फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा

२ दिनों का देश प्रेम फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा.. चलो कुछ दिन बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा.. २६ जनवरी की शाम को बंद कर के जहा रखा था झंडा, उन डब्बो से धूल हटाया जाएगा .. साल में २ दिन ही सही पर वो तिरंगा फिर से बाहर निकाला जाएगा.. जब हर चौक चौराहे पर तिरंगा फेहराया जाएगा फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा.. चलो कुछ दिन बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा.. बड़-चढ़ कर फेसबुक-व्हाट्सप्प पर पोस्ट लगाया जाएगा.. फिर से एक दिन देश के नाम राष्ट्रगान गया Continue reading फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा

चुनावी जंग

चुनावी जंग आ गया चुनाव ,शुरू हुई चुनावी जंग सियासत में दिखने लगे हज़ारों रंग दल बदलू भी आ गए देखो संग- संग इनको न लड़ना कोई,अब सियासी जंग बड़े दल देख कर , हुए सभी अब दंग इनके काम काज का , है अनोखा ढंग योजनाओं से जोड़, खूब बजाते चंग पुरोहित नहा लिए,बहती है नित गंग कवि राजेश पुरोहित

शहीद की माँ

शहीद की माँ  बेटा, बचपन तेरा भोलेपन में जाने क्या क्या करता था पलने पर बस लेटे लेटे हँसता था, मुस्काता था।   घुटने के बल चलते चलते कुछ रुकता फिर बढ़ता था माँ का आँचल दिख जाने पर होकर खुश मुस्काता था।   और गोद पे चढ़ जाने का अभिनय प्यारा करता था बाहर तारों की माला में चाँद पिरोया करता था।   फूलों के गुच्छों पर हरदम महक प्यार की भरता था पास बुलाने तितली को तू ‘ऐं ऐं’ कर कुछ कहता था।   माँ की गोदी में सिर रखकर सोता तू मुस्काता था क्या सपने थे जिसे Continue reading शहीद की माँ

माँ का लाडला (वीर शहीद)

माँ का लाडला (वीर शहीद) (यह दिव्य कविता गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में भारत माँ के वीर शहीदों को दिल से समर्पित करता हूँ|) जब माँ का बंटवारा हो रहा था, किसी के हिस्से पंजाब, किसी के हिस्से हिमाचल आया। मैं पंक्ति में सबसे पीछे खड़ा था, मेरे हिस्से भारत माँ का आँचल आया। शहीद पड़ा था जब चिर-निद्रा में, कोई दो गज कफ़न, कोई कठौती में गंगा लाया। माँ ने सहेज कर रखा था जिसे वर्षों से, में लहरा कर वह तिरंगा लाया। धधक रही थी चिता जब शहीद जवान की, शोक जताने कोई देशभक्त, कोई नेता बेईमान आया। Continue reading माँ का लाडला (वीर शहीद)

विकसित हिंदुस्तान

विकसित हिंदुस्तान **************** आओ विकसित देश बनाएँ विज़न दो हज़ार बीस अपनाएं सुंदर प्रकृति को हम बचाएं गीत खुशी के मिलकर गाएँ मरुस्थल के हम शूल हटाएँ श्रम कर हम अन्न उपजाएँ हरियाली चहुँ ओर फैलाएं रंग बिरंगे सुमन खिलाएँ सागर को भी लांघ जाएं प्रगति पथ पर बढ़ते जाएं अपना हुनर भी दिखाएं विकसित हिंदुस्तान बनाएं देश में प्रोधोगिकी बढ़ाएं और प्रक्षेपण यान बनाएँ तकनीकी हम ज्ञान सिखाएं मन से अंधविश्वास मिटाएँ निष्काम कर्म नित करते जाएँ अर्जुन सा एक लक्ष्य बनाएँ अवसादों से कभीे न घबराएं आशाओं के फूल खिलाएं देश हित मिल कदम बढ़ाएं वन्दे मातरम गान Continue reading विकसित हिंदुस्तान

