஜன் ஐயங்கார்) – “ईश्वरीय रुप की गणितीय संगणना”

कुछ लोग तस्वीर में कहानी ब्यान कर सकते हैं,  कुछ कविता से तस्वीर पैदा कर सकते हैं,  कुछ ऐसे हैं जो अपनी तरंगो से,  खूंखार जानवरो को शांत कर सकते हैं  परंतु  एक भारतीय को  जन्मजात ऐसा उपहार मिला था  जो अपूर्व था….  अनन्त काल से, अनन्त प्राणी…..  अनन्त की खोज में लगे हैं……  परन्तु कोई नहीं जान पाया  कि,  ये अनन्त आखिरकार है क्या?  सिवाय,  नामक्कल की नामागिरी माता प्रसाद-पुत्र एक अनन्त प्रतिभा युक्त श्रीनिवास रामानुजन के…… ऐसा महानतम गणितज्ञ, जिसने ये स्वीकार किया की,  उसकी जो भी खोज है  वो उसे उसकी कुलदेवी ने स्वप्न में स्वयं प्रदान की है  “श्रीनिवास रामानुजन Continue reading श्रीनिवास रामानुजन् अयँगर (तमिल ஸ்ரீனிவாஸ ராமானுஜன் ஐயங்கார்) – “ईश्वरीय रुप की गणितीय संगणना”

सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता

सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता सभ्यताएं जन्म लेती हैं उत्कर्ष पर आती हैं और फिर विलुप्त हो जाती हैं कुछ सिल्ला, माया, एस्ट्राकोंस, नोक, सैंजिंगडुई की सभ्यता मानिन्द तेज गुजरती रेलगाड़ी की तरह, पर्याप्त गुंज के साथ धङधङा कर गुजर जाती हैं तो कुछ रोम, यूनान, चीन, मैसोपोटामिया, मिस्र और सिन्धु घाटी की सभ्यताओं की तरह, चुपचाप हजारों वर्षों के सफर में तराशती हैं शैल को नदी के किनारों की तरह….. अनेक सिद्धांत हैं जो अलग अलग सभ्यताओं को पुरातन सिद्ध करते हैं परन्तु प्रथम उत्सुकता तो यह है कि, सभ्यता कहा किसे जाये? क्या गुफाओं में अस्तित्व की लड़ाई Continue reading सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता

तीन तलाक

तीन तलाक ………………………………………………….. मेरे इस्कूल जाते वक्त तीन तीन घंटे, तेरा मेरे दिदार का तकल्लुफ दिखते ही मेरे, तेरे चेहरे पर रंगत आ जाना मेरे बुर्कानशीं होकर आने पर वो तेरी मुस्कान का बेवा हो जाना मेरे इस्कूल ना जाने कि सूरते हाल में तेरा गली में साइकिल की घंटियां बजाना सुनकर खो गई थी मैं, और तेरी जुस्तजू में दे दिया था मैंने मेरे अपनों की यादों को तलाक कबूल है, कबूल है, कबूल है…… वो जादुई तीन शब्द और तेरा करके मूझे घूंघट से बेपर्दा, करना मुझसे पलकें उठाने की गुजारिश वो मुखङा दिखाने की आरजू-ओ-मिन्नत लेटकर मेरी Continue reading तीन तलाक

शतरंज

शतरंज हाथी घोङा ऊंट रानी, इक वजीर और आठ पैदल चौसठ घरों में झरझर बहती, शतरंज की कलकल हर एक की अलग चाल, हर एक की अलग पहचान बङे बङे नाम सबके, पर पैदल के पीछे छिपे मकान सबसे आगे छाती जिसकी, चार गुना है संख्याबल एक घर की पहुंच दी उसको , किमत सबसे निर्बल जैसे चाहा चलवाया इनको, अतिलघु आकार दिया जब भी आयी विपदा कोई,इन बेचारों को मार दिया ऐसी ही शतरंज बिसातें, हर और बसी हैं इस जग में नजर घुमा कर देख जरा, कुचल रहे हैं ये पग पग में बीज बोवता है इक पैदल, Continue reading शतरंज

