विरहन का विरह

विरहन का विरह पूछे उस विरहन से कोई! क्या है विरह? क्या है इन्तजार की पीड़ा? क्षण भर को उस विरहन का हृदय खिल उठता, जब अपने प्रिय की आवाज वो सुनती फोन पर, उसकी सिमटी विरान दुनियाँ मे हरितिमा छा जाती, बुझी आँखों की पुतलियाँ में चमक सी आ जाती, सुध-बुध खो देती उसकी बेमतलब सी बातों मे वो, बस सुनती रह जाती मन मे बसी उस आवाज को , फिर कह पाती बस एक ही बात “कब आओगे”! पूछे उस विरहन से कोई! कैसे गिनती वो विरह के इन्तजार की घड़ियाँ? आकुल हृदय की धड़कनें अगले ही क्षण Continue reading विरहन का विरह

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पुकारता मन का आकाश

पुकारता मन का आकाश पुकारता है आकाश, ऐ बादल! तू फिर गगन पे छा जा! बार बार चंचल बादल सा कोई, आकर लहराता है मन के विस्तृत आकाश पर, एक-एक क्षण में जाने कितनी ही बार, क्युँ बरस आता है मन की शान्त तड़ाग पर। घन जैसी चपल नटखट वनिता वो, झकझोरती मन को जैसे हो सौदामिनी वो, क्षणप्रभा वो मन को छल जाती जो, रुचिर रमणी वो मन को मनसिज कर जाती जो। झांकती वो जब अनन्त की ओट से, सिहर उठता भूमिधर सा मेरा अवधूत मन, अभिलाषा के अंकुर फूटते तब मन में, जल जाता है यह तन Continue reading पुकारता मन का आकाश

फिर मिलेंगे हम

फिर मिलेंगे हम फिर मिलेंगे हम समुंद्र की लहरों पर समर्पण की नाव पर सवार अपने अपने आसुओं को विसर्जित करेंगे सदा के लिए विरहा की अग्नि से पिघला सूरज यादों के घनीभूत जलवाष्प बन कर बादल सा बरसेंगे होगी धरा सिंचित बीज होगा अंकुरित प्रेम पुष्प खिलेंगे सुगन्धित पवन उड़ा ले जायेंगे प्रेम का सन्देश फूलों और तितलियों के रंगों में घुल मिल मनोरम छटाएँ बिखेरेंगे गायेंगे झूम-झूम कर मिलन के गीत एक दूजे से जो पाया था पूनम की रातों में चांदनी बन बाटेंगे और एक दिन चमकते सितारे बन अपनी ही धुरी पर घूमते प्रेम धुन में Continue reading फिर मिलेंगे हम

धुँधला साया

धुँधला साया आँखों मे इक धुंधला सा साया, स्मृतिपटल पर अंकित यादों की रेखा, सागर में उफनती असंख्य लहरों सी, आती जाती मन में हूक उठाती। वक्त की गहरी खाई मे दबकर, साए जो पड़ चुके थे मद्धिम, यादें जो लगती थी तिलिस्म सी, इनको फिर किसने छेड़ा है? यादों के उद्वेग भाव होते प्रबल, असह्य पीड़ा देते ये हंदय को, पर यादों पर है किसके पहरे, वश किसका इस पर चलता है। स्मृतिपटल को किसने झकझोरा, बुझते अंगारों को किसने सुलगाया, थमी पानी में किसने पतवार चलाया, क्युँकर फिर इन यादों को तूने छेड़ा ?