मेरी जन्मभूमि

मेरी जन्मभूमि है ये स्वाभिमान की, जगमगाती सी मेरी जन्मभूमि… स्वतंत्र है अब ये आत्मा, आजाद है मेरा वतन, ना ही कोई जोर है, न बेवशी का कहीं पे चलन, मन में इक आश है,आँखों में बस पलते सपन, भले टाट के हों पैबंद, झूमता है आज मेरा मन। सींचता हूँ मैं जतन से, स्वाभिमान की ये जन्मभूमि… हमने जो बोए फसल, खिल आएंगे वो एक दिन, कर्म की तप्त साध से, लहलहाएंगे वो एक दिन, न भूख की हमें फिक्र होगी, न ज्ञान की ही कमी, विश्व के हम शीष होंगे, अग्रणी होगी ये सरजमीं। प्रखर लौ की प्रकाश Continue reading मेरी जन्मभूमि

15 अगस्त

15 अगस्त ये है 15 अगस्त, स्वतंत्र जब हुआ ये राष्ट्र समस्त! ये है उत्सव, शांति की क्रांति का, है ये विजयोत्सव, विजय की जय-जयकार का, है ये राष्ट्रोत्सव, राष्ट्र की उद्धार का, यह 15 अगस्त है राष्ट्रपर्व का। याद आते है हमें गांधी के विचार, दुश्मनों को भगत, आजाद, सुभाष की ललकार, तुच्छ लघुप्रदेश को पटेल की फटकार, यह 15 अगस्त है राष्ट्रकर्म का। विरुद्ध उग्रवाद के है यह इक विगुल, विरुद्ध उपनिवेशवाद के है इक प्रचंड शंखनाद ये, देश के दुश्मनों के विरुद्ध है हुंकार ये, यह 15 अगस्त है राष्ट्रगर्व का। ये उद्घोष है, बंधनो को तोड़ने Continue reading 15 अगस्त

मेरा देश

मेरा देश लगता हैं मेरा देश अब शांत स्वर में बैठा हैं, कुछ न कर सकता मुहँ पर उंगली लगाये बैठा हैं, पिघल रहा हैं कश्मीर आज बारूदों के ताप से, फिर भी मेरा देश आज शीत माहौल चाहता हैं, जहाँ हर वक़्त रहती थी केशर की महक , वहाँ आज हर पल हैं बारूदों की महक, अब कश्मीर में जीना दुस्वार हो गया हैं, ये धड़कन हैं भारत की जिस पर दिल न्यौछावर हो गया हैं, जिनके ख़ातिर शहीद हुए इस देश के रक्षक, वे लोग ही बन बैठे हैं इस चमन के भक्षक, जिसका नहीं ये चमन वो Continue reading मेरा देश

यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है

यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है ईश्वर के सब अवतारों का। इसने ही दिया है धर्म जगत को सुसंस्कृति और संस्कारों का । इसके ग्रंथों ने सबसे पहले हर मानव को श्रेष्ठ बताया है सारे जग को एक सूत्र में बँध बस सूत्र प्रेम का सिखलाया है। इसके कारण ही मानवता का मुकुट सजा है अधिकारों का। यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है ईश्वर के सब अवतारों का। सत्य अहिंसा का पथ इक सुन्दर इसके मंत्रों में दिख जाता है और निडर हो पथ पर चलना भी यह धर्म सभी का बन जाता है। यह संग्रह है Continue reading यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है

मुक्तक — भारत माँ

मुक्तक — भारत माँ वह बूढ़ी है मगर परी सुन्दर-सी लगती है वह गाँव में रहती है पर शहर-सी लगती है। जिसके पास दौड़ बच्चे सभी चहचहाते हैं वह चिड़िया के प्यारे सब्ज शजर-सी लगती है। ——  भूपेन्द्र कुमार दवे               00000

