सवाल

सवाल सवाल यह नहीं कि हर सवाल का जबाब ढूढ़ ही लिया जाय सवाल यह भी नहीं कि सवाल किन-किन हालातों से पैदा हुए हों सवाल यह है कि कील की तरह सवाल आखों में जब चुभने लगे सपने लहूलुहान हो जाय तब कोई तो हो जो अनगिनत हाथों की ताकत बन जाय धक्के मार कर बंद दरवाजों को तोड़ दे जबाब बाहर निकालें सपनों को मरने से बचा ले

खेल का मैदान

खेल का मैदान रचा जा रहा षड्यंत्र मासूम बच्चों के खिलाफ़ कच्चे घड़ों को बंदूक की शक्ल में ढाला जा रहा हैं खिलौनों में भरे हैं विस्फोटक पदार्थ सिरफिरे कर रहे ऐलान माँ की लोरियाँ गाई न जाए सुनो, धमाके का शोर घर-बाहर ,हर ओर सुरक्षित  नहीं बचपन किन्तु ,बच्चे मानते कहाँ होते हैं बड़े शरारती किसी भी हालात में चुप नहीं बैठ सकते घरों में दुबकने को कतई नहीं तैयार किसी न किसी दिन ढूढ़ ही लेंगे खेल का मैदान जहां – लहू के कतरे नहीं मजहब की पाबंदियाँ नहीं नस्ल का भेदभाव नहीं बस केवल गूंजेगी खिलखिलाने की Continue reading खेल का मैदान

मिथ्या अहंकार

मिथ्या अहंकार बिखरे पड़े हैं कण शिलाओं के उधर एकान्त में, कभी रहते थे शीष पर जो इन शिलाओं के वक्त की छेनी चली कुछ ऐसी उन पर, टूट टूटकर बिखरे हैं ये, एकान्त में अब भूमि पर । टूट जाती हैं ये कठोर शिलाएँ भी घिस-घिसकर, हवाओं के मंद झौकों में पिस-पिसकर, पिघल जाती हैं ये चट्टान भी रच-रचकर, बहती पानी के संग, नर्म आगोश मे रिस-रिसकर। शिलाओं के ये कण, इनकी अहंकार के हैं टुकड़े, वक्त की कदमों में अब आकर ये हैं बिखरे, वक्त सदा ही किसी का, एक सा कब तक रहता, सहृदय विनम्र भाव ने Continue reading मिथ्या अहंकार

फिर दैदीप्य हुआ पूर्वांचल

फिर दैदीप्य हुआ पूर्वांचल फिर दैदीप्य हुआ पूर्वांचल, प्रखर भास्कर ने पट हैं खोले, लहराया गगण ने फिर आँचल, दृष्टि मानस पटल तू खोल, सृष्टि तू भी संग इसके होले। कणक शिखर भी निखर रहे है, हिमगिरि के स्वर प्रखर हुए हैं, कलियों ने खोले हैं घूंघट, भँवरे निकसे मादक सुरों संग, छटा धरा का हुआ मनमोहक। प्रखरता मे इसकी शीतलता, रोम-रोम मे भर देती मादकता, विहंगम दृष्टि फिर रवि ने फैलाया, प्रकृति के कण-कण ने छेड़े गीत, तज अहम् संग इनके तू भी तो रीत।

शांति ! ॐ शांति !!

शांति ! ॐ शांति !! किसी रोते हुए चेहरे को  हँसा कर तो देखो l किसी भूखे को खाना खिला  कर तो  देखो ll किसी  बेसहारे को  गले  लगाकर तो  देखो l किसी भटके हुए को राह दिखाकर तो देखो ll वो मिल जायेगा जिसके लिए  भटकते हो l वो मिल जायेगा जिसके  लिए तड़पते  हो ll वो मिल जायेगा जिसकी कामना करते हो l वो मिल जायेगा जिसकी साधना करते हो ll आखिर वो क्या है  जिसकी  हर को चाह है l जिसके बिना जिंदगी एक नरक सी राह है ll उसके बिना तो जिंदगी में रहती है अशांति Continue reading शांति ! ॐ शांति !!

