अभियंता – एक ब्रम्हपुरुष

अभियंता-एक ब्रम्ह पुरुष हे ब्रम्हा पुरुष अभियंता तूने जगत का उद्धार किया । महाकाल बनकर हर विनाश का प्रतिकार किया ।। तेरी परीकल्पना से भुत भविष्य सब निर्भर है । हे विश्वकर्मा के मानस अक्श तेरी सिंचन से जग निर्झर है ।। पत्थर तोड़ लोहा बनाते पारस बन कुंदन । खुशबु बन जग को महकाते घिसकर तुम चन्दन ।। माटी बन कुम्हार का तूने हर मूरत को गढ़ा है । शिलालेख पर आलेख बनकर पंचतत्व को पढ़ा है।। बनकर ऊर्जा पुंज तूने किया राष्ट्र का विकास । मंगल पर पद चिन्ह बनाया । पहुचकर दूर आकाश ।। कर्तव्यनिष्ठा पर संकल्पित Continue reading अभियंता – एक ब्रम्हपुरुष

मेरी प्यारी हिंदी

मेरी प्यारी हिंदी लिखने में हैं सबसे सरल दिखने में दुल्हन सी सुंदर माथे पर हैं प्यारी बिंदी सबकी सखी हैं मेरी हिंदी सबसे प्यारी मेरी हिंदी शब्दों में हैं मधु सी मिठास अलंकारों से रहती अलंकृत शृंगारों से रहती श्रृंगारित दुल्हन सी लगती मेरी हिंदी सबसे प्यारी मेरी हिंदी देवनागरी हैं इसकी लिपि संस्कृत हैं इसकी जननी साहित्य हैं इसका निराला कवियों की हैं जान हिंदी सबसे प्यारी मेरी हिंदी

चिंता और चिंतन

चिंता और चिंतन ना दिल को सुकून है,ना दिमाग को आराम है l हर कोई चिंतित है, हर कोई यहाँ परेशान है ll चिंता इंसान के दिलो दिमाग पर छा रही है l चिंता की ये लकीरे, साफ नज़र आ रही है ll चिंता स्वयं नहीं आती,  हम ही उसे बुलाते है l जब जरूरत से ज्यादा अपनी इच्छा जताते है ll बुरा नहीं अपनी इन इच्छाओ को पंख लगाना l बुरा है इसे पूरा करने में दूजे को हानि पहुंचना ll करना  है तो चिंता नहीं,  चिंतन  करो मेरे  भाई l चिंता से अशांति जन्मे,चिंतन से आत्मबुद्धि आई ll Continue reading चिंता और चिंतन

गाओ फिर गीत वही

गाओ फिर गीत वही   गाओ फिर गीत वही जो उस दिन गाया था मेघों की पलकों जो भादों भर लाया था   मेरे मन को बहलाने की घावों को भी झुटलाने की छन्दों से मत कोशिश करना बिखरे शब्दों को मत तजना गाओ बस गीत सदा जो दिल तेरा गाता था गाओ फिर गीत वही जो उस दिन गाया था   पीड़ा की आँधी से डरकर लहरों की टक्कर से बचकर नाव नहीं तुम खेना ऐसे यम से डरता मानव जैसे खंड़ित वीणा मैं ही ले उस दिन आया था गाओ फिर गीत वही जो उस दिन गाया था Continue reading गाओ फिर गीत वही

कठपुतली

कठपुतली जिंदगी में अनेको उतार-चढ़ाव आते है l जीतता है वही जो ये सब सह जाते है ll हर किसी का अच्छा समय आता है l धैर्य रखो बुरा समय भी काट जाता हैll मत करो घमंड, कभी अपने पैसो का l ये पैसा तो चलती फिरती धूप-छाँव है l आज अगर किसी ओर के पास है ये l तो कल ये किसी ओर का गुलाम है ll अहम् की आग में, ना जला करो l ना जाने कब ये, तुम्हे ही जला देगी l जिंदगी छोटी है,प्रेम प्यार से रहा करो l ना जाने कब मौत , गोद में Continue reading कठपुतली

