परिश्रम -सफलता की कुँजी

परिश्रम -सफलता की कुँजी सपने  तभी  पूरे हो पाते है l जब परिश्रम किये जाते है ll बिन परिश्रम कोई भी इंसा l सफल कभी नहीं हो पाते हैll एक   नन्ही  सी  चींटी  कैसे l दाना – दाना  करके  लाती  हैll थक  जाये  पर  हार  ना  माने l परिश्रम हमें करना सिखाती है ll ची – ची  करती  चिड़िया रानी l तिनके जोड़ खोसला बनाती है ll हवा में तिनके बिखर भी जाये l फिर कोशिश करना सिखाती है ll आलस  से  ना  हो  पूरे  सपने l सपने ,  सपने  ही  रह जायेंगे ll परिश्रम है सफलता की कुंजी Continue reading परिश्रम -सफलता की कुँजी

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नववर्ष 2017 की शुभकामनायें

नववर्ष 2017 की शुभकामनायें गया दिसम्बर आया जनवरी लेकर नया साल l हम वो गलती सुधारे जो हुई थी पिछले साल ll बदली तारीख,बदला महीना, फिर बदला साल l डिजिटल इंडिया अपनाये बदलेगा देश का हाल ll हर नए पल के साथ हम कुछ नया कर दिखाए l ईर्ष्या ,बैर भुलाकर सबको प्यार से गले लगाए ll नए साल की खुशियाँ हममें नई उमंग जगाती है l मेहनत व ईमानदारी से आगे बढ़ना सिखाती है ll बीते वर्ष सुखः दुःख के भवर में नैय्या डगमगाई l भूल जाओ पुरानी बातें अब नई सोच जगमगाई ll माना नोटबंदी से  आम जनता Continue reading नववर्ष 2017 की शुभकामनायें

मिलो दूर जाना है।

मिलो दूर जाना है। निराशा भरी काली रातों को, उम्मीद की रौशनी से रोशन करते जाना है। ये तो शुरुवात भर है मेरे सफर की, मुझे तो मीलो दूर जाना है।।1।। मैं दिया हूँ रोशन ही सही, मेरे हर तरफ उजियाला ही सही। मुझे अपने तल का अँधियारा मिटाना है, आखरी बून्द जब तक बची है जलते जाना है।। ये तो शुरुवात भर है मेरे सफर की, मुझे तो मीलो दूर जाना है।।2।। सादगी मेरे अंदर साँसों सी बसी है, आखरी सांस तक दुश्मन के भी गले मिलते जाना है। याद करे कोई मुझे बाद मेरे, मैं इतना भी महान Continue reading मिलो दूर जाना है।

500,1000 रुपए के नोट

500,1000 रुपए के नोट मोदी जी ने टीवी पर ये फरमान सुनाया l 500,1000 रुपए का नोट बंद करवाया ll छुपाया था कभी पत्नी ने पति से जो पैसा l वो भी निकल कर पति के सामने आया ll खबर सुनकर पत्नी, पति पर यू चिल्लाई l कहा था क्यों नहीं पहले अंगूठी दिलाई ll अब अपने इन नोटों की माला बनाना l म्यूजियम में रखकर धुप-बत्ती दिखाना ll भिखारी को 500 रु का नोट सरकाया l मेरा हाथ पकड़, वो मुझ पर चिल्लाया ll साहब! वो नोट दे जो कही चल तो पाए l नहीं है,तो मेरे साथ ही Continue reading 500,1000 रुपए के नोट

पटाखों को ना कहें

पटाखों को ना कहें दिवाली पर वो बड़े-बड़े बम छुड़ा रहे थे l बम छुड़ाते समय देख बहुत इतरा रहे थे ll हमने कहा ………………………………. आप में बहुत हिम्मत है हम ये जान गए l आप खतरों से खेलते है हम पहचान गए ll आप अपनी शक्ति को यूँ व्यर्थ ना गवाये l सरहद पे जाकर दुश्मन के छक्के छुड़ाए ll ऐसे तो आप अपने पैसो में आग लगाएंगे l दुश्मन को ढेर करो तो मैडल मिल जायेगे ll आप पटाखे छुड़ाकर जो धुंआ फैला रहे है l अनजाने में आप स्वयं बीमारी बुला रहे है ll हम तभी खुशियो Continue reading पटाखों को ना कहें