मेरी कविता

मेरी कविता पीढ़ियों की बन गई गहरी जो खाईयाँ दूरियां पाट देती है मेरी कविता बुझ रहे जहाँ उम्मीद के दीये तेल में डूबी लौ है मेरी कविता भूलें अपनों को व्यस्तता की दौर में याद दिलाती है उन्हें मेरी कविता सो रहा है ज़मीर जिनका झकझोर कर उठाती है मेरी कविता खो गए जो गुमनामियों की गलियों में ढूढ़ कर सामने लाती है मेरी कविता कह नहीं पाते जो जमाने के सामने बुलंद आवाज उनकी बनाती है मेरी कविता लड़खड़ाते हैं जिनके पाँव चंद क़दमों में हाथ थाम कर सहारा देती है मेरी कविता कोई बच्चे तरसे न खिलौने Continue reading मेरी कविता

गीत अपाहिज-सा यह मेरा

गीत अपाहिज-सा यह मेरा अधरों तक ही चल पाता है बन प्रार्थना विकल्प रूप-सा आँसू बनकर ढ़ल जाता है ।   शब्दों की बैसाखी पाकर बात अधूरी कह पाता है और भिखारी-सा बेचारा ठोकर ही हर पल खाता है   अर्थ ढूँढ़ता अंधे युग में अक्षर मन को छल जाता है गीत अपाहिज-सा यह मेरा अधरों तक ही चल पाता है ।   मन में, उर में पीड़ा के स्वर बिखर बिखरकर रह जााते हैं कहने को ज्यों बादल आते गरज गरजकर उड़ जाते हैं   प्यासे चातक-सा तब हारा गीत बिचारा छल जाता है गीत अपाहिज-सा यह मेरा अधरों Continue reading गीत अपाहिज-सा यह मेरा

गतवर्ष-नववर्ष

गतवर्ष-नववर्ष बीत चला है अब गतवर्ष, कितने ही मिश्रित अनुभव देकर, आश-निराश के पल कितने ही, ले चला वो दामन में अपनी समेटकर। जा रहा वो हमसे दूर कही, फिर ना वापस आने को, याद दिलाएगा हरपल अपनी वो, बीते लम्हों की भीनी सी सौगातें देकर। रुनझुन करती आई थी वो, पहलू में हर जीवन के संग खेली वो, कहीं रंगोली तो कहीं ठिठोली, कितने ही रंगों संग हो ली वो हँसकर। सपने कितने ही टूटते देखे उसने, अपनों का संग कितने ही छूटते देखे उसने, पर निराश हुआ ना पलभर को भी वो, नवजीवन ले झूमा फिर वो आशा Continue reading गतवर्ष-नववर्ष

चेतावनी

चेतावनी अमन चहाता  है भारत, नहीं चहाता  है  लड़ाई, प्रगति करो, जंग नहीं, जंग से होती है तबाही, देख लिया  कयी बार लड़कर, क्या मिला हार कर, देख ली होगी भारत की शक्ति, मंथन और विचार कर। संबल जा अभी भी पाकिस्तान वरना फिर पछतायेगा, शंकर खोलेगा तीसरा नेत्र, फिर प्रलय मचायेगा। भाड़े के सैनिक लेकर, युद्ध नहीं किये जाते, शस्त्रों की फीख माँगकर, रण नहीं है जीते जाते। क्या सोजते हो हम डर जाएंगे, तुम्हारे परमाणु हथियारों से, काशमीर नहीं मिलेगा तुम्हे, धर्म जेहाद के नारों से। देखा अगर तिरंगे की ओर, नाम तक मिट जायेगा, शंकर खोलेगा तीसरा Continue reading चेतावनी

