मेरी जन्मभूमि

मेरी जन्मभूमि है ये स्वाभिमान की, जगमगाती सी मेरी जन्मभूमि… स्वतंत्र है अब ये आत्मा, आजाद है मेरा वतन, ना ही कोई जोर है, न बेवशी का कहीं पे चलन, मन में इक आश है,आँखों में बस पलते सपन, भले टाट के हों पैबंद, झूमता है आज मेरा मन। सींचता हूँ मैं जतन से, स्वाभिमान की ये जन्मभूमि… हमने जो बोए फसल, खिल आएंगे वो एक दिन, कर्म की तप्त साध से, लहलहाएंगे वो एक दिन, न भूख की हमें फिक्र होगी, न ज्ञान की ही कमी, विश्व के हम शीष होंगे, अग्रणी होगी ये सरजमीं। प्रखर लौ की प्रकाश Continue reading मेरी जन्मभूमि

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15 अगस्त

15 अगस्त ये है 15 अगस्त, स्वतंत्र जब हुआ ये राष्ट्र समस्त! ये है उत्सव, शांति की क्रांति का, है ये विजयोत्सव, विजय की जय-जयकार का, है ये राष्ट्रोत्सव, राष्ट्र की उद्धार का, यह 15 अगस्त है राष्ट्रपर्व का। याद आते है हमें गांधी के विचार, दुश्मनों को भगत, आजाद, सुभाष की ललकार, तुच्छ लघुप्रदेश को पटेल की फटकार, यह 15 अगस्त है राष्ट्रकर्म का। विरुद्ध उग्रवाद के है यह इक विगुल, विरुद्ध उपनिवेशवाद के है इक प्रचंड शंखनाद ये, देश के दुश्मनों के विरुद्ध है हुंकार ये, यह 15 अगस्त है राष्ट्रगर्व का। ये उद्घोष है, बंधनो को तोड़ने Continue reading 15 अगस्त

मेरा देश

मेरा देश लगता हैं मेरा देश अब शांत स्वर में बैठा हैं, कुछ न कर सकता मुहँ पर उंगली लगाये बैठा हैं, पिघल रहा हैं कश्मीर आज बारूदों के ताप से, फिर भी मेरा देश आज शीत माहौल चाहता हैं, जहाँ हर वक़्त रहती थी केशर की महक , वहाँ आज हर पल हैं बारूदों की महक, अब कश्मीर में जीना दुस्वार हो गया हैं, ये धड़कन हैं भारत की जिस पर दिल न्यौछावर हो गया हैं, जिनके ख़ातिर शहीद हुए इस देश के रक्षक, वे लोग ही बन बैठे हैं इस चमन के भक्षक, जिसका नहीं ये चमन वो Continue reading मेरा देश

यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है

यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है ईश्वर के सब अवतारों का। इसने ही दिया है धर्म जगत को सुसंस्कृति और संस्कारों का । इसके ग्रंथों ने सबसे पहले हर मानव को श्रेष्ठ बताया है सारे जग को एक सूत्र में बँध बस सूत्र प्रेम का सिखलाया है। इसके कारण ही मानवता का मुकुट सजा है अधिकारों का। यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है ईश्वर के सब अवतारों का। सत्य अहिंसा का पथ इक सुन्दर इसके मंत्रों में दिख जाता है और निडर हो पथ पर चलना भी यह धर्म सभी का बन जाता है। यह संग्रह है Continue reading यह देश हमारा कर्मक्षेत्र है

मुक्तक — भारत माँ

मुक्तक — भारत माँ वह बूढ़ी है मगर परी सुन्दर-सी लगती है वह गाँव में रहती है पर शहर-सी लगती है। जिसके पास दौड़ बच्चे सभी चहचहाते हैं वह चिड़िया के प्यारे सब्ज शजर-सी लगती है। ——  भूपेन्द्र कुमार दवे               00000

