मुक्तक — भारत माँ

मुक्तक — भारत माँ वह बूढ़ी है मगर परी सुन्दर-सी लगती है वह गाँव में रहती है पर शहर-सी लगती है। जिसके पास दौड़ बच्चे सभी चहचहाते हैं वह चिड़िया के प्यारे सब्ज शजर-सी लगती है। ——  भूपेन्द्र कुमार दवे               00000 Advertisements

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शहीद

शहीद अभी-अभी पत्नी नहायी होगी माथे पर बिंदियाँ माँग में सपने सजाई होगी अभी-अभी बिटियाँ सहेलियों संग खिल-खिलाई होगी अभी-अभी बेटा, पिता जैसा बनने का ख्वाब बुना होगा अभी-अभी माँ को हिचकी आई होगी बेटे की याद सताई होगी अभी-अभी बीमार पिता को उसका मनी-आँडर मिला होगा चिंता की लकीरें मिटी होगी अभी-अभी बहन को हल्दी चढ़ी होगी हाथों में मेहंदी लगी होगी हसरतें उड़ान भरी होगी अभी-अभी पैगाम आया है तिरंगा में लिपटा शहीद आया है अभी-अभी सबकी आँखों में समंदर उतर आया है अभी-अभी दर्द के सैलाब में एक परिवार अचानक बह गया है —-

खूब लड़ी मर्दानी

खूब लड़ी मर्दानी देख झांकी झांसी की आँखे मेरी रोयीं थी, लहूलुहान हाथो में आजादी की तलवार कैसे खनकी थी। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झाँसी वाली रानी थी।।1।। सन् सत्तावन का दौर याद आता है, अंग्रेजी हुकूमत का वो ख़ौफ़ याद आता है। कैसे दुराचार का नाश करने, फिर एक नारी दुर्गा बन कर आयी थी।। सच कहाँ था सुभद्रा कुमारी ने, खूब लड़ी मर्दानी वो झांसी वाली रानी थी।।2।। कतरा कतरा बहा जिसका और मातृभूमि का अभिषेक हुआ, यूँ ही नही इतिहास में उस वीरांगना का गुणगान हुआ। आजादी की अलख जगाने, फिर Continue reading खूब लड़ी मर्दानी

शहीद का परिवार

शहीद का परिवार तन्हाई की परछाई को अकेलेपन की सियाही को यादों की पुरवाई को और बीत चूकी छमाही को चलो आज लिखा जाए….. आंखों के बह गये काजल को खामोश हो चूकी पायल को बरस चूके उस बादल को मन मयुर पपिहे घायल को चलो आज लिखा जाए….. बेजान हुई इक नथनी को वक्त काल प्रवाह महाठगनी को धधक खो चूकी अग्नि को कंही शुन्य ताकती सजनी को चलो आज लिखा जाए….. होश खो चुके कंगन को सूख चूके उस चंदन को बूझे दिप के वंदन को सूखी आंखों के क्रंदन को चलो आज लिखा जाए….. रोती, बच्चों की Continue reading शहीद का परिवार

अमर शहीदों के प्रति

अमर शहीदों के प्रति शहीदों को जिगर में अपने जगाकर तो देखो कहानी उनकी, उनको सुनाकर तो देखो सुना दो उनको अमर उन्हीं की कहानी कहानी जो आँखों में लाती है पानी पानी नहीं है ये है आँसू की धारा स्मृति की झिरती हो जैसे अमृत की धारा रोती है माता और रोती है बहना बच्चे पुकारें हैं आजा ओ पापा वतन यह तुम्हारा इसे आकर तो देखो वतन की रगों में अपनी निशानी तो देखो हिमालय तुम्हीं से सर उठाये खड़ा है विन्ध्या के हर कण में भी हीरा जड़ा है ये गंगा तुम्हारी व यमुना तुम्हारी कलकलकर बहती Continue reading अमर शहीदों के प्रति