एक सच्चाई

एक सच्चाई जो दिखता है वो होता नहीं l जो होता है वो दिखता नहीं ll सच भी किसी से छुपा  नहीं l सच के आगे झूठ टिका नहीं ll जो आयेगा एक दिन जायेगा l जो जायेगा फिर वो आयेगा ll विधाता ने लिखा  है ये लेख l इसे कोई नहीं मिटा पायेगा ll आत्मा में परमात्मा समाई हैl पत्थर में ईश्वर की परछाई है ll कर्मो का फल जरूर मिलता है l यही जीवन की एक सच्चाई है ll जो  जैसा  करता  है,  वैसा पाता है l स्वर्ग, नरक यही भोग कर जाता हैll समय  है,  अच्छे कर्म Continue reading एक सच्चाई

पलने दो ख्वाब

पलने दो ख्वाब चुप से हैं कुछ ख्वाब, कुछ इनको कह जाने दो…. गहरी सी दो आँखों में, ख्वाबों को पलने दो, कुछ रंग सुनहरे मुझको, ख्वाबों मे भर लेने दो, तन्हाई संग मुझको, इन पलकों में रह लेने दो, बुत बना बैठा हूँ, ख्वाब जरा बुन लेने दो…. गहरी सी हैं दो आँखें, डूब न जाए ख्वाब मेरे, इन चंचल से दो नैनों में, टूट न जाए ख्वाब मेरे, पलकें यूँ न मूंदो, कहीं सो जाए न ख्वाब मेरे, ख्वाब नए हरपल, जरा साँसों में पिरोने दो….. सतरंगी से कुछ ख्वाब, इन्द्रधनुष बन छाने दो, कहीं टूटे ना ये Continue reading पलने दो ख्वाब

इंसान की कीमत

इंसान की कीमत यहाँ  इंसान को  नहीं, पैसे को पूजा जाता है l पैसों से  ही यहाँ  इंसान  को  आक़ा जाता है ll बिन पैसों के इंसान की कीमत कुछ भी नहीं l जीता है जिंदगी पर घुट – घुट के ज़ी पाता हैll यहाँ इंसान को  नहीं पत्थर  को पूजा जाता है l भूखे को नहीं पत्थर को भोग लगाया जाता है ll जहाँ गरीब की  शादी  में देने में हाथ खिंचते है l वही पत्थर पर पैसे और जेवर चढ़ाया जाता है ll यहाँ पालतू कुत्ते को ज्यादा प्यार किया जाता है l इंसान से  ज्यादा कुत्ते  से Continue reading इंसान की कीमत

परिश्रम -सफलता की कुँजी

परिश्रम -सफलता की कुँजी सपने  तभी  पूरे हो पाते है l जब परिश्रम किये जाते है ll बिन परिश्रम कोई भी इंसा l सफल कभी नहीं हो पाते हैll एक   नन्ही  सी  चींटी  कैसे l दाना – दाना  करके  लाती  हैll थक  जाये  पर  हार  ना  माने l परिश्रम हमें करना सिखाती है ll ची – ची  करती  चिड़िया रानी l तिनके जोड़ खोसला बनाती है ll हवा में तिनके बिखर भी जाये l फिर कोशिश करना सिखाती है ll आलस  से  ना  हो  पूरे  सपने l सपने ,  सपने  ही  रह जायेंगे ll परिश्रम है सफलता की कुंजी Continue reading परिश्रम -सफलता की कुँजी

नववर्ष 2017 की शुभकामनायें

नववर्ष 2017 की शुभकामनायें गया दिसम्बर आया जनवरी लेकर नया साल l हम वो गलती सुधारे जो हुई थी पिछले साल ll बदली तारीख,बदला महीना, फिर बदला साल l डिजिटल इंडिया अपनाये बदलेगा देश का हाल ll हर नए पल के साथ हम कुछ नया कर दिखाए l ईर्ष्या ,बैर भुलाकर सबको प्यार से गले लगाए ll नए साल की खुशियाँ हममें नई उमंग जगाती है l मेहनत व ईमानदारी से आगे बढ़ना सिखाती है ll बीते वर्ष सुखः दुःख के भवर में नैय्या डगमगाई l भूल जाओ पुरानी बातें अब नई सोच जगमगाई ll माना नोटबंदी से  आम जनता Continue reading नववर्ष 2017 की शुभकामनायें