क्यों गमगीन है “बैल समुदाय” (व्यंग व हास्य)

क्यों गमगीन है “बैल समुदाय” (व्यंग व हास्य) रिमझिम-रिमझिम बारिश की फुहार खूब बरसी इस सावन में हरियाली खिलखिलाती है मेरे गांव के खेत-खलिहानों में प्रकृति ने किया अद्भुत शृंगार इठलाती-इतराती पुरवाई संग पिली सरसों भी लेती अंगड़ाई गुलाबी अहसासों के संग पर न जाने क्यों उदास है मेरे गांव का “बैल समुदाय” उनके विवश आँखों से बहते आंसू और झुर्री पड़े गालों पर गहरी व्याकुलता की रेखाएं बयां करती हैं उनकी लाचारी, बेबसी और ना उम्मीदी की दास्ताँ क्योंकि “बैल समुदाय” है भूखा कई रातों और कई दिनों से शायद खा गया है कोई चारा उनके हिस्से का चारा Continue reading क्यों गमगीन है “बैल समुदाय” (व्यंग व हास्य)

विद्रोह

विद्रोह मनुस्यों के घने जंगल में जानवर से परिवर्तीत परिवर्तनशील मनुस्य रहते डरे डरे से। सब खड़े हैं डरे से आम आदम डरा है, खास चुप है मूक मौन किसी नई सरसराहट से! मानवता का जंगल सड़े पत्ते, गले पत्ते से डका पड़ा है कहीं कहीं हरे लाल पत्ते नोटो से जीवन पथ को ढँक रहे नुकीले पत्थर के बिछाओ से । चलो इन पर चल सको तो, रौदों इनको रौदं सको तो, यह घिनौने, यह कूरूर यह निश्चुप,नींद में डूबे हुए ऊँघते जगे हुए,अटपटे से उलझे से ! इन्हे अचानक खींचके पकड़ के क्यों जगाया कुम्भकर्ण की नीदं से! Continue reading विद्रोह

शनि की दशा

शनि की दशा देख कर मेरी कुंडली, फेकी पंडित ने अजीब गुगली। बोला यझमान तेरी कुंडली तो उल्टी है, माफ़ करना भाई पर तेरी किस्मत ही फूटी है।। कल से शनि की महादशा है, तेरी हर कदम परीक्षा है। घर में मातम छाएगा, बाहरी तनाव भी बढ़ता जाएगा।। भला जब भी लोगो का करने जाएगा, याद रख की पीठ पीछे सिर्फ धोखा पाऐगा।।1।।   मैंने बोला पंडित कोई तो उपाय होगा, यूँ डराओ न मुझको, मेरे कष्टो का निवारण दो न।।2।।   अब पंडित फिर कुंडली पढता है, हाथो की अंगुलियो पर सारे तारे गिनता है। कुछ देर गहन चिंतन में खो जाता है, फिर नींद से जाग कर एक समाधान बताता है।। पुत्र शनि की समस्या है तो शनिवार का व्रत करो, अन्न जल त्याग कर प्रभु को प्रसन्न करो। फिर किलो भर घी-तेल मुझे भी दो, इक्कीस शनिवार तक ये उपाय दोहराते रहो।।3।।   मैंने उत्सुकतावश पूछा इस उपाय से मेरे कष्ट तो मिट जाएंगे? पंडित मन्द मन्द मुस्कुराया, तेरे कष्टो का पता नही मेरे घर जरूर भर जाएंगे।।4।। ***नि-3***

मैं मेरे जैसा

मैं मेरे जैसा मैं कहता हूँ, देवी जी, थोड़ा मुझको मेरे जैसा तो रहने दो? पत्नी देवी ताने देती मुझको रोज-रोज ही……. कवर फिसल जाती है जब सोफे पे बैठो तो, चादर मुड़ जाती है जब बिस्तर पे लेटो तो, बस पूछो मत, बिगर जाती है तकिए की हालत तो… मैं कहता हूँ, देवी जी, थोड़ा मुझको मेरे जैसा तो रहने दो? गिन-गिन कर ताना देती फिर आदतों पर…… बिस्तर पर ही रख छोड़ेंगे, गीले तौलिए को, कपड़े गंदे कर ही लेंगे जब खाना खाए तो, लेटे-लेटे ही बस फरमाएंगे, ए जी चाय पिलाओ तो… मैं कहता हूँ, देवी जी, Continue reading मैं मेरे जैसा

वो करती क्या? गर साँवला रंग न मेरा होता….!