मेरा देश फिर भी चल रहा है

स्वतंत्रता दिवस  अपनी ही लगायी चिंगारियों में  यह जल रहा है, 1947 में आजाद हुआ यह देश 70 साल में ही फिर से गुलामी की ओर चल रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पब्लिसिटी  की आड़ में असहनशीलता का ढिंढोरा पिट रहा है, वीवीआईपी  सुरक्षा वाला आदमी इस देश में रहने से डर रहा है, फुटपाथ पर सोता हुआ इंसान भी बड़ी बड़ी गाडियो तले कुचल रहा है, तो कही गोमाँस खाना लोगो को लीगल  लग रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पैसों के लिए जहा देशप्रेम Continue reading मेरा देश फिर भी चल रहा है

ओ भगत सिंह

ओ भगत सिंह ओ भगत सिंह,ओ भागत सिंह आप कहाँ बैठे हैं जाकर एक नई तूफ़ान उठी है यमुना के मँझधार में आकर . न तो आप न आपके साथी नज़र आते हैं कइयों मील तक मुल्क की कश्ती सुरक्षित कौन ले जाये साहिल तक . हम लगे हुए हैं जाने किस उधेड़बुन में और इधर तूफ़ां मग्न है अपनी धुन में अरबों लोग कोलाहल कर रहे हैं प्राणों की चिंता में लेकिन आपका एक शब्द भी गूँज नही रहा है उन में . ओ भगत सिंह,ओ भगत सिंह आइये फिर एक बार डूबती कश्ती बँचाने पोंछने ये अश्रुधार . Continue reading ओ भगत सिंह

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का हार गया जो चन्द्रगुप्त मौर्य से, उसे ना जाने क्यों विश्वविजेता का ख़िताब देते है। अरे जीत तो चन्द्रगुप्त की हुई थी, फिर क्यों जो जीता उसे सिकंदर का नाम देते है।। अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का, यहाँ अकबर को महान्, और भगत सिंह को गद्दार कहते है।।1।। अस्सी घाव सह कर भी जो मैदान में डटा रहा उस सांगा को कौन जानता है? पर बाबर को इतिहास ने पूरा सम्मान दिया। मदिरा पान कर रखेलो को नाचना शौक होता था राजा का, कृष्ण भक्ति में मीरा क्या नाची अपनों ने ही Continue reading ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

भारत यश गाथा

“भारत यश गाथा” ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार । रूप रहा इसका अति सुंदर, है वैभव इसका जैसा पुरंदर, स्थिति भी ना कम विस्मयकर, है विधि का ये पावन पुरस्कार ।।1।। प्रकाशमान किया विश्वाम्बर, अनेकाब्दियों तक आकर, इसका सभ्य रूप दिवाकर, छाई इसकी पूरे भूमण्डल में छवि । इसका इतिहास अमर है, इसका अति तेज प्रखर है, इसकी प्रगति एक लहर है, ज्ञान काव्य का है प्रकांड कवि ।।2।। रहस्यों से है ना वंचित, कथाओं से भी ना वंचित, अद्भुत है न अति किंचित्, Continue reading भारत यश गाथा

देश प्रेम

देश प्रेम हर कोई सोचे देश का भला हो जाएगा नेता अगर करते काम सब कुछ हो जाएगा ज़िम्मेवारी हमारी कोन किसे बताएगा जनता नेता का भरोसा कर ग़र सो जाएगा देश मिरा दुजा कोई क्यों काम कराएगा ध्यान लगा जरा सोचें कैसे हो जाएगा अपना घर अपने संवारे तब हो पाएगा सोच बदले सब तो सही में कुछ हो जाएगा कहने हम कहे पर देश कैसे बदल पाएगा सजन देख बिमारी कहे कैसे हो जाएगा सजन

