मेरा देश फिर भी चल रहा है

स्वतंत्रता दिवस  अपनी ही लगायी चिंगारियों में  यह जल रहा है, 1947 में आजाद हुआ यह देश 70 साल में ही फिर से गुलामी की ओर चल रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पब्लिसिटी  की आड़ में असहनशीलता का ढिंढोरा पिट रहा है, वीवीआईपी  सुरक्षा वाला आदमी इस देश में रहने से डर रहा है, फुटपाथ पर सोता हुआ इंसान भी बड़ी बड़ी गाडियो तले कुचल रहा है, तो कही गोमाँस खाना लोगो को लीगल  लग रहा है, क्या करे साहब मेरा देश फिर भी चल रहा है । पैसों के लिए जहा देशप्रेम Continue reading मेरा देश फिर भी चल रहा है

ओ भगत सिंह

ओ भगत सिंह ओ भगत सिंह,ओ भागत सिंह आप कहाँ बैठे हैं जाकर एक नई तूफ़ान उठी है यमुना के मँझधार में आकर . न तो आप न आपके साथी नज़र आते हैं कइयों मील तक मुल्क की कश्ती सुरक्षित कौन ले जाये साहिल तक . हम लगे हुए हैं जाने किस उधेड़बुन में और इधर तूफ़ां मग्न है अपनी धुन में अरबों लोग कोलाहल कर रहे हैं प्राणों की चिंता में लेकिन आपका एक शब्द भी गूँज नही रहा है उन में . ओ भगत सिंह,ओ भगत सिंह आइये फिर एक बार डूबती कश्ती बँचाने पोंछने ये अश्रुधार . Continue reading ओ भगत सिंह

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

ये दुर्भाग्य है मेरे देश का हार गया जो चन्द्रगुप्त मौर्य से, उसे ना जाने क्यों विश्वविजेता का ख़िताब देते है। अरे जीत तो चन्द्रगुप्त की हुई थी, फिर क्यों जो जीता उसे सिकंदर का नाम देते है।। अरे ये दुर्भाग्य है मेरे देश का, यहाँ अकबर को महान्, और भगत सिंह को गद्दार कहते है।।1।। अस्सी घाव सह कर भी जो मैदान में डटा रहा उस सांगा को कौन जानता है? पर बाबर को इतिहास ने पूरा सम्मान दिया। मदिरा पान कर रखेलो को नाचना शौक होता था राजा का, कृष्ण भक्ति में मीरा क्या नाची अपनों ने ही Continue reading ये दुर्भाग्य है मेरे देश का

भारत यश गाथा

“भारत यश गाथा” ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार । रूप रहा इसका अति सुंदर, है वैभव इसका जैसा पुरंदर, स्थिति भी ना कम विस्मयकर, है विधि का ये पावन पुरस्कार ।।1।। प्रकाशमान किया विश्वाम्बर, अनेकाब्दियों तक आकर, इसका सभ्य रूप दिवाकर, छाई इसकी पूरे भूमण्डल में छवि । इसका इतिहास अमर है, इसका अति तेज प्रखर है, इसकी प्रगति एक लहर है, ज्ञान काव्य का है प्रकांड कवि ।।2।। रहस्यों से है ना वंचित, कथाओं से भी ना वंचित, अद्भुत है न अति किंचित्, Continue reading भारत यश गाथा

देश प्रेम

देश प्रेम हर कोई सोचे देश का भला हो जाएगा नेता अगर करते काम सब कुछ हो जाएगा ज़िम्मेवारी हमारी कोन किसे बताएगा जनता नेता का भरोसा कर ग़र सो जाएगा देश मिरा दुजा कोई क्यों काम कराएगा ध्यान लगा जरा सोचें कैसे हो जाएगा अपना घर अपने संवारे तब हो पाएगा सोच बदले सब तो सही में कुछ हो जाएगा कहने हम कहे पर देश कैसे बदल पाएगा सजन देख बिमारी कहे कैसे हो जाएगा सजन

मेरा देश

मेरा देश या खुदा मेरे भारत को महान बना दो अपने लोगों को अब तो इन्सान बना दो चमके हर धर आंगन मिले सभी को प्यार भूखा न सो जाये इतना धनवान बना दो बाक़ी दिल में न रहे कोई अब तकरार हर एक की हो ऐसी गीता कुरान बना दो प्यार की इबादत हो और मिले वो इज़हार बेवजह की लड़ाई न हो फ़रमान बना दो रब तिरे जलवे का है हमे खुब इंतजार खुदा हर एक आदमी को इन्सान बना दो जीए हम आपस में दुश्मनी पैदा कर भाई को भाई पे महेरबान बना दो रब न समझा Continue reading मेरा देश