बेकरारियाँ

बेकरारियाँ अब कहाँ दिखते हैं वो बेकरारियाें के पल, जाम हसरतों के लिए कभी दूर वो जाते थे निकल, क्या रंग बदले हैं मौसम ने, अब वो भी गए हैं बदल? पल वो मचलता था उन बेकरारियों के संग, अंगड़ाईयाँ लेती थी करवटें उनकी यादों के संग, अब बिखरा है वो पल कहीं, क्या वो भी रहे हैं बिखर? सुलग रही चिंगारियाँ, हसरतों के लगे हैं पर, जल रही आज बेकरारियाँ, पर वो तो हैं बेखबर, हम तो वो मौसम नहीं, यहाँ रोज ही जाते है जो बदल! क्या अब भी है वहाँ बेकरारियाें के बादल? सोंचता है ये बेकरार Continue reading बेकरारियाँ

बिन तेरे

बिन तेरे यादों की माचिस जली अरमानों की लकड़ी गीली विरहा की तपन से हुआ मन का आँगन धुँआ-धुँआ बिन तेरे फीके लगते मौसम सुहाने नींद चुराई रातों ने सपनों के टूटे सपने बेगाने हुए सभी अपने बिन तेरे उमड़-घुमड़ दुःख के बादल आसमान में बुँदे घायल आशाओं के चीथड़े आँचल सिसकियों की बजती पायल बिन तेरे आँखों में झील समाई इन्तजार की नाव डगमगाई असमंजस की लहरों में खोई बनी बाबरी जागी सोई बिन तेरे तक़दीर ने ली जम्हाई खुशियों को हिचकी आई कैसी यह उदासी छाई उम्मीदों को नींद आई रोती फफक-फफक तन्हाई बिन तेरे !

अधूरी पूजा उसकी

अधूरी पूजा उसकी उजड़ गया संसार उसका, बिछड़ गया एतबार जीवन का, छूट गई हाथों से आशा की पतवार, मन की गहराई के पार दफन हो गया, वो छोटा सा मोहक संसार। छोड़ गई दामन वो उसका, देवतुल्य था जो उसके जीवन में, टूट चुका है आज वो देव भी, वर्जनाओं को तोड़ हाथ जिसने थामा था, शायद वो निष्ठुर स्वार्थी ही थी, क्षितिज पार जाने की उसको जल्दी थी, रह गई अब शेष यादें ही। पर उस दुखिया का भी दोष क्या, शायद भाग्य उस देवता का ही खोटा था, दामन उस दुखिया का भी तो लूटा था, प्राणों Continue reading अधूरी पूजा उसकी

काश

काश काश! यादों के उस तट से गुजरे न होते हम…. रंग घोलती उन फिजाओं में, शिकवे हजार लिए अपनी अदाओं में, हाँ, पहली बार यूँ मिले थे तुम….. कशिश बला की उन बातों में, भरी थी शरारत उन शरमाई सी आँखों में, हाँ, वादे हजार कर गए थे तुम….. नदी का वो सूना सा किनारा, वो राह जिनपर हम संग फिरे थे आवारा, हाँ, उन्हें तन्हा यूँ कर गए थे तुम….. ढली सुरमई सांझ कभी रंगों में, कभी रातें शबनमीं तुझको पुकारती रहीं, हाँ, मुद्दतों अनसुनी कर गए थे तुम…. बातें वो अब बन चुकी हैं यादें, रह रह Continue reading काश

क्या महज कल्पना

क्या महज कल्पना क्युँ मैं हर पल सोचता हूँ बस तुमको ही, यह जानकर भी कि तुम महज इक कल्पना नहीं, इक स्वर, इक रूप साकार सी हो तुम, जागृत सपनों में रची बसी मूर्त स्वरूप हो तुम, विचरती हो कहीं न कहीं इन्ही हवाओं में, गाती हो धुन कोई इन्ही फिजाओं में, फिर भी, न जाने क्यूँ ढूंढता हूँ मैं तुम्हें ख्यालों में! क्यूँ ये मन सोचता है हर पल तुझको ही सवालों में? लगता है कभी, जैसे बिखरे से होंगे बाल तेरे, रख न पाती होगी खुद अपना ख्याल तुम, गुम सी हो चुकी हो, उलझनों में जिंदगी Continue reading क्या महज कल्पना

