About Vindhya Prakash

विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र

सच कह दूँ पर कौन सुनेगा

सच कह दूँ पर कौन सुनेगा? सच में सच का साथ न दोगे कमजोरो को हाथ न दोगे । दोष सिद्ध निर्बल पर होता। सबल पाप करता और सोता। नीर क्षीर सा कौन चुनेगा। सच कह दूँ पर कौन सुनेगा । सदय भाव अब हृदय न आते। बदले की भावनाए पाले। काम करते रहते काले। पश्चाताप से कौन धुलेगा । सच कह दूँ पर कौन सुनेगा । घबराहट सच्चाई से , जैसे तीखी दवाई से, दूरी है अच्छाई से । हितकारी पर कौन गुनेगा। सच कह दूँ पर कौन सुनेगा । दीवारों के कान सुना है । जेलों के मेहमान Continue reading सच कह दूँ पर कौन सुनेगा

अरुणोदय

अरूणोदय की बेला आयी कली कली डाली मुस्काई ओस विन्दु मिट गए धरा के प्रातःकाल सुखद सुहाई काली रात दूर है दुख सी फिर सुख सी बेला आई प्राची में प्रकाश दिख रहा चिड़ियो मे कोलाहल सुनाई। भौरे मुदित मना है देखो पल्लव मे स्मित है आई। धरा शस्यश्यामला पूरित फूल फूले नही समाई। उदय सूर्य का होता है तब बीती रात प्रात जब आई। विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र

बेटियाँ

बेटियाँ पढाओ जनजन से आह्वान है । ये काम महान है ये काम महान है । किससे कम है मेरी बेटी चढती है हिमालय की चोटी । करो सदा सम्मान है । यही आह्वान है । ये काम महान है । पढ़कर बेटी दो घरों को रोशन करती देती शिक्षा भेद न करो बेटे बेटी में दो समान शिक्षा दिक्षा। दहेज मुक्त हो सब समाज जब समझे बहू को बेटी समान है । यही आह्वान है । ये काम महान है । आधी आबादी की जिससे होती है भागीदारी । एक नहीं दो दो मात्राएं नर से भारी नारी हम Continue reading बेटियाँ

कभी कभी कागज कहता है ।

कभी कभी कागज कहता है , कभी लेखनी खुद कहती है आज तुम्हें कुछ लिखना हैं । नही आ रहा तो सिखना है । कभी कभी मेरा मन कहता है, कभी कभी चिंतन कहता है । आज कही कुछ सृजना है, मन की बातें लिखना हैं । कभी कभी तरुवर कहता है कभी उपवन खुद कहता है । आज तुम्हें कुछ लिखना है, नहीं आ रहा तो सिखना है । कभी कभी मसि कहती हैं कभी तो अक्षर ही कहता आज तुम्हें कुछ लिखना हैं नहीं आ रहा तो सिखना है । कभी कभी पंक्तियाँ कहती हैं कभी प्रकृति स्वयं Continue reading कभी कभी कागज कहता है ।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

महिला दिवस महिला की हर जगह दिख रही, है समान भागीदारी । जिसकी शक्ति का लोहा। मान चुकी है दुनिया सारी। क्यों कहता नारी पीछे है। नही रही अब अबला बेचारी। कंधा मिलाकर चल पडी है प्रगतिशील है आज की नारी। आधी दुनिया जिसके बल पर जिससे बनती सृष्टि हमारी। ममता की मूरति है कामिनी भामिनी दारा आदि नामधारी। एक नहीं दो दो मात्राएं। नर से भारी नारी । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र 9198989831

नेता

मन कहता नेता बन जाऊ। पहनू लम्बा कुर्ता टोपी जोर जोर से मैं चिल्लाऊ। मन कहता नेता बन जाऊँ कोई नहीं पूछेगा पढाई टैक्स नहीं जो होगी कमाई बी आई पी की कुर्सी पाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । कोई कानून न आडे आये जो आये संशोधन करवाये बिना पूँजी धन थोक कमाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । झूठ बोलना सीख ही लूँगा । हर काम में कमीशन लूँगा जिसको तिसको धाक जमाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । वादा मेरा अस्त्र बनेगा झूठ मेरा धर्म बनेगा दाग रहे पर बेदाग दिखाऊ मन कहता नेता बन जाऊँ । Continue reading नेता

होली खुशियों की झोली

आयी बसंत की होली मीठी लगती है बोली रंग सराबोर है वन मे लाल सुनहरी पीली फाग का रंग चढा है सब निकल पडी है टोली प्रिय प्रियतम को रंग डाले सब भीज गयी है चोली फागुन के गीत सुनाए मीठी लगती है बोली कोई गुझिया पूडी खाये कोई भंग सो रंग जमाए कोई पकड के रंग लगाए कोई करता हंसी ठिठोली अबीर गुलाल लगे है सुन्दर लगती है टोली। ढोल के थाप लगे है सब रंग खेले हमजोली। भूल गये सब शिकवे खुशियां लाती है होली। रंग उडे नभ तक है उड रही अबीर और रोली। होली की शुभकामनाएं Continue reading होली खुशियों की झोली

गिरने का जमाना है आया।

गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । समझता था ऊपर चढे वो है गिरते मगर जो है नीचे वही गिर रहे हैं । क्या बात है सच का साथी रहा जो वही घिर रहा है सही घिर रहा है । गिराने की ख्वाहिश रही दिल में जिसके मुझे तो गिराने में खुद गिर रहे है । गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । कहीं पर चढ़ा भाव आलू के देखो कहीं प्याज उछली नभ छू रही है । मगर यह भी देखा भाव भारी Continue reading गिरने का जमाना है आया।

गिरने का देखो जमाना हि आया।

गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । समझता था ऊपर चढे वो है गिरते मगर जो है नीचे वही गिर रहे हैं । क्या बात है सच का साथी रहा जो वही घिर रहा है सही घिर रहा है । गिराने की ख्वाहिश रही दिल में जिसके मुझे तो गिराने में खुद गिर रहे है । गिरने का देखो जमाना हि आया। शेयर गिर रहा है हेयर गिर रहा हैं । कहीं पर चढ़ा भाव आलू के देखो कहीं प्याज उछली नभ छू रही है । मगर यह भी देखा भाव भारी Continue reading गिरने का देखो जमाना हि आया।

शब्द ताकत है शब्द दुआ है

*शब्द ताकत है शब्द दुआ है *शब्द घातक है शब्द दवा है *शब्द वेद है शब्द कुरान है *शब्द बाइबिल शब्द पुरान है शब्द अल्लाह शब्द भगवान है शब्द उपदेश शब्द गीत गान है शब्द मे समाहित आस्था महान है शब्द मंत्र शब्द फरमान है शब्द पूजा है शब्द अजान है शब्द बडाई है शब्द सम्मान है शब्द गीत है शब्द तान है शब्द ही अंधे का भान है शब्द अधिगम की जान है शब्द से होता मानव की पहचान है सबको इसका संज्ञान है। शब्द शक्ति है शब्द ही ज्ञान है शब्द कवि लेखक का प्रान है। शब्द से Continue reading शब्द ताकत है शब्द दुआ है