आव्हान

आव्हान बढ़ते रहेंगे कदम हमारे बढ़ते रहेंगे जब तक रहेगा यह तिरंगा हमारा हाथ में। राष्ट्रगीत भी हम सब शान से गाते चलेंगे जब तक गूँजा करेगी धुन भी हमारी साथ में। कदम मिलाकर साथ चलेंगे हम औ बढ़ेंगे महक वतन की जब तक रहेगी हर इक साँस में। चिरागों की हिफाजत हम सभी करते रहेंगे औ वतन की रोशनी जगमगायेंगे प्राण में। शान अपने देश की सम्मान से हम रखेंगे जब तक रहेगी धार इस कलम औ तलवार में। सारे जहाँ से अच्छा हम हिन्दोस्ताँ रखेंगे रोशन रखेंगे अपनी संस्कृति इस संसार में। इसलिये बढ़ते चलो, बढ़ते चलो, बढ़ते Continue reading आव्हान

शहीद के प्रति

शहीद के प्रति वह सपूत है माँ तेरा ही जिसको हर जन याद रखे है। दिखता है वह हर आँसू में जिसे पलक में तू रक्खे है। मत गिरने दे इन आँसू को वरना हम सब रो बैठेंगे। तेरी हिम्मत के बल पर ही हर वीर कहानी लिक्खेंगे। हर सपूत है माँ तेरा ही सरहद पर जो डटा हुआ है। लड़ते लड़ते वह दुश्मन से हँसते हँसते शहीद हुआ है। वह देखो वह शूरवीर भी खड़ा हुआ है खूं से लथपथ। तेरा बेटा भी था जैसे सीना ताने वीरों के पथ। कहता है हिम्मत दो मुझको कुछ देर अभी माँ Continue reading शहीद के प्रति

तिरंगा

तिरंगा तीन रंगों से मिलकर बना ये तिरंगा प्यारा l मान और सम्मान का ये प्रतीक है हमारा ll केसरिया,सफ़ेद और हरा रंग इसमें समाये l बीच में अशोक चक्र तिरंगे की शोभा बढ़ाये ll केसरिया रंग जहाँ देशभक्ति को दिखाता है l वही धर्मो को एकजुट हो, रहना सिखाता है ll सफ़ेद रंग शांति व ईमानदारी को दिखाता है l लोगों को सच्ची राह पर चलना सिखाता है ll हरा रंग खुशहाली और समृद्धि को दर्शाता है l भारत की ज़मी पर फैली हरयाली दिखाता है ll अशोक चक्र की 24 तिल्लियां 24 घंटे दर्शाती है l मजबूत संबंध Continue reading तिरंगा

आजादी के मायने

आजादी के मायने हर शख्स कहता है इस जहाँ से जाने वाले चमकते हैं, उस जहाँ में सितारे बनकर , जो शहीद हुए हैं हिन्दोस्तान के वास्ते ,   क्या वो भी चमकते होंगे  तारे बनकर , गर ऐसा है तो उनकी आँखों से बरसते होंगे , आसूं इस धरा पर शबनम की बूँद बनकर , देख कर दुर्दसा इस आजाद देश की मुश्किलों का सामना कर के दिलवा गए जो आज़ादी , गुमनामियों में खो कर नाम हमको दिखा गए हसीं सपने , है कोई आज ऐसा जो बन सके सुभाष चन्द्र , है किसी में दम इतना जो बन Continue reading आजादी के मायने

सपनों के भारत को लगी नजर

सपनों के भारत को लगी नजर मेरे सपनों के भारत को लग गई किसकी नजर? सोंच हो चुकी है दूषित आज सत्तालोलुपों की, सत्ता के भूखे उस महा दानव की, साधते स्वार्थ अपना रोपकर वृक्ष वैमनस्य की। महादानव हैं वो पर दाँत नही दिखते उसके, खतरनाक विषधर विष भरे सोंच उनके, दूषित कर देते ये सोंचविचार निरीह भोले मानस के। चंद पैसों की खातिर बिक जाते यहाँ ईमान, देश समाज धर्म का फिर कहाँ ध्यान, आम जन मरे या जले, बढ़ता रहे इनका सम्मान। सत्ता लोलुपता इनकी देशभक्ति से ऊपर, देश की बदहाली, दुर्दशा से ये बेखबर, खुशहाल आवो हवा Continue reading सपनों के भारत को लगी नजर

