मेने वक़्त बदलते देखा है !!

मेने वक़्त बदलते देखा है ! मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है.. मेने दिन के उजालो को, रात के अँधेरे में बदलते देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है.. मेने हर दिल अजीज़ लोगो को भी, एक पलभर में बिछड़ते हुए देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है.. चंद रुपयों के लालच में, अपनों को अपनों से झगड़ते हुए देखा है.. हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखे है.. एक सत्ता की कुर्सी के आगे, अच्छे अच्छों का ईमान सड़क पर बिकते हुए देखा Continue reading मेने वक़्त बदलते देखा है !!

मानव मात्र का धर्मशास्त्र

मानव मात्र का धर्मशास्त्र – यथार्थ गीता श्रीमद्भगवतगीता की अद्वितीय व्याख्या यथार्थ गीता मानव मात्र का धर्म शास्त्र है।भारत में प्रकट हुई गीता विश्व मनीषा की धरोहर है।भारत सरकार को चाहिए कि यथार्थ गीता को भारत का राष्ट्रीय धर्मशास्त्र घोषित कर दिया जाए। यथार्थ गीता को राष्ट्रीय शास्त्र का मान देकर उंच नीच भेदभाव तथा कलह परम्परा से पीड़ित विश्व की सम्पूर्ण जनता को शांति देने के प्रयास की आज आवश्यकता है।यथार्थ गीता पढ़ने सर सुख शांति मिलती है साथ ही यह अक्षय अनामय पद भी देती है। यथार्थ गीता में ईश्वरीय साधना ईश्वर तक की दूरी तय करना कि Continue reading मानव मात्र का धर्मशास्त्र

सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता

सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता सभ्यताएं जन्म लेती हैं उत्कर्ष पर आती हैं और फिर विलुप्त हो जाती हैं कुछ सिल्ला, माया, एस्ट्राकोंस, नोक, सैंजिंगडुई की सभ्यता मानिन्द तेज गुजरती रेलगाड़ी की तरह, पर्याप्त गुंज के साथ धङधङा कर गुजर जाती हैं तो कुछ रोम, यूनान, चीन, मैसोपोटामिया, मिस्र और सिन्धु घाटी की सभ्यताओं की तरह, चुपचाप हजारों वर्षों के सफर में तराशती हैं शैल को नदी के किनारों की तरह….. अनेक सिद्धांत हैं जो अलग अलग सभ्यताओं को पुरातन सिद्ध करते हैं परन्तु प्रथम उत्सुकता तो यह है कि, सभ्यता कहा किसे जाये? क्या गुफाओं में अस्तित्व की लड़ाई Continue reading सिंधु सरस्वती घाटी की सभ्यता

योग और विवाद

योग और विवाद 21 जून को पूरे विश्व मे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया, लेकिन भारत के लिए ये किसी पर्व से कम नही था, क्योकि योग भारतीय संस्कृति से जुड़ी हुई एक परम्परा और उसका एक अटूट हिस्सा भी हे, जिसे पूरा विश्व अपना भी रही हे, मानो भारत देश के पहल की ही राह देखी जा रही थी | करीब १७५ देशो ने विश्व मंच पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से जुड़ी परंपरा का समर्थन किया, और वो भी बिना किसी चर्चा के, उनमे से ४० या उससे अधिक देश तो मुस्लिम और ईसाई समुदाय से जुड़े देश थे| Continue reading योग और विवाद

असमानता

असमानता ये समाज की विडंबना है की समाज के अधिकतर व्यक्ति जो की आर्थिक तौर से सम्रुध हे, वे हमारे आस पास जो ग़रीब व्यक्ति हें उनको हीन भावना से देखते हैं . धनी व्यक्ति जब कभी भी किसी निर्धन व्यक्ति से बात करता हे तब वह बिल्कुल अलग अंदाज से बात करता हे एंव मानो उस्से बात कर के कोई मतलब ही नही हे, मानो ईश्वर ने संसार मे जीने का , सोचने का, करने का या फिर विचार प्रगट करने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ धनी व्यक्तियो को ही दिया हैं. समाज का हर एक व्यक्ति आर्थिक तौर Continue reading असमानता