About "विराज़"

"Poet"

बता दो अभी

बता दो अभी अगर प्यार है तो बता दो अभी, इन्तजार की हमकों आदत नहीं, * इन्कार-इकरार के बीच हूँ फंसा, बे-वजह तड़पने का जब हुनर ही नहीं, * ख़ामोश जुबां से कह देंगे अलविदा, मज़बूरी क्या थी, कभी पूछेंगे नहीं, * फैसला इश्क़ का होगा तभी, जताओगी, प्यार तुम्हें भी है या नहीं…. * * # विराज़

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी बे-परवाह जब ये ज़िन्दगी हुई, क़ीमत अश्क़ की तब मालूम हुई, * हँसी के तराने गुम हुए खुद-ब-खुद, दोस्तों की जब से कमी हो गई, * रास नहीं आयी उसे मेरी ये हँसी, शायद…. मेरा ये ग़म जब किसी की ख़ुशी हो गई…. * * # विराज़

रिश्तों की क़द्र

रिश्तों की क़द्र अपने रिश्तों की कद्र करें…. अक्सर गुस्से में, जल्दबाज़ी में नई उम्र में, हम ऐसी गलती कर बैठते है, तन्हा रहना किसी को शोभा नहीं देता, इसलिए रिश्तों का आदर-सम्मान करें, और उसे खण्डित होने से बचायें… दीवानेख़ास में मेरे, दरारें हो गई इतनी, कि… अब मैं फूल भी फैंकता हूँ, तो किनारे टूट जाते है… #विराज़

भूल बैठे इंसानियत

भूल बैठे इंसानियत परिंदे कभी लड़ते नहीं, अपनी जात के लिए, ये धरा कभी ठुकराती नहीं, अनाज के लिए, वृक्ष भी बखूबी है न्यौछावर, हर काम के लिए, प्राकृति भी है मेहरबां, बिना किसी नाम के लिए… फिर :- हमारी हर जरूरत क्यों बदल जाती है, अपने स्वार्थ के लिए, क्यों लड़ते है हम, बिना किसी काम के लिए, क्यों भूल जाते है, इंसानियत हर इंसान के लिए… #विराज़

मेरा नाम आया..

◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ बेताब था बहुत लेकिन मुझे आराम आया, गुनाहों के खुनी पन्नों पे जब मेरा नाम आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ वक़्त की रेत थी जो हाथों से अब जा चुकी थी, मोहलत अब क्या मांगू जब नया फरमान आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ बदलती राह अब तब्दील हुई गलियों के बीच, उस ख़ौफ़ में भी वो तो सर-ए-आम आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ इंसान भी नहीं बाकि रहा इस खेल में अब, मंजर मौत का था ना कोई निशान आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ रुपहले चेहरे अब और धुंधले से हो चुके थे, तन भी थक चूका था ना कोई आराम आया, ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ काल भी जैसे अब मुझको है लगता भूल Continue reading मेरा नाम आया..

हालात जनता के

हालात जनता के उग्र इस भीङ का, रूख तो मोङना ही था, शहीदों के कफन का मोल, भले कुछ भी न था, जश्न की जिस रात में, डूबी हुई थी मानवता, आजादी की खुशी में, बैखोफ थी जहां जनता, लङ रहा था सरहद पर, सैनिक भारतीय ही था, उग्र इस भीङ का, रूख तो मोङना ही था, शहीदों के कफन का मोल, भले कुछ भी न था… समाज की बंदिशों में, लुट रहा इन्सान था, अपनी ही मजबूरियों में, घुट रहा इन्सान था, तक्लीफ से अन्जान वो, हुआ तो कभी ना था, लूट की इन नीतियों से, नादान वो कभी Continue reading हालात जनता के

दुश्मनी

तेरे चन्द अल्फाज़ों ने, मुझे रोक रखा है, वरना! प्यार से मेरी, गहरी दुश्मनी थी कभी ॥ ————————————– “दर्द “ मत पूछों की कैसा हूं मैं,– उजड़ कर फिर बसना, आसान नहीं होता ॥

श़ायर

श़ायर लिखने वाला खुद कभी, वैसा नहीं होता, फिर भी वो दुनिया से, ऐसी आस रखता है, खुद़ वो गल्तियों से, निज़ात हो नहीं पाता, पर दूसरों के लिए, वो राहें साफ रखता है ॥ ‘विराज’

आज सपने लेने है महगे

आज सपने लेने है महगे कुछ करने की जिद्द ठानी थी, खुशियों की करी कर्बानी थी, नईं सोच के साथ बढ़ रहे, सपनों को पूरा कर रहे, आज जगह-जगह पर नैतिकता के, नाम पर होते है दंगे, यहाँ खर्चे करने है मुश्किल, ओर सपने लेने है मंहगे ॥ जिस द्वार से की शुरूआत थी, उस द्वार ही खङा पाया है, यहाँ समय ही आगे निकला है, कुछ हाथ ना अपने आया है, बदलते दौर की धूल में, हम पेट को भरना सीख रहे, एक ही बात को अपनाकर, हम एक ही रंग में है रंगे । यहाँ खर्चे करने है Continue reading आज सपने लेने है महगे

सच्चे प्यार का असर

सच्चे प्यार का असर ये कविता मैनें अपने College के दिनों में लिखी थी, ये कविता दो प्रेमियों के बीच हुई बातों का समावेश है, प्रेमी-प्रेमिका प्यार को जब पूर्ण रूप से समझने व जानने लगे है तो वो अपने प्यार को कुछ इस तरह जाहिर कर रहे है.. इस कविता में प्रेमी-प्रेमिका एक मंच पर एक-दूसरे के आमने-सामने हो कर अपने-अपने प्यार को ब्यान कर रहे है कुछ इस तरह से… प्रेमिका :- तेरी चाहत में जाने असर ये हुआ है, ये विराना जहान् अच्छा लगने लगा है । क्या इसी को प्यार कहते है यहाँ, पराया है जो Continue reading सच्चे प्यार का असर

मुश्किल है

मुश्किल है सिसकती हुई आवाज़ को सुनकर, अब तक तुम सोऐ रहे, तो ‘नारी’का इस समाज में, कल्याण हो पाना मुश्किल है…. इस शोर-लालच की दुनिया में, जो बहरे युहीं बने रहे, तो अमन-शान्ति फैलाते हुऐ, जीवन जी पाना मुश्किल है…. युं बेटा पाने की चाह में, बेटी को युहीं मारते रहे, तो बराबरी के इस जहान में, अकेला जी पाना मुश्किल है…. दिन-रात होती घटनाओं को, जो देखकर भी तुम चुप रहे, तो नए समाज की कल्पना का, निर्माण हो पाना मुश्किल है…. ‘विराज’

पत्थर से मोम

ऐ दोस्त, तुमने ये क्या कर दिया, इस पत्थर में, प्राणों का संचार कर दिया, कभी जो, इंद्रियों पर काबू न था, आज वही स्वभाव उसने, मेरा शीतल कर दिया, हंसने की सहमति, बन्द थी मुझको जैसे, उसने खुशी का, उजाला कर दिया, जो राह में, किसी को समझता न था, आज उसी को, रास्ते का राही कर दिया, उसने ही मेरे, सूर्य के तेज को, शांत कर, चंद्रमा कर दिया, जिसमें बदलाव, कोई कर ना सका, तेरे दो बोलो ने, वो काम कर दिया, हां तुने ही, मेरे स्वभाव को, पत्थर से मोम कर दिया, तेरी दोस्ती के, स्पर्श Continue reading पत्थर से मोम