शहीद

शहीद अभी-अभी पत्नी नहायी होगी माथे पर बिंदियाँ माँग में सपने सजाई होगी अभी-अभी बिटियाँ सहेलियों संग खिल-खिलाई होगी अभी-अभी बेटा, पिता जैसा बनने का ख्वाब बुना होगा अभी-अभी माँ को हिचकी आई होगी बेटे की याद सताई होगी अभी-अभी बीमार पिता को उसका मनी-आँडर मिला होगा चिंता की लकीरें मिटी होगी अभी-अभी बहन को हल्दी चढ़ी होगी हाथों में मेहंदी लगी होगी हसरतें उड़ान भरी होगी अभी-अभी पैगाम आया है तिरंगा में लिपटा शहीद आया है अभी-अभी सबकी आँखों में समंदर उतर आया है अभी-अभी दर्द के सैलाब में एक परिवार अचानक बह गया है —-

खूब लड़ी मर्दानी

खूब लड़ी मर्दानी देख झांकी झांसी की आँखे मेरी रोयीं थी, लहूलुहान हाथो में आजादी की तलवार कैसे खनकी थी। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झाँसी वाली रानी थी।।1।। सन् सत्तावन का दौर याद आता है, अंग्रेजी हुकूमत का वो ख़ौफ़ याद आता है। कैसे दुराचार का नाश करने, फिर एक नारी दुर्गा बन कर आयी थी।। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झांसी वाली रानी थी।।2।। कतरा कतरा बहा जिसका और मातृभूमि का अभिषेक हुआ, यूँ ही नही इतिहास में उस वीरांगना का गुणगान हुआ। आजादी की अलख जगाने, फिर Continue reading खूब लड़ी मर्दानी

शहीद का परिवार

शहीद का परिवार तन्हाई की परछाई को अकेलेपन की सियाही को यादों की पुरवाई को और बीत चूकी छमाही को चलो आज लिखा जाए….. आंखों के बह गये काजल को खामोश हो चूकी पायल को बरस चूके उस बादल को मन मयुर पपिहे घायल को चलो आज लिखा जाए….. बेजान हुई इक नथनी को वक्त काल प्रवाह महाठगनी को धधक खो चूकी अग्नि को कंही शुन्य ताकती सजनी को चलो आज लिखा जाए….. होश खो चुके कंगन को सूख चूके उस चंदन को बूझे दिप के वंदन को सूखी आंखों के क्रंदन को चलो आज लिखा जाए….. रोती, बच्चों की Continue reading शहीद का परिवार

अमर शहीदों के प्रति

अमर शहीदों के प्रति शहीदों को जिगर में अपने जगाकर तो देखो कहानी उनकी, उनको सुनाकर तो देखो सुना दो उनको अमर उन्हीं की कहानी कहानी जो आँखों में लाती है पानी पानी नहीं है ये है आँसू की धारा स्मृति की झिरती हो जैसे अमृत की धारा रोती है माता और रोती है बहना बच्चे पुकारें हैं आजा ओ पापा वतन यह तुम्हारा इसे आकर तो देखो वतन की रगों में अपनी निशानी तो देखो हिमालय तुम्हीं से सर उठाये खड़ा है विन्ध्या के हर कण में भी हीरा जड़ा है ये गंगा तुम्हारी व यमुना तुम्हारी कलकलकर बहती Continue reading अमर शहीदों के प्रति

मेरा देश फिर भी चल रहा है

स्वतंत्रता दिवस  अपनी ही लगायी चिंगारियों में  यह जल रहा है, 1947 में आजाद हुआ यह देश 70 साल में ही फिर से गुलामी की ओर चल रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पब्लिसिटी  की आड़ में असहनशीलता का ढिंढोरा पिट रहा है, वीवीआईपी  सुरक्षा वाला आदमी इस देश में रहने से डर रहा है, फुटपाथ पर सोता हुआ इंसान भी बड़ी बड़ी गाडियो तले कुचल रहा है, तो कही गोमाँस खाना लोगो को लीगल  लग रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पैसों के लिए जहा देशप्रेम Continue reading मेरा देश फिर भी चल रहा है