गिरगिट और इंसान

गिरगिट और इंसान पल में अक्सर बदल जाता है मौसम l पल में अक्सर बदल जाता है इंसान ll यू ही बदनाम है गिरगिट रंग बदलने मे l रंग तो अक्सर बदलता है , ये इंसान ll जो दिखता है,  वो वैसा होता नही l जो होता है ,  वो हमे दिखता नही ll मन में क्या छुपा हैं,ये हमे पता नही l जो सोचे वैसा हो,ये ज़रूरी तो नही ll पल में माशा और पल में तोला l पल में सब कुछ बदल जाता हैं ll मानते हो जिसको दिल से अपना l कभी-कभी वो भी बदल जाता हैं Continue reading गिरगिट और इंसान

मेरे गीतों की आवाज

मेरे गीतों की आवाज मेरे  गीतों  की  आवाज जाने  कहाँ चली जाती है। सन्नाटों में  प्रतिध्वनित हो जाने कहाँ बिखर जाती है।   ढूँढ़  रहे हैं  वाद्यवृन्द भी कंपित  कोमल  कलियों में ढूँढ़ रहे हैं  महक सलोनी खिलती नाजुक पंखुरियों में   पूछें भ्रमरों से उनकी गुंजन जाने कहाँ सिमट  जाती है। मेरे  गीतों   की  आवाज जाने  कहाँ चली जाती है।   दूर गगन में  उड़ते  पंछी अपनी साँसों थाम सकें तो रंग-बिरंगी  पंख  खुले  से उड़ान अपनी थाम सकें तो   बैठ डाल पर उनसे  पूछें जाने कहाँ बिखर जाती है। मेरे  गीतों  की  आवाज जाने  कहाँ चली जाती Continue reading मेरे गीतों की आवाज

एक उम्मीद

एक उम्मीद जग ऐसा कोई बनाई दे सबको दोस्त से मिलाई दे रिश्तों से जो परेशान ना हों वो नूर आँखं पे चढा़ई दे गंगा-जमुना तहजीब में दिखे भाईचारे का जग बनाई दे मन्दिर मस्जिद में भेद काहे शंख अजा़ं साथ सुनाई दे ईद दिवाली एक सी मनाये आदाब मिले या बधाई दे होली हुड़दगं की मस्ती हो हर कोई अपना दिखाई दे सजन

सोचो, समझो और परखो

सोचो, समझो और परखो दिल में कुछ, जबान पर कुछ नज़र आता है l कौन अपना, कौन पराया समझ नहीं पाता हैl कब कौन पीठ में, छूरा घोप दे कुछ नहीं पता l कभी-कभी विश्वास-पात्र भी धोखा दे जाता है ll चंद पलो की मुलाकात से, पहचान नहीं सकते l किसी के दिल में क्या छिपा है जान नहीं सकते ll मन की भवरों को आसानी से यूँ अगर पढ़ पाते l शायद दोस्त कम यहाँ दुश्मन ज्यादा नज़र आते ll रूप -रंग से सुंदरता आक सकते हो  व्यक्तित्व नहीं l बंद जबान से चुप्पी आक सकते हो कडवडाहट नहीं Continue reading सोचो, समझो और परखो

उल्लास

उल्लास इशारों से वो कौन खींच रहा क्षितिज की ओर मेरा मन! पलक्षिण नृत्य कर रहा आज जीवन, बज उठे नव ताल बज उठा प्राणों का कंपन, थिरक रहे कण-कण थिरक रहा धड़कन, वो कौन बिखेर गया उल्लास इस मन के आंगन! नयनों से वो कौन भर लाया मधुकण आज इस उपवन! पल्लव की खुशबु से बौराया है चितवन, मधुकण थोड़ी सी पी गया मेरा भी यह जीवन, झंकृत हुआ झूमकर सुबासित सा मधुबन, जीर्ण कण उल्लासित चहुंदिस हँसता उपवन! इशारों से वो कौन खींच रहा क्षितिज की ओर मेरा मन!

