बरखा

बरखा

लगे अषाढ गगन घन गरजे सावन गरु गंभीरा,

भादौ झिमिक – झिमिक जल बरसे भरिगे  चहुं दिश नीरा l

सजन  बिन कौन हरै मोरि पीरा सजन बिन कौन हरै मोरि पीरा . . .

 

About ओम हरी त्रिवेदी

आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य , मानव होना भाग्य है तो कवि होना सौभाग्य . . . नाम- ओम हरी त्रिवेदी शिक्षा - स्नातक +तकनीकी डिप्लोमा जन्म स्थान - बैसवारा लालगंज , रायबरेली (उत्तर प्रदेश) व्यवसाय - शिक्षक

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