ओ भगत सिंह

ओ भगत सिंह ओ भगत सिंह,ओ भागत सिंह आप कहाँ बैठे हैं जाकर एक नई तूफ़ान उठी है यमुना के मँझधार में आकर . न तो आप न आपके साथी नज़र आते हैं कइयों मील तक मुल्क की कश्ती सुरक्षित कौन ले जाये साहिल तक . हम लगे हुए हैं जाने किस उधेड़बुन में और इधर तूफ़ां मग्न है अपनी धुन में अरबों लोग कोलाहल कर रहे हैं प्राणों की चिंता में लेकिन आपका एक शब्द भी गूँज नही रहा है उन में . ओ भगत सिंह,ओ भगत सिंह आइये फिर एक बार डूबती कश्ती बँचाने पोंछने ये अश्रुधार . Continue reading ओ भगत सिंह

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का हार गया जो चन्द्रगुप्त मौर्य से, उसे ना जाने क्यों विश्वविजेता का ख़िताब देते है। अरे जीत तो चन्द्रगुप्त की हुई थी, फिर क्यों जो जीता उसे सिकंदर का नाम देते है।। अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का, यहाँ अकबर को महान्, और भगत सिंह को गद्दार कहते है।।1।। अस्सी घाव सह कर भी जो मैदान में डटा रहा उस सांगा को कौन जानता है? पर बाबर को इतिहास ने पूरा सम्मान दिया। मदिरा पान कर रखेलो को नाचना शौक होता था राजा का, कृष्ण भक्ति में मीरा क्या नाची अपनों ने ही Continue reading ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

भारत यश गाथा

“भारत यश गाथा” ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार । रूप रहा इसका अति सुंदर, है वैभव इसका जैसा पुरंदर, स्थिति भी ना कम विस्मयकर, है विधि का ये पावन पुरस्कार ।।1।। प्रकाशमान किया विश्वाम्बर, अनेकाब्दियों तक आकर, इसका सभ्य रूप दिवाकर, छाई इसकी पूरे भूमण्डल में छवि । इसका इतिहास अमर है, इसका अति तेज प्रखर है, इसकी प्रगति एक लहर है, ज्ञान काव्य का है प्रकांड कवि ।।2।। रहस्यों से है ना वंचित, कथाओं से भी ना वंचित, अद्भुत है न अति किंचित्, Continue reading भारत यश गाथा

देश प्रेम

देश प्रेम हर कोई सोचे देश का भला हो जाएगा नेता अगर करते काम सब कुछ हो जाएगा ज़िम्मेवारी हमारी कोन किसे बताएगा जनता नेता का भरोसा कर ग़र सो जाएगा देश मिरा दुजा कोई क्यों काम कराएगा ध्यान लगा जरा सोचें कैसे हो जाएगा अपना घर अपने संवारे तब हो पाएगा सोच बदले सब तो सही में कुछ हो जाएगा कहने हम कहे पर देश कैसे बदल पाएगा सजन देख बिमारी कहे कैसे हो जाएगा सजन

मेरा देश

मेरा देश या खुदा मेरे भारत को महान बना दो अपने लोगों को अब तो इन्सान बना दो चमके हर धर आंगन मिले सभी को प्यार भूखा न सो जाये इतना धनवान बना दो बाक़ी दिल में न रहे कोई अब तकरार हर एक की हो ऐसी गीता कुरान बना दो प्यार की इबादत हो और मिले वो इज़हार बेवजह की लड़ाई न हो फ़रमान बना दो रब तिरे जलवे का है हमे खुब इंतजार खुदा हर एक आदमी को इन्सान बना दो जीए हम आपस में दुश्मनी पैदा कर भाई को भाई पे महेरबान बना दो रब न समझा Continue reading मेरा देश