नादान बेचारी

नादान बेचारी सोच रही वो बेचारी, आखिर भूल हुई क्या मेरी? यूँ ही घर से निकल गया था वो अन्तर्मुखी, दर्द कोई असह्य सी, सुलग रही थी उस मन में छुपी! बिंध चुका था शायद, निश्छल सा वो अन्तर्मन, अप्रत्याशित सी कोई बात, कर गई थी उसे दुखी! स्नेह भरा दामन, फैलाया तो था उस अबला ने, रखकर कांधे पे सर, हाथों से सहलाया भी था उसने, नादान मगर पढ पाई ना, उसके अन्तर्मन की बातें, दामन में छोड़ गया वो, बस विरहा की सौगातें! मन में चोट लगे जो, वो घाव बड़ी दुखदायी, तन सहलाते मिटे न पीड़ा, नादान Continue reading नादान बेचारी

एक और इंतजार

एक और इंतजार रहा इस जनम भी, एक और अंतहीन इंतजार….! बस इंतजार, इंतजार और सदियों का अनथक इंतजार! इंतजार करते ही रहे हम सदियों तुम्हारा, कब जाने धमनियों के रक्त सूख गए, पलकें जो खुली थी अंतिम साँसों तक मेरी, जाने कब अधखुले ही मूँद गए, इंतहा इंतजार की है ये अब, तुमसे मिलने को पाया हमने ये जन्म दोबारा… रहा इस जनम भी लेकिन एक और अंतहीन इंतजार…! गिन न सके अनंत इंतजार की घड़ियों को हम, चुन न सके वो चंद खुशियाँ उन राहों से हम, दामन में आई मेरी बस इक तन्हाई, और मिला मुझको मरुभूमि Continue reading एक और इंतजार

पत्थर दिल

पत्थर दिल न जाने कब पत्थर हुआ, मासूम सा ये दिल मेरा….. हैरान हूँ मैं, न जाने कहां खोई है मेरी संवेदना? आहत ये दिल जग की वेदनाओं से अब क्यूँ न होता? देखकर व्यथा किसी कि अब ये बेजार क्यूँ न रोता? व्यथित खुद भी कभी अपने दुखों से अब न होता! बन चुका है ये दिल, अब पत्थर का शायद! न तो रोता ही है ये अब, न ही ये है अब धड़कता! न जाने कब पत्थर हुआ, मासूम सा ये दिल मेरा….. हैरान हूँ मै, न जाने कहां खोई दिल की मासूमियत? महसूस क्यूँ न अब ये Continue reading पत्थर दिल

अधूरी कहानी

अधूरी कहानी लौटाने थे आये, वो मेरे खत मुझे पूछा कि कैसे जिओगे, तो अल्फाज़ जैसे जल गये।। लिया जो हमनें हथेलियों में, मुखङा उनका आंखे रहीं गुमसुम, पर इकबारगी वो भी मचल गये।। पलकों में छुपा रहे थे, तसव्वुफ़-ए-शबनम हमसे इस कोशिश में वो मेरे ताउम्र के जज्बात कुचल गये।। पूछा जो हमनें बिखरी हुई जुल्फों का सबब दिखा किसी और के नाम की मेंहदी, वो सरे राह बदल गये।। कहते थे कि उनके वादे हैं, अबद-ऐ-आलम-अज़ीम हल्की सी धूप क्या पङी, बर्फ से भी जल्दी पिघल गये।। की जो हमने तस्दीक, कैसे थामा दामन-ए-गैर बङी मासूमियत से बोले, Continue reading अधूरी कहानी

तेरी याद

तेरी याद कहि किताबो में छुपे गुलाब, तो ग़ज़लो में तेरा नाम, मैंने शिद्दत से संभाली हुई है तेरी हर याद।।1।। तुम्हे याद तो होगा वो बाग़ जहां हम साथ वक़्त गुजारते थे। घंटो बैठ कर पास हम भविष्य के सपने बुना करते थे। मैंने उस बाग़ की कुछ मिट्टी अपने आँगन में सजाए रखी है, जिसके निचे दफ़न है मेरे सारे जज़्बात। मैंने शिद्दत से संभाली हुई है तेरी हर याद।।2।। तुम्हे तो याद ही होंगे जब लोगो में चर्चे तेरी खूबसूरती के होते थे, हम वहां से चिढ़ कर निकल जाते थे।। ऐसा भी नही था की हम Continue reading तेरी याद