शहीद

शहीद अभी-अभी पत्नी नहायी होगी माथे पर बिंदियाँ माँग में सपने सजाई होगी अभी-अभी बिटियाँ सहेलियों संग खिल-खिलाई होगी अभी-अभी बेटा, पिता जैसा बनने का ख्वाब बुना होगा अभी-अभी माँ को हिचकी आई होगी बेटे की याद सताई होगी अभी-अभी बीमार पिता को उसका मनी-आँडर मिला होगा चिंता की लकीरें मिटी होगी अभी-अभी बहन को हल्दी चढ़ी होगी हाथों में मेहंदी लगी होगी हसरतें उड़ान भरी होगी अभी-अभी पैगाम आया है तिरंगा में लिपटा शहीद आया है अभी-अभी सबकी आँखों में समंदर उतर आया है अभी-अभी दर्द के सैलाब में एक परिवार अचानक बह गया है —-

खूब लड़ी मर्दानी

खूब लड़ी मर्दानी देख झांकी झांसी की आँखे मेरी रोयीं थी, लहूलुहान हाथो में आजादी की तलवार कैसे खनकी थी। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झाँसी वाली रानी थी।।1।। सन् सत्तावन का दौर याद आता है, अंग्रेजी हुकूमत का वो ख़ौफ़ याद आता है। कैसे दुराचार का नाश करने, फिर एक नारी दुर्गा बन कर आयी थी।। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झांसी वाली रानी थी।।2।। कतरा कतरा बहा जिसका और मातृभूमि का अभिषेक हुआ, यूँ ही नही इतिहास में उस वीरांगना का गुणगान हुआ। आजादी की अलख जगाने, फिर Continue reading खूब लड़ी मर्दानी

शहीद का परिवार

शहीद का परिवार तन्हाई की परछाई को अकेलेपन की सियाही को यादों की पुरवाई को और बीत चूकी छमाही को चलो आज लिखा जाए….. आंखों के बह गये काजल को खामोश हो चूकी पायल को बरस चूके उस बादल को मन मयुर पपिहे घायल को चलो आज लिखा जाए….. बेजान हुई इक नथनी को वक्त काल प्रवाह महाठगनी को धधक खो चूकी अग्नि को कंही शुन्य ताकती सजनी को चलो आज लिखा जाए….. होश खो चुके कंगन को सूख चूके उस चंदन को बूझे दिप के वंदन को सूखी आंखों के क्रंदन को चलो आज लिखा जाए….. रोती, बच्चों की Continue reading शहीद का परिवार

अमर शहीदों के प्रति

अमर शहीदों के प्रति शहीदों को जिगर में अपने जगाकर तो देखो कहानी उनकी, उनको सुनाकर तो देखो सुना दो उनको अमर उन्हीं की कहानी कहानी जो आँखों में लाती है पानी पानी नहीं है ये है आँसू की धारा स्मृति की झिरती हो जैसे अमृत की धारा रोती है माता और रोती है बहना बच्चे पुकारें हैं आजा ओ पापा वतन यह तुम्हारा इसे आकर तो देखो वतन की रगों में अपनी निशानी तो देखो हिमालय तुम्हीं से सर उठाये खड़ा है विन्ध्या के हर कण में भी हीरा जड़ा है ये गंगा तुम्हारी व यमुना तुम्हारी कलकलकर बहती Continue reading अमर शहीदों के प्रति

मेरा देश फिर भी चल रहा है

स्वतंत्रता दिवस  अपनी ही लगायी चिंगारियों में  यह जल रहा है, 1947 में आजाद हुआ यह देश 70 साल में ही फिर से गुलामी की ओर चल रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पब्लिसिटी  की आड़ में असहनशीलता का ढिंढोरा पिट रहा है, वीवीआईपी  सुरक्षा वाला आदमी इस देश में रहने से डर रहा है, फुटपाथ पर सोता हुआ इंसान भी बड़ी बड़ी गाडियो तले कुचल रहा है, तो कही गोमाँस खाना लोगो को लीगल  लग रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पैसों के लिए जहा देशप्रेम Continue reading मेरा देश फिर भी चल रहा है