मैं उस मातृभूमि की संतान हूँ

मैं उस मातृभूमि की संतान हूँ मरना मंजूर था जिसे, झुकना नही स्वीकारा था। जहाँ घुटने टेक रहे थे शासक सारे, उस अकेले ने मुगलो को ललकारा था।। मुझे गर्व है मैं उस मातृभूमि की संतान हूँ, जिसने प्रताप सा वीर जन्मा था।।1।। जब कभी इतिहास की बात आती है, चेतक की ठाप सुनाई पढ़ती है। ख़ौल उठता है खून उसकी बलिदानी की गाथा पर, और स्वामी भक्ति रगो में दौड़ जाती है।। मुझे गर्व है मैं उस मातृभूमि की संतान हूँ, जिसने प्रताप सा वीर जन्मा था।।2।। वनो में भटका था जो महलों के आराम छोड़ कर, रूखी सुखी खायी छप्पन भोग छोड़ कर। हल्दी घाटी और दिवेर युद्ध में, वो महाकाल बन कर छाया था। मातृभूमि की रक्षा खातिर, स्वयं एकलिंग अवतार प्रताप का लेकर आया था।। मुझे गर्व है मैं उस मातृभूमि की संतान हूँ, जिसने प्रताप सा वीर जन्मा था।।3।। ***जय एकलिंग, जय प्रताप*** ***नि-3***  

अमन का पैग़ाम पढ़ने आया हूँ

अमन का पैग़ाम पढ़ने आया हूँ, मैं अपने मुल्क से थोडा प्यार ले कर आया हूँ। ना मैंने उजाड़ा आशियाना तेरा, ना तूने नफरत का बीज बोया कभी। ये आंधियो की साजिश थी, जिसने ना मेरा चिराग जलने दिया, ना कभी तेरा आशियाना बसने दिया। मैं उन्ही आंधियो से बचा कर थोड़ी खुशबु अपने वतन की लाया हूँ, अमन का पैग़ाम पढ़ने आया हूँ।।1।। नफ़रत की वो लकीर जिसने शरहदो को बनाया, तुझे पाकिस्तान और मुझे हिंदुस्तान बनाया। मैं शरहदो के ये फासले मिटाने आया हूँ, नफरत की ये आग बुझाने खूब सारा प्यार लाया हूँ। अमन का पैग़ाम पढ़ने Continue reading अमन का पैग़ाम पढ़ने आया हूँ

तिरंगा शिरमौर भारत की शान

तिरंगे की शान मे बर्दाश्त न होगी गुस्ताखी हमें, शिरमौर भारत की मान-सम्मान-गौरव सुरक्षा, लेनी अब अपनी हाथों में हमें! वो दुश्मन गद्दार है जो कहता, भारत मेरा देश नहीं, मैं कहता सरजमीं-ए-भारत, स्वाभिमान है मेरा,कोई खेल नहीं! गद्दार हैं वो! जिनके दिल, सरजमीं-ए-हिंदुस्तान में रहते नहीं, युगों- युगों से जयचन्द जैसे, गद्दारों की इस देश में चली नही। शिरोधार्य शिरमौर देश का स्वाभिमान हमें, अरमानों की बलि देकर, इसकी रक्षा करनी होगी हमें, तिरंगे की शान मे बर्दाश्त न होगी गुस्ताखी हमें, देश द्रोही अफजल जैसे गद्दारों के, सर कलम करनी होगी हमें। शिरमौर भारत की मान-सम्मान-गौरव सुरक्षा, अब Continue reading तिरंगा शिरमौर भारत की शान

भारत की माता हूँ मैं

जननी जन्मभूमि हूँ मैं, आहत हूँ थोड़ी सी, थोड़ी विचलित हूँ मैं, सदियों से कुठाराघात कई दुश्मनों के सह चुकी हूँ मैं, टूटी नहीं अभी तक संघर्षरत हूँ मैं। भारत की माता हूँ मैं! जानती हूँ सदियों से हमपे जुल्म कई होते रहे, गोलियों से मेरे वीर सपूतों के हृदय छलनी होते रहे, पर आहूति देकर ये, रक्षा मेरी करते रहे। कर्मवीरों की धरती हूँ मैं! अभिमान हूँ कोटि कोटि हृदयस्थ जलते दीप की, गौरव हूँ मैं जन जन के संगीत की, बिखरूंगी लय नई बन, विश्वविजय गीत की। जननी जन्मभूमि हूँ मैं, भारत माता हूँ मैं।