सोचो ! अगर ये ना होता…

सोचो अगर ये रात ना होती, तो क्या होता l इंसा हर पल दो के चार, में ही लगा होता ll दिल को सुकून, ना दिमाग को आराम होता l इंसा परेशा है जितना और ज्यादा परेशा होताll सोचो अगर ये सूरज ना होता, तो क्या होता l बिन सूरज धरती पर जीवन संभव ना होता ll बिन सूरज पेड़-पौधे अपना भोजन न कर पातेl बिन पेड़-पौधों के फिर हम साँस भी न ले पाते ll सोचो अगर ये पेट ना होता, तो फिर क्या होता l ना कुछ खाना होता ना फिर कुछ कमाना होता ll ना इंसान दिन-रात Continue reading सोचो ! अगर ये ना होता…

दर्द

दर्द दूसरो का दर्द सिर्फ वो ही समझ पाता है l जो उस दर्द से कभी होकर गुजर जाता है ll जो उस दर्द को महसूस ना कर पाया हो l वो क्या खाक दूसरो का दर्द समझ पाता हैll दर्द यूँ हर किसी को बताया नहीं जाता है l बताया जाता है उसे जो दर्द समझ पाता हैll वर्ना आपका दर्द एक मज़ाक बन जायेगा l हल नहीं निकलेगा सिर्फ बवाल बन जायेगा ll अगर ना मिले दर्द सुनने वाला कोई अपना l ईश्वर से कहो मन हो जायेगा हल्का अपना l कम से कम ये बातें आगे नहीं Continue reading दर्द

होली आई रे

होली आई रे रंग बिरंगी लो आई होली l बिखरे चहु ओर रंग हज़ारl प्रेम प्यार का रंग लगाओ l आया फिर होली त्यौहार ll भेदभाव की दीवार गिराके l दुश्मनी भुला दो, मेरे यार l आओ मिलजुल कर खेलेl रंगों भरा होली त्यौहार ll रंगों भरी पिचकारी से हम l धो दे मन के मैल हज़ार l प्रेम प्यार से गले लगाकर l मनाये होली का त्यौहार ll रंग लगाये, ऐसे हम यूँ l ना रूठे कोई , इस बार l चेहरे पर मुस्कान आये l मुबारक  होली त्यौहार ll ————–  

चाह

यदि जो चाहे, वो आसानी से मिल जाये l तो पत्थर रुपी भगवान यूँ पूजा ना जाये ll और यदि इंसान, जीवन में कुछ ना चाहे l तो इंसान, इंसान नहीं भगवान बन जाये ll हर किसी की कोई  ना कोई चाह  होती है l क्योकि जहाँ चाह होती है वहीँ राह होती है ll राह के मिलने से मंज़िले नज़र आ जाती है l मेहनत करने से हर चाह पूरी हो जाती है ll चाह हो ऐसी,  जो दूजे को भी ख़ुशी दे पाए l चाह की चाहत में ना गलत  कदम उठाये ll चाह हमें जिंदगी में आगे Continue reading चाह

सवाल

सवाल सवाल यह नहीं कि हर सवाल का जबाब ढूढ़ ही लिया जाय सवाल यह भी नहीं कि सवाल किन-किन हालातों से पैदा हुए हों सवाल यह है कि कील की तरह सवाल आखों में जब चुभने लगे सपने लहूलुहान हो जाय तब कोई तो हो जो अनगिनत हाथों की ताकत बन जाय धक्के मार कर बंद दरवाजों को तोड़ दे जबाब बाहर निकालें सपनों को मरने से बचा ले