वो करती क्या? गर साँवला रंग न मेरा होता….! रंग साँवला मेरा, है प्यारा उनको, वो करती क्या? गर साँवला रंग न मेरा होता……! शायद!…..शायद क्या? सही में….. पल पल वो तिल तिल मरती, अन्दर ही अन्दर जीवन भर घुटती, मन पर पत्थर रखकर वो जीती, विरक्ति जीवन से ही हो जाती, या शायद वो घुट घुट दम तोड़ देती! शायद!…..शायद क्या? सही में….. पलकें अपलक उनकी ना खुलती, भीगी चाँदनी में रंग साँवला कहाँ देेखती, पुकारती कैसे फिर अपने साँवरे को, विरहन सी छंदहीन हालत होती, शायद जीवन ही सारी पीड़ा मय होती! शायद!…..शायद क्या? सही में….. नैनों से Continue reading वो करती क्या? गर साँवला रंग न मेरा होता….!

विवाहित की पहचान (व्यंग)

हम पर ही क्यों इतनी बंदिश लगाई जाती है l माँग में सिन्दूर और चुटकी पहनाई जाती है ll हम तो दूर से ही शादीशुदा नज़र आते है l पुरुष शादीशुदा होकर भी कुंवारा बताते है ll कोर्ट ने महिलाओ के फरमान पर किया ऐलान l शादीशुदा पुरुषों पर लगेगा “सूरज” का निशान ll जिससे ये निशान पुरुषों में दूर से नज़र आएगा l और पुरुष अपने को कुंवारा नहीं बता पाएगा ll एक पुरुष के दिमाग में खुरापाती ख्याल आया l उसने माथे से “सूरज” के निशान को मिटाया ll पराई नारी को बिना किसी डर के छेड़ने लगा Continue reading विवाहित की पहचान (व्यंग)

रंग बदलना (व्यंग)

मेट्रो में सवारी करने का मिला मौका l उसमे चल रहा था ठंडी हवा का झॉका l स्टेशन आया रुकी गाड़ी, डोर खुला l और तभी चढ़ी कुछ अबला नारी l तभी हो गयी मुझसे एक गलती भारी l एक नारी को महिला कहकर क्या बुलाया l उसका चेहरा गुस्से से तमतमाया ll बोली ……………………………… क्या मै तुम्हें महिला नजर आती हूँ l मेरी उम्र ही क्या है अभी तो मै l खुद एक बच्ची नज़र आती हूँ ll मै बोला ……………………….. माफ़ करना महिला कहकर नहीं बुलाऊंगा l सबको अपने से कम उम्र का ही बताऊंगा ll समय बिता……………………………. Continue reading रंग बदलना (व्यंग)

सोचे मीनाक्षी

पत्नी भी भागे ऑफिस, पति देव भी दौड़े ऑफिस लिए सपने आंखों में, बच्चों का फयूचर बन जाएगा साय: होते ही आंखो के तारे, प्यारे निहारे सारी गलियां मां के आंचल से लगकर बातों का जमघट लग जाएगा हाय टूटे मन-तन से आते हुए घर पर सोचा न था स्ट्रेस सारा बच्चों पर बरस जाएगा अब तो सोचे मीनाक्षी छोड़ो, दौड़ाभागी प्रतिदिन की ऐसे तो प्रेसेंट हमारा विषैला बन जाएगा———————— तू भी बैठे कुर्सी पे, मैं भी बैठुं कुर्सी पे बड़े छोटे होने से, क्या हांसिल हो जाएगा नौकर हूं मैं सरकारी तो तू भी हैं सरकारी नौकर अफसर बनने Continue reading सोचे मीनाक्षी

कमियों को छिपाते

कुछ को देखा अपनी कमियों को छिपाते बेतुके सवालों से अपना अहम जताते बेवजह उलझ कटु शब्द अपनाते गलती पर सीनाजोरी आजमाते उन्हें क्या कहें जो समझ नासमझ बन जाते हर एक बात पर मरने मारने पे आते वहम उन में लोग उनसे ख़ौफ़ खाते पर मानते नहीं आवारा को मुंह नहीं लगाते भोंकने वाले विशेष जानवर ही कहलाते अगर उपर से काट खाने वाले होते दूर से ही लोग अपना रास्ता बनाते जिनके लिए लिखा वह अगर समझ पाते चलो अच्छा होता कम से कम कुछ बच जाते पर फितरत उनकी जरूर इस पर भोंकेगें, जानते सजन