अधूरी कहानी

अधूरी कहानी लौटाने थे आये, वो मेरे खत मुझे पूछा कि कैसे जिओगे, तो अल्फाज़ जैसे जल गये।। लिया जो हमनें हथेलियों में, मुखङा उनका आंखे रहीं गुमसुम, पर इकबारगी वो भी मचल गये।। पलकों में छुपा रहे थे, तसव्वुफ़-ए-शबनम हमसे इस कोशिश में वो मेरे ताउम्र के जज्बात कुचल गये।। पूछा जो हमनें बिखरी हुई जुल्फों का सबब दिखा किसी और के नाम की मेंहदी, वो सरे राह बदल गये।। कहते थे कि उनके वादे हैं, अबद-ऐ-आलम-अज़ीम हल्की सी धूप क्या पङी, बर्फ से भी जल्दी पिघल गये।। की जो हमने तस्दीक, कैसे थामा दामन-ए-गैर बङी मासूमियत से बोले, Continue reading अधूरी कहानी

शहीद का परिवार

शहीद का परिवार तन्हाई की परछाई को अकेलेपन की सियाही को यादों की पुरवाई को और बीत चूकी छमाही को चलो आज लिखा जाए….. आंखों के बह गये काजल को खामोश हो चूकी पायल को बरस चूके उस बादल को मन मयुर पपिहे घायल को चलो आज लिखा जाए….. बेजान हुई इक नथनी को वक्त काल प्रवाह महाठगनी को धधक खो चूकी अग्नि को कंही शुन्य ताकती सजनी को चलो आज लिखा जाए….. होश खो चुके कंगन को सूख चूके उस चंदन को बूझे दिप के वंदन को सूखी आंखों के क्रंदन को चलो आज लिखा जाए….. रोती, बच्चों की Continue reading शहीद का परिवार

सीलन भरी सुबह

सीलन भरी सुबह गंदी सी बिन नहायी, ठंड से ठिठुरती फटे चिथङों में लिपटी कोने में दुबकी बैठी थी वो लड़की…… दो तीन बार कि थी उसने कोशिश अपनी गोद में छुपाये कंकालित अर्धनग्न बिमार भाई की खातिर जाने को सड़क किनारे जलते अलाव के पास लेकिन वहां जाकर भी बारबार लौट आती थी वो उसी हिमधुसरित सीलन भरे ठंडे कौने में क्योंकि उसकी बर्दाश्त के बाहर थी वहां आग तापते लोगों कि आंखों के गर्म नाखूनों की चुभन….. ।। गोलू…… मेरा प्यारा गोलू….. इसी नाम से पुकारती थी वो अपने भाई को जो इस वक्त तप रहा था शीतकालीन Continue reading सीलन भरी सुबह

मैं कौन हूं

मैं कौन हूं कभी सरल मुस्कानों सा, पर्वत मालाओं सा दुरूह कभी लगे पुरूस्कार संसर्ग मेरा, तो महाविदग्ध मेरा साथ कभी कभी महासिद्ध तारसप्तक सा, हूं मातृत्व सा लावण्य कभी कभी वेश्या सा वैधव्य लगूं, तो वैदेही सा हूं कारूण्य कभी मैं समय हूं…….. आविर्भूत पराक्रम हूं, कभी अभिभावक मैं लिप्साओं का चिर यौवन मेरी उत्कंठा, तो सम्बोधन कभी मैं चिताओं का अबोधगम्य बेतरतीब कहीं, असंयमी अथाह स्वच्छंद कभी कभी बेलाग बदसूरत हूं, तो सजल साश्वत अनुराग कभी मैं काल हूं…….. मोहपाश मेरा प्रतिभूत, रचता में काल अनुपम अनुप तृणवत सी इक छाया भी, तो कभी ब्रह्मांड मेरा प्रतिरूप लगे अतिलघु Continue reading मैं कौन हूं