मेरा देश

मेरा देश या खुदा मेरे भारत को महान बना दो अपने लोगों को अब तो इन्सान बना दो चमके हर धर आंगन मिले सभी को प्यार भूखा न सो जाये इतना धनवान बना दो बाक़ी दिल में न रहे कोई अब तकरार हर एक की हो ऐसी गीता कुरान बना दो प्यार की इबादत हो और मिले वो इज़हार बेवजह की लड़ाई न हो फ़रमान बना दो रब तिरे जलवे का है हमे खुब इंतजार खुदा हर एक आदमी को इन्सान बना दो जीए हम आपस में दुश्मनी पैदा कर भाई को भाई पे महेरबान बना दो रब न समझा Continue reading मेरा देश

आव्हान

आव्हान बढ़ते रहेंगे कदम हमारे बढ़ते रहेंगे जब तक रहेगा यह तिरंगा हमारा हाथ में। राष्ट्रगीत भी हम सब शान से गाते चलेंगे जब तक गूँजा करेगी धुन भी हमारी साथ में। कदम मिलाकर साथ चलेंगे हम औ बढ़ेंगे महक वतन की जब तक रहेगी हर इक साँस में। चिरागों की हिफाजत हम सभी करते रहेंगे औ वतन की रोशनी जगमगायेंगे प्राण में। शान अपने देश की सम्मान से हम रखेंगे जब तक रहेगी धार इस कलम औ तलवार में। सारे जहाँ से अच्छा हम हिन्दोस्ताँ रखेंगे रोशन रखेंगे अपनी संस्कृति इस संसार में। इसलिये बढ़ते चलो, बढ़ते चलो, बढ़ते Continue reading आव्हान

शहीद के प्रति

शहीद के प्रति वह सपूत है माँ तेरा ही जिसको हर जन याद रखे है। दिखता है वह हर आँसू में जिसे पलक में तू रक्खे है। मत गिरने दे इन आँसू को वरना हम सब रो बैठेंगे। तेरी हिम्मत के बल पर ही हर वीर कहानी लिक्खेंगे। हर सपूत है माँ तेरा ही सरहद पर जो डटा हुआ है। लड़ते लड़ते वह दुश्मन से हँसते हँसते शहीद हुआ है। वह देखो वह शूरवीर भी खड़ा हुआ है खूं से लथपथ। तेरा बेटा भी था जैसे सीना ताने वीरों के पथ। कहता है हिम्मत दो मुझको कुछ देर अभी माँ Continue reading शहीद के प्रति

तिरंगा

तिरंगा तीन रंगों से मिलकर बना ये तिरंगा प्यारा l मान और सम्मान का ये प्रतीक है हमारा ll केसरिया,सफ़ेद और हरा रंग इसमें समाये l बीच में अशोक चक्र तिरंगे की शोभा बढ़ाये ll केसरिया रंग जहाँ देशभक्ति को दिखाता है l वही धर्मो को एकजुट हो, रहना सिखाता है ll सफ़ेद रंग शांति व ईमानदारी को दिखाता है l लोगों को सच्ची राह पर चलना सिखाता है ll हरा रंग खुशहाली और समृद्धि को दर्शाता है l भारत की ज़मी पर फैली हरयाली दिखाता है ll अशोक चक्र की 24 तिल्लियां 24 घंटे दर्शाती है l मजबूत संबंध Continue reading तिरंगा

आजादी के मायने

आजादी के मायने हर शख्स कहता है इस जहाँ से जाने वाले चमकते हैं, उस जहाँ में सितारे बनकर , जो शहीद हुए हैं हिन्दोस्तान के वास्ते ,   क्या वो भी चमकते होंगे  तारे बनकर , गर ऐसा है तो उनकी आँखों से बरसते होंगे , आसूं इस धरा पर शबनम की बूँद बनकर , देख कर दुर्दसा इस आजाद देश की मुश्किलों का सामना कर के दिलवा गए जो आज़ादी , गुमनामियों में खो कर नाम हमको दिखा गए हसीं सपने , है कोई आज ऐसा जो बन सके सुभाष चन्द्र , है किसी में दम इतना जो बन Continue reading आजादी के मायने