पहले तोलो, फिर बोलों

पहले तोलो, फिर बोलों कैसे वो बिन सोचे कुछ भी कह जाते है l बिन हड्डी की वो , ज़बान चला जाते है ll हर किसी का वो यूँ ही मज़ाक बनाते है l अपनी बारी पर,वो यूँ गुस्सा हो जाते है ll अच्छा है बोलना, हमें बोलना चाहिए l बोलने से पहले , हमें तोलना चाहिए ll तीखे शब्दों के बाण दिल चिर जाते है l जिंदगी भर का , गमे दुःख दे जाते है ll आसान है किसी को पराया बनाना l मुश्किल है अपनों को जोड़ पाना ll ऐसा बोलों जो दिल को छू जाये l रोते Continue reading पहले तोलो, फिर बोलों

अक्षरदीप जलाना है

अक्षरदीप जलाना है जो सिसकी सी होती है जो दुबकी सी होती है जो अटकी सी होती है जो भटकी सी होती है उनको साक्षर बनाना है अक्षरदीप जलाना है जो सिमटी सी होती है जो चिमटी सी होती है जो लिपटी सी होती है जो पलटी सी होती है उनको साक्षर बनाना है अक्षरदीप जलाना है जो लुढ़की सी होती है जो ऊढ़की सी होती है जो फटकी सी होती है जो लटकी सी होती है उनको साक्षर बनाना है अक्षरदीप जलाना है जो धँसती सी होती है जो फँसती सी होती है जो थमती सी होती है जो Continue reading अक्षरदीप जलाना है

सुई

सुई लम्बी, पतली, चमकीली किन्तु मजबूत इस्पाती चुभन लिये, देखती हूँ तुम्हारे निस्तेज थकी आँखों में घात-प्रतिघात के निशान घायल, हतोत्साहित और शंकालु तुम जैसे कोई षड्यंत्र के चक्रव्यूह में घिरे हो हर किसी पर शक की सुई घुमाते अपनों परायों के बीच पेंडुलम सा हिलता डूलता तुम्हारा आत्मविश्वास खंडित होता व्यक्तित्व डरे सहमें निढाल से तुम तनिक ठहरों तन-मन को दुरुस्त करती सुई हूँ मैं विभाजित होते अस्तित्व को सिल सकती हूँ मैं मेरे इस प्रयास में हर कदम पर मिलेगी अनोखी सी चुभन सहन कर सको तो करो धैर्य की परीक्षा है तुम्हारी काल की सहचरी मैं क्षण-क्षण Continue reading सुई

कैंची

कैंची सृजन और विनाश के दोनों छोरों को मजबूती से सँभालते संतुलन के पेंच में कसे चुस्त-दुरुस्त तुम एक कैंची सर्जन के हाथ बन अवांछित, रोगग्रस्त मांस-मज्जा त्वचा की काट-छाट कर रक्त रंजित हो लम्बी थकान के बाद स्वास्थ्य प्रदान कर रख दिए जाते किसी ट्रे पर शिशु की गर्भनाल विच्छेदित कर स्वतंत्र अस्तित्व का प्रथम क्रंदन सुनते सृजन को साकार देखते गौरान्वित होते दरजी के सधे हाथों में फसे वस्त्रों पर खिंची रेखाओं से ताल मिलाते फुर्ती से काटते और बनती कई पोशाकें तन का नंगापन ढकते, सुन्दरता प्रदान कर सभ्यता की ओर आगे कदम बढ़ाते नाई/ब्यूटीशियन के हाथों Continue reading कैंची

अर्जुन विषाद

अर्जुन विषाद युद्ध में रत स्वजनों को देखते हुए अर्जुन करुणा से अतिव्याकुल हुए मुख सूखे शरीर रोमांच से कंपित हुए अंग सारे उस क्षण मानो शिथिल हुए तन जलता मन भ्रमित है  खड़ा रहने में असमर्थ है दृश्य न देखा जाता है हाथ से गांडीव फिसलता है अपनों का युद्ध में वध करूँ व्यर्थ क्यूँ सारे प्रयत्न करूँ कल्याण न कोई दिखता है अर्जुन का ह्रदय पिघलता है चाहे मिल जाए त्रिलोक्य राज्य  कुटुम्ब सभी को मार ना पाऊँगा  पृथ्वी मात्र के लिए फिर क्यों  ऐसा क्या मैं कर पाऊँगा न मैं चाहूँ सुख और राज्य न मैं चाहता Continue reading अर्जुन विषाद

रंग

रंग रंगों की दुनिया से एक खबर लाई है, ये नमकीन हवाएँ उसे छूकर आई है। गुलाल उसके हाथों में और गुलाबी दिखता है, मुझे तो हवाओं का मिजाज भी शराबी दिखता है। रंगों के बहाने काश एक बात हो जाए, उनसे मुद्दतों बाद एक मुलाक़ात हो जाए। उसके रंग से रंगों को रंगीन कर देते हैं, जो अपनी आहट से ही मौसम को हसीं कर देते है। कोई तो लाओ वो रंग मेरी जिंदगी में जो उसकी नाजुक मुस्कान से बहा करते थे उसके रंगीन चिरागों का कुछ ऐसा जलवा था हम दीवाली को भी होली समझा करते थे।

प्रदूषण

प्रदूषण धूल, धुंआ और गन्दा पानी l शोर मचाकर करे शैतानी ll रूप बदलकर जो आता है l वो प्रदूषण ही कहलाता है ll चिमनी का गंदा धुंआ छाये l साँस लेने में परेशानी आये ll धूल व धुंआ उड़ाती गाड़ियां l लाती फेफड़ो की बीमारियां ll इस रूप में जो आता है l वायु प्रदूषण कहलाता है ll पानी में जब कूड़ा बहाये l इससे पानी गन्दा हो जाये ll फिर पीने के काम ना आये l ये ही जल प्रदूषण कहलाये ll लाउडस्पीकर पर शोर मचाना l बिन वजह फिर हॉर्न बजाना ll कानों को जब शोर ना Continue reading प्रदूषण

झाड़ू

झाड़ू हाँ मैं झाड़ू मेरी अनिवार्यता आवश्यकता की सतत मांग है सड़कों से गलियों तक आँगन से छत तक प्रतिदिन कर्तव्य निर्वहन कर पड़ा रहता किसी कोने में अमीरों की अट्टालिकाओं में गरीबों की झोपड़ियों में बिखर गया तो तिनका-तिनका सिमटा तो एकता का संबल झुक कर चला तो स्वच्छता की पहचान विकसित देश की शान ऊपर उठा तो हुंकार विरोधियों को परास्त करता शक्तिशाली प्रचण्ड प्रहार हर धर्म स्वीकार्य है साम्प्रदायिकता को ठेंगा दिखाता रोज इबादत करता धार्मिक स्थलों के चौबारों पर साफ कर सकता हूँ अन्दर–बाहर पड़ी धूल और गंदगी दूर कर संक्रमित विकारों को निभा सकता हूँ Continue reading झाड़ू

प्रेरणाशीष

प्रेरणाशीष प्रेरणाशीष मंगलकामना आपका प्रेरणाशीष शिरोधार्य, प्रशंसा पाता रहूँ करता रहूँ मंगल कार्य, योग्य खुद को बनाऊँ, रहूँ आपको स्वीकार्य। कृपा सरस्वती की बरसती रहे, आपके घरों में लक्ष्मी भी हँसती रहें, जीवन के उच्च शिखरों मे आप नित चढ़ते रहे। जीवन प्रगति पथ पर आरूढ़ हो, धन धान्य सुख से जीवन कलश पूर्ण हो, सफलता की नई सीढ़ियाँ सबों को मिलती रहे। मैं युँ ही सांसों पर्यन्त लिखता रहूँ, मेरी रचनाएँ जीवन की कलश बन निखरे, मार्गदर्शन करें ये सबका, मेरा जीवन सफल करे।

क्षण भर को रुक ऐ जिन्दगी

क्षण भर को रुक ऐ जिन्दगी रुक जा ऐ जिन्दगी, जरा क्षण भर को पास तू ……. क्षम भर को ऐ जिन्दगी पहलू में आ मेरे, सँवार दूँ मैं उन गेसुओं को बिखरे से जो हैं पड़े, फूलों की महक उन गेसुओं मे डाल दूँ, उलझी सी तू हैं क्यूँ? इन्हें लटों का नाम दूँ, उमरते बादलों सी कसक इनमें डाल दूँ….. रुक जा ऐ जिन्दगी, जरा क्षण भर को पास तू ……. क्षण भर को रुक जा ऐ जिन्दगी, तेरी पाँवों में गीत भरे पायल मैं बाँध दूँ, घुघरुओं की खनकती गूँज, तेरे साँसों में डाल दूँ, चुप सी Continue reading क्षण भर को रुक